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अनाज के कचरे से बन सकता है ईंधन

वैज्ञानिकों ने बनाई सस्ती और सुगम तकनीक जिससे ब्रेवरीज में बचे वेस्ट अनाज को ईंधन में बदल सकते हैं 

By Lalit Maurya

On: Thursday 21 November 2019
 

Credit: bleztseng/pixabayक्वीन्स यूनिवर्सिटी, बेलफास्ट के शोधकर्ताओं ने ऐसी सस्ती तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल की है, जिसकी सहायता से ब्रेवरीज में बचे जौ को कार्बन में बदल सकते हैं। इसे घरों में रिन्यूएबल फ्यूल के रूप में उपयोग किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक की सहायता से वेस्ट को चारकोल में बदल सकते हैं जिससे विकासशील देशों की खाना पकाने और पानी को साफ करने सम्बन्धी चारकोल की जरूरत पूरी हो सकती है। इसके संदर्भ में एक विस्तृत शोध जर्नल ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

गौरतलब है कि हर साल यूरोपियन यूनियन द्वारा ब्रेवरीज में बचा लगभग 34 लाख टन अनाज फेंक दिया जाता है जिसका वजन लगभग 500,000 हाथियों के बराबर होता है। स्कूल ऑफ केमिस्ट्री और केमिकल इंजीनियरिंग के अहमद उस्मान के अनुसार "हम सिर्फ 1 किलो अनाज का उपयोग करके लगभग इतना एक्टिवेटिड कार्बन बना सकते है, जिसे 100 फुटबॉल के मैदानों में बिछाया जा सकता है।

कैसे काम करती है यह तकनीक

इसको बनाने के विषय में उस्मान ने बताया कि हमारी यह कम लागत की तकनीक बहुत ही सरल है जिसके बस कुछ ही चरण हैं। इसके लिए सबसे पहले अनाज को सुखाया जाता है। इसके बाद उसे दो चरणों में फॉस्फोरिक एसिड की सहायता से हीट ट्रीटमेंट दिया जाता है और उसके बाद पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड में वॉश कर दिया जाता है जिससे हमें एक्टिवेटिड कार्बन प्राप्त हो जाता है। इसके लिए प्रयोग होने वाले दोनों ही केमिकल बहुत ही सस्ते होते हैं।

उनके अनुसार “आम तौर पर तरल कार्बन मध्य पूर्व से यूके को भेजा जाता है, जबकि ठोस बायोकार्बन वुड पैलेट्स  के रूप में यूएस और अन्य देशों को भेज दिया जाता है। उनके अनुसार इस नई तकनीक की सहायता से हम स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। इससे कृषि क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को भी कम किया जा सकता है। साथ ही इससे हम एक कीमती उत्पाद भी बना रहे हैं। जिसकी बहुत ज्यादा मांग है।"

दुनिया भर में ईंधन और वाटर फिल्टर के लिए चारकोल के रूप में कार्बन की बहुत ज्यादा मांग है। यह हमारी धरती के लिए बहुत अच्छा है कि हम बचे हुए अनाज का उपयोग कर रहे हैं, यदि ऐसा नहीं होता तो उसे वेस्ट के रूप में फेंक दिया जाता। इसमें संदेह नहीं है कि यह वैश्विक स्तर पर वेस्ट और ऊर्जा की समस्या को हल कर सकता है।

उस्मान के अनुसार “जौ के वेस्ट से एक कीमती उत्पाद का निर्माण, सर्कुलर इकॉनमी का बहुत ही अच्छा उदाहरण है। यह पर्यावरण के साथ-साथ हमारे लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से भी लाभदायक है।” उस्मान को उम्मीद है कि जल्द ही व्यावसायिक रूप से भी एक्टिवेटेड कार्बन और कार्बन नैनोट्यूब बनाने के अवसरों को तलाश लिया जाएगा।