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कोरोनावायरस रोगी के शरीर में रोगाणु की संख्या को कैसे बढ़ाता है: रिसर्च

जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर बायोफिजिकल केमिस्ट्री के पैट्रिक क्रैमर के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने अब कोरोना पॉलीमरेज की 3-डी संरचना का निर्धारण किया है

By Dayanidhi

On: Wednesday 29 April 2020
 
Photo: Flickr
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जब कोई व्यक्ति नोवल कोरोनावायरस (सार्स-सीओवी-2) से संक्रमित हो जाता है, तो वायरस संक्रमित व्यक्ति की कोशिकाओं में तेजी से फैलता है। रोगाणु अपनी संख्या को लगातार बढ़ाता रहता है, ये एक लंबे आरएनए से जुड़ जाते हैं। यह कार्य संक्रमित "कॉपी मशीन" कहे जाने वाले पॉलीमरेज द्वारा किया जाता है। जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर बायोफिजिकल केमिस्ट्री के पैट्रिक क्रैमर के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने अब कोरोना पॉलीमरेज की 3-डी संरचना का निर्धारण किया है। इससे अब यह जांचना संभव हो गया है कि संक्रमण रोकने वाली दवाई जैसे कि रेमेडिसविर, जो पॉलीमरेज को रोक देती है और रोकने वाले नए पदार्थों की खोज करता है।

मैक्स प्लैंक के निदेशक क्रैमर कहते हैं हमें पॉलीमरेज का अध्ययन करने का व्यापक अनुभव है, वर्तमान महामारी के मद्देनजर हम कोरोनावायरस से निपटने में मदद करना चाहते हैं।

हौके हिलन बताते हैं कि हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि कोरोनावायरस पॉलीमरेज की विशेष संरचना है, यह अन्य संरचनाओं से भिन्न है, जिनकी अब तक हम जांच कर रहे थे। 

कोरोनावायरस पॉलीमरेज उसी तरह से आरएनए को बांधता है जैसे अन्य प्रकार के वायरस बांधते हैं। हालांकि, इस पॉलीमरेज में एक अतिरिक्त तत्व शामिल हैं, जब तक यह रोगाणु (आनुवंशिक सामग्री) को दोगुना नहीं करता, तब तक आरएनए को बांधता है। यह कोरोना वायरस के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जीनोम में लगभग 30 हजार बिल्डिंग ब्लॉक होते हैं और इसलिए यह लंबा होता है।

संक्रमण रोकने वाले (एंटीवायरल) कैसे काम करते हैं

यह जानते हुए कि कोरोनावायरस पॉलीमरेज का निर्माण सूक्ष्म पैमाने पर करता है, यह रोगाणुओं को बेहतर ढंग से समझने और उनका सामना करने की नई संभावनाओं को खोलता है। अगले चरण में क्रैमर की टीम विस्तार में जांच करेगी कि संक्रमण को रोकने वाले (एंटीवायरल) पदार्थ कोरोना वायरस को फैलने से कैसे रोकते हैं। कई उम्मीदें रेमेडिसविर पर टिकी हुई हैं, जो सीधे पॉलीमरेज को रोक देती हैं।

संरचना को देखते हुए यह संभव हो सकता है कि रेमेडिसविर जैसे मौजूदा पदार्थों के प्रभाव में सुधार किया जा सकता है। क्रैमर कहते हैं लेकिन हम उन नए पदार्थों की भी खोज करना चाहते हैं जो वायरस पॉलीमरेज को रोकने में सक्षम हैं।  इस महामारी से निपटने के लिए हम तुरंत चीजों को गति देने के लिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ अपने निष्कर्षों को साझा करना चाहते हैं।

कोरोना पॉलीमरेज की संरचना निर्माण और उसका अध्ययन 

शोधकर्ताओं ने कहा कि कोरोना पॉलीमरेज की त्रि-आयामी संरचना का निर्माण करना कठिन था। पहले, हमें तीन शुद्ध प्रोटीन से पॉलीमरेज को पुनर्गठित करना पड़ा। वैज्ञानिक ने पॉलीमरेज की गतिविधि का निर्धारण करने के लिए एक विशेष परीक्षण किया। टीम ने तब इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में 1 लाख से अधिक नमूनों की जांच की पहले सेट में निराशा हाथ लगी। यद्यपि 10 दिनों तक रात-दिन तस्वीरें ली गई, लेकिन हम संरचना में विस्तृत पहचान करने में असमर्थ रहे। हालांकि, एक नमूना अलग दिख रहा था, यह अजीब सा था।  हमारा पहला विचार इसे हटाने का था।

दिमित्री तेगुनोव ने कहा सौभाग्य से, हमने ऐसा नहीं किया, यह नमूना पूरी तरह से उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़े प्रदान कर रहा था, जिसकी हमें आवश्यकता थी। तेगुनोव डेटा प्रोसेसिंग विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने कुछ समय में बड़ी मात्रा में छवि सम्बंधित आंकड़ों को संसाधित करने के लिए सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम बनाया था। यह अध्ययन बायो रक्सिव नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। हांलाकि इस अध्ययन को समीक्षा के लिए विशेषज्ञों के पास भेजा गया है।

पॉलीमेसिक संरचना का निर्धारण करना ही गौटिंगेन शोधकर्ताओं द्वारा महामारी से निपटने में अंतिम योगदान नहीं है। हम इसे जुड़े संक्रमित आरएनए को इस तरह से बदलते की बात कर रहे हैं जो मनुष्य कि प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर न कर पाए। क्रैमर ने कहा निश्चित रूप से, संरचनात्मक जीवविज्ञानी के रूप में, हम वायरस में आगे के लक्ष्य खोजने की उम्मीद करते हैं जो नई चिकित्सीय रणनीतियों के लिए मार्ग प्रशस्त कर सके।