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20 साल में समुद्र में तीन गुणा बढ़ जाएगा कचरा, मछलियों से ज्यादा होगी प्लास्टिक

अनुमान है कि 2040 तक समुद्र में मौजूद कुल प्लास्टिक वेस्ट बढ़कर करीब 60 करोड़ टन हो जाएगा

By Lalit Maurya

On: Friday 24 July 2020
 

अनुमान है कि 2040 तक समुद्र में मौजूद प्लास्टिक वेस्ट में तीन गुना तक इजाफा हो जाएगा। 2050 तक समुद्र में उतना प्लास्टिक होगा जितनी उसमें मछलियां भी नहीं हैं। यह जानकारी हाल ही में जारी एक नए शोध से सामने आई है। यह शोध द प्यू चैरिटेबल ट्रस्ट और सिस्टेमिक नामक संस्था द्वारा किया गया है। इसमें एलेन मैकआर्थर फाउंडेशन, कॉमन सीस, ऑक्सफोर्ड और लीड्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने सहयोग किया है। यह शोध अंतराष्ट्रीय जर्नल साइंस में प्रकाशित हुआ है। 

शोध के अनुसार, 2016 में करीब 1.1 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा समुद्रों में फेंका गया था। यदि दुनियाभर के देश और कंपनियां इसको रोकने में असफल रहती हैं तो यह 2040 तक बढ़कर 2.9 करोड़ टन हो जाएगा। यह दुनिया भर में समुद्र तट के प्रत्येक मीटर पर लगभग 50 किलोग्राम प्लास्टिक के बराबर होगा। चूंकि प्लास्टिक को खत्म होने में कई दशक लग जाते हैं, ऐसे में अनुमान है कि समुद्र में मौजूद कुल प्लास्टिक वेस्ट बढ़कर 60 करोड़ टन के करीब हो जाएगा। इसकी विशालता का अनुमान आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यह करीब 30 लाख ब्लू व्हेल मछलियों के वजन से भी ज्यादा होगा। 

इससे पहले ओसियन कन्ज़र्वेंसी नामक संस्था द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, हर साल करीब 80 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा समुद्रों में फेंका जा रहा है। अनुमान था कि करीब 15 करोड़ टन कचरा समुद्रों में मौजूद है।  यह पर्यावरण और समुद्री इकोसिस्टम को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है। 

दुनिया के लिए आसान नहीं है प्लास्टिक कचरे को कम करने की डगर

दुनियाभर में प्लास्टिक वेस्ट को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं पर इसके बावजूद इस कचरे में लगातार वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार यदि देश प्लास्टिक से बने उत्पादों की बिक्री और उपयोग को सीमित करने में सफल रहते हैं, इसका कोई विकल्प ढूंढ लेते हैं, इसे समुद्रों में पहुंचने से रोक लेते हैं तो प्लास्टिक वेस्ट में आधे से कम की कटौती की जा सकती है। हालांकि दुनियाभर के देशों और कंपनियों ने प्लास्टिक वेस्ट को कम करने के अनेक उपाय और घोषणाएं की हैं, लेकिन इसके बावजूद इन सब उपायों से प्लास्टिक वेस्ट की मात्रा में केवल 7 फीसदी की कटौती हो सकती है। 

शोध के अनुसार यदि आज उपलब्ध तकनीकों का बेहतर ढंग से उपयोग किया जाए तो समुद्रों में बढ़ रहे प्लास्टिक वेस्ट में 80 फीसदी से भी ज्यादा की कटौती की जा सकती है। इसके लिए नीति निर्माताओं को बड़े परिवर्तन करने की जरूरत है। इसके लिए प्लास्टिक के उत्पादन और उपभोग को कम करना होगा। साथ ही प्लास्टिक की जगह पेपर और अन्य सामग्री रीसाइकल हो सकने वाले उत्पादों पर बल देना होगा| साथ ही विकासशील देशों में वेस्ट कलेक्शन और मैनेजमेंट की प्रक्रिया में सुधार करना होगा जबकि अमीर देशों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और रीसाइक्लिंग पर ध्यान देना होगा। इसके अलावा अपने वेस्ट को विकासशील देशों में भेजना बंद करना होगा।

यदि दुनिया के देशों ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले वक्त में करीब 400 करोड़ लोग वेस्ट कलेक्शन और मैनेजमेंट जैसी सुविधाओं से वंचित होंगे। ऐसे में वेस्ट की मात्रा में कितनी वृद्धि होगी इस बात का अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हैं। ऊपर से जिस तरह से कोविड-19 महामारी के चलते वेस्ट में इजाफा हो रहा है वह इस समस्या को अधिक बड़ा और खतरनाक बना देगा। दुनिया के कई देशों में समुद्रों में बड़े पैमाने पर पीपीई किट जैसे दस्ताने और मास्क मिले हैं जो समुद्रों में मौजूद वेस्ट की मात्रा में इजाफा कर रहे हैं। साथ ही महामारी के खतरे को और बढ़ा रहे हैं। मछलियों और अन्य समुद्री जीवों के जरिए यह वेस्ट घूमकर हमारी फ़ूड चेन में पहुंच रहा है। 

रिपोर्ट के अनुसार प्लास्टिक वेस्ट को कम करने के उपाय न केवल समुद्र में हो रहे प्लास्टिक प्रदूषण में 80 फीसदी की कटौती कर देंगे, बल्कि इससे 2040 तक करीब 5,23,862 करोड़ रुपए (7,000 करोड़ डॉलर) की बचत भी होगी। इससे 7,00,000 लोगों को रोजगार भी मिलेगा और प्लास्टिक के कारण हो रहे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी 25 फीसदी की कमी भी आएगी।