Sign up for our weekly newsletter

वैज्ञानिकों ने बनाया ऐसा सेंसर जो हवा में मौजूद नए वायरस का पता लगाता है

अध्ययनकर्ताओं ने एम 13 बैक्टीरियोफेज के बारे में बताया है, जो एक नैनोमीटर के आकार का फिलामेंटस वायरस है

By Dayanidhi

On: Tuesday 15 September 2020
 
Photo :  Advanced Science
Photo :  Advanced Science
Photo : Advanced Science

 

वर्तमान में चल रहे कोविड-19 महामारी को देखते हुए, दुनिया को ऐसी तकनीक की आवश्यकता है जो हानिकारक पदार्थों या हवा में मौजूद प्रदूषकों सहित अदृश्य खतरों को तेजी और सही से पहचान सके। रंग आधारित (कलरमेट्रिकसेंसर- वे उपकरण हैं जो रंग परिवर्तन के माध्यम से वातावरण के बारे में जानकारी को सहज रूप से प्रकट करते हैं। यह एक आकर्षक विकल्प हैं। लेकिन, इन सेंसरों से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए, उन्हें बड़े पैमाने पर उत्पादन करना आसान होना चाहिए। यह वर्तमान में उपलब्ध रंग आधारित सेंसर की एक प्रमुख सीमा है, जिसमें जटिल निर्माण प्रक्रियाओं के साथ जटिल संरचनाओं की आवश्यकता होती है। मौजूदा उपकरणों के साथ अन्य समस्याओं में धीमी प्रतिक्रिया समय सहित अन्य कारण शामिल हैं।

अब कोरिया के ग्वांगजू इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने एक नया अध्ययन किया है। अध्ययन में, एम 13 बैक्टीरियोफेज नामक वायरस की एक पतली परत से बने एक नए प्रकार के रंग आधारित सेंसर को विकसित करके इन समस्याओं और सीमाओं से निपटने का प्रयास किया है। यह अध्ययन एडवांस्ड साइंस में प्रकाशित हुआ है।

उन्होंने इस प्रकार के वायरस का उपयोग किया, क्योंकि यह इसकी संरचना को बदल सकता है। इस प्रकार इसके दिखाई देने संबंधी (ऑप्टिकल) गुणों से आसपास के वातावरण में उपस्थित हानिकारक यौगिकों के कारण यह परिवर्तन की प्रतिक्रिया करता है। अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रो यंग मिन सांग बताते हैं हमारे अध्ययन में, हमने एम 13 बैक्टीरियोफेज के बारे में बताया है, जो एक नैनोमीटर के आकार का फिलामेंटस वायरस है, एक संवेदी परत के रूप में इसके वॉल्यूमेट्रिक गुणों के कारण इसमें विस्तार होता है।

वैज्ञानिकों ने पदार्थ में हानिरहित अति पतली रेजोनेंस प्रोमोटर लेयर (एचएलआरपी) के साथ जोड़ करके एम13 बैक्टीरियोफेज को बनाया है। फिर, उन्होंने पदार्थ (सब्सट्रेट) में सुधार करके वायरस की कोटिंग परत की अनुनाद (रेजोनेंस) को अधिकतम कर दिया, ताकि बैक्टीरियोफेज विशिष्ट हवा में मौजूद पदार्थों के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाए। इसने 'वायरस' के लिए बहुत कम सांद्रता पर रसायनों का पता लगाना संभव बना दिया, जो एक अरब के दसवें हिस्से जितना कम है।

प्रो सॉन्ग ने तकनीक के बारे में बताते हुए कहा कि वायरस की परत जमाव में सुधार करके बहुत-पतली आकार के साथ लेपित किया गया था, जिसने हवा में मौजूद खतरनाक प्रदूषकों का पता लगाने की दर को बढ़ाया। अनुनाद (रेजोनेंस) में वृद्धि के साथ एचएलआरपी को एम13 बैक्टीरियोफेज वायरस की परत में नैनोमीटर-स्केल मोटाई तक का परिवर्तन हुआ जिसे एक अलग रंग प्राप्त करने के लिए लागू किया गया था। नतीजतन, रंग परिवर्तन अधिकतम अनुनाद होने से अधिक हुआ था।

वैज्ञानिकों ने वातावरण में होने वाले विभिन्न बदलावों के साथ नए सेंसर का परीक्षण किया, जैसे आर्द्रता में परिवर्तन, और वाष्पशील कार्बनिक रसायनों और अंतःस्रावी रसायनों को निष्क्रिय करने जैसे यौगिकों के साथ। दोनों मामलों में, इन बढ़ते बदलावों को सेंसर में अलग-अलग रंग परिवर्तनों के माध्यम से सफलतापूर्वक देखा जा सकता है, इस प्रकार यह व्यावहारिकता को दर्शाता है।

यह अत्यधिक प्रभावी और रंग आधारित सेंसर डिज़ाइन है। जिसे वास्तविक जीवन में विभिन्न प्रकार के प्रयोगों के लिए उपयोग किया जा सकता है, जैसे हानिकारक औद्योगिक रसायनों का पता लगाना या वायु की गुणवत्ता का आकलन करने आदि। यह सब करने के लिए, ये सेंसर चिकित्सा, नैदानिक सेटिंग्स में अमूल्य उपकरण बन सकते हैं, जैसा कि प्रो सांग ने कहा भविष्य में, जेनेटिक इंजीनियरिंग में प्रगति सेंसर की संवेदनशीलता को बढ़ाएगी और चिकित्सा उद्योग में उनकी उपयोगिता बढ़ेगी। यह विशिष्ट वायरस और रोगजनकों का पता लगाने के लिए एक नैदानिक किट के रूप में उपयोग किया जा सकता है।