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वैज्ञानिकों ने खोजा नया एंटीबायोटिक, अलग तरीके से करता है बैक्टीरिया पर वार

शोधकर्ताओं द्वारा चूहे पर किये अध्ययन से पता चला कि यह एंटीबायोटिक स्टैफिलोकोकस ऑरियस नामक बैक्टीरिया से होने वाले दवा प्रतिरोधी (ड्रग रेसिस्टेन्स) इन्फेक्शन को भी रोक सकता है

By Lalit Maurya

On: Friday 14 February 2020
 
Photo: wikimedia commons
Photo: wikimedia commons Photo: wikimedia commons

वैज्ञानिकों ने एक नए एंटीबायोटिक को खोजने में सफलता हासिल की है। जो जीवाणुओं से निपटने के लिए बिलकुल नए तरीके का प्रयोग करता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के खिलाफ लड़ने में भी एक कारगर हथियार साबित हो सकता है। इस एंटीबायोटिक को कॉर्बोमाइसिन के नाम से जाना जाता है। यह एंटीबायोटिक, बैक्टीरियल सेल की दीवार और उसके कार्यों को अवरुद्ध कर देता है। यह एंटीबायोटिकस के ग्लाइकोपेप्टाइड्स परिवार से सम्बन्ध रखता है। जोकि मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया द्वारा निर्मित होता है।

शोधकर्ताओं द्वारा चूहे पर किये अध्ययन से पता चला कि यह एंटीबायोटिक स्टैफिलोकोकस ऑरियस नामक बैक्टीरिया से होने वाले दवा प्रतिरोधी (ड्रग रेसिस्टेन्स) इन्फेक्शन को भी रोक सकता है। यह बैक्टीरिया कई गंभीर संक्रमणों का कारण बन सकता है। वैज्ञानिकों द्वारा इसके विषय में किया शोध अंतराष्ट्रीय जर्नल नेचर में प्रकाशित हुआ है।

कैसे काम करता है यह एंटीबायोटिक

इस शोध की प्रमुख शोधकर्ता और मैकमास्टर में शोधार्थी एलिजाबेथ कल्प ने बताया कि आमतौर पर बैक्टीरिया अपनी कोशिकाओं के चारों ओर एक दीवार का निर्माण कर लेते हैं। जो उन्हें आकार और शक्ति प्रदान करती है। पेनिसिलिन जैसे एंटीबायोटिक्स इस दीवार के निर्माण को रोककर बैक्टीरिया को मारते हैं। लेकिन यह नया एंटीबायोटिक वास्तव में इसके विपरीत काम करता है, वो दीवार को टूटने से रोक देता है। जिससे उसकी कोशिका का विभाजन रुक जाता है और वो फैल नहीं पाता है।

किसी कोशिका को विकसित होने के लिए उसका विभाजित होकर बढ़ना जरुरी है। और यदि आप पूरी तरह से उस दीवार को टूटने से रोक देते हैं तो वह बैक्टीरिया एक जेल में फंस जाता है। जिससे उसका विस्तार और वृद्धि रुक जाती है।" यह एंटीबायोटिक्स कैसे काम करता है इस बात को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने ग्लाइकोपेप्टाइड्स परिवार के अन्य ज्ञात एंटीबायोटिक्स का भी अध्ययन किया है। जिससे यह समझा जा सके कि आखिर क्यों उनके जीन एंटीबायोटिक रेसिस्टेन्स पर काम नहीं करते हैं।

शोधकर्ताओं ने बताया कि इन एंटीबायोटिक्स के जीन अन्य एंटीबायोटिक्स से अलग हैं, साथ ही इनकी बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ने की एक अलग रणनीति है।  जिसकी वजह से यह एंटीबायोटिक रेसिस्टेन्स बैक्टीरिया से लड़ने में भी कारगर हो सकता है।

डॉ कल्प ने बताया कि इस अवधारणा को अन्य एंटीबायोटिक्स पर भी लागू किया जा सकता है। साथ ही यह हमें नए एंटीबायोटिक्स की खोज में मदद कर सकता है जो शायद बिलकुल अलग तरीके से काम करते हों। हमें इस अध्ययन में एक बिलकुल नए तरह के एंटीबायोटिक का पता चला है। लेकिन हमारी खोज आगे चलकर और नए एंटीबायोटिक्स की पहचान करने में मदद कर सकती है।"