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वैज्ञानिकों नें सीओ2 को एथिलीन में बदलने का सबसे प्रभावी तरीका विकसित किया

एथिलीन दुनिया भर में प्लास्टिक, सॉल्वैंट्स, सौंदर्य प्रसाधन आदि के उत्पादन के उपयोग में आने वाला एक महत्वपूर्ण केमिकल है

By Dayanidhi

On: Friday 18 September 2020
 
Photo:  Nature Catalysis
Photo:  Nature Catalysis Photo: Nature Catalysis

कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रीनहाउस गैस के रूप में जाना जाता है। एक नए अध्ययन में बताया गया है कि निरंतर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से वैश्विक समुद्र का स्तर लगभग 40 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। इस तरह की वृद्धि का दुनिया भर में विनाशकारी प्रभाव होगा। तूफानों की विनाशकारी शक्ति में वृद्धि होगी और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को बार-बार गंभीर बाढ़ का सामना करना पड़ेगा।

यदि इस तरह की घटनाओं से बचना है तो हमें इनका समाधान ढूढ़ना होगा। इसी क्रम में वैज्ञानिकों नें कार्बन डाइऑक्साइड को एक अन्य कीमती केमिकल में बदलने का तरीका निकाला है ताकि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।

कैलिफोर्निया इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैल्टेक) और यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया-लॉस एंजिल्स (यूसीएलए) की सैमुअली स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की एक शोध टीम ने कार्बन डाइऑक्साइड को एथिलीन में कुशलतापूर्वक परिवर्तित करने के लिए एक तरीका विकसित किया है। एथिलीन दुनिया भर में प्लास्टिक, सॉल्वैंट्स, सौंदर्य प्रसाधन और अन्य महत्वपूर्ण उत्पादों के उत्पादन करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण केमिकल है।

वैज्ञानिकों ने एक रासायनिक प्रतिक्रिया करने के लिए विशेष रूप के आकार की सतहों के साथ नैनोस्केल तांबे के तारों का विकास किया है। जो एथिलीन पैदा करते समय ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करता है। एथिलीन एक कीमती केमिकल है। प्रतिक्रिया की गणना से पता चलता है कि उत्प्रेरक के आकार के आधार पर हाइड्रोजन या मीथेन पर एथिलीन का उत्पादन करता है। यह अध्ययन नेचर कैटलिसिस में प्रकाशित किया गया है।

अध्ययनकर्ता और यूसीएलए में सामग्री विज्ञान और इंजीनियरिंग के प्रोफेसर यू हुआंग ने कहा, हम वैश्विक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को कम करने के लिए जीवाश्म ईंधन को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। यह सामग्री जो कुशलता से ग्रीनहाउस गैसों को मूल्यवान ईंधन में बदल सकती है। यह प्रक्रिया रासायनिक आपूर्ति को तेजी से पूरा करके जीवाश्म ईंधन पर रोक लगाती है। यह ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पूरा प्रयोग और सैद्धांतिक विश्लेषण कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोग के लिए एक स्थायी मार्ग प्रस्तुत करता है।

वर्तमान में एथिलीन का वैश्विक वार्षिक उत्पादन 15.8 करोड़ (158 मिलियन) टन है। इसमें से अधिकांश को पॉलीथीन में बदल दिया जाता है, जिसका उपयोग प्लास्टिक पैकेजिंग में किया जाता है। एथिलीन को हाइड्रोकार्बन से संसाधित किया जाता है, जैसे प्राकृतिक गैस।

विलियम ने कहा इस प्रतिक्रिया को उत्प्रेरित करने के लिए तांबे का उपयोग उत्पादन में तेजी लाने के लिए किया गया, ताकि औद्योगिक उत्पादन काफी तेजी से हो सके। गोडार्ड  और उनके सहयोगियों ने कहा यह अध्ययन एक ऐसा रास्ता दिखाता है, जिसमें एक उद्योग सीओ2 का उपयोग कर एथिलीन उत्पाद में बदलने की क्षमता रखता है, अन्यथा यह सीओ2 वायुमंडल में जाकर मिल जाएगी। गोडार्ड सह-अध्ययनकर्ता और कैलटेक के चार्ल्स और मैरी फेरकेल रसायन विज्ञान, सामग्री विज्ञान और एप्लाइड भौतिकी के प्रोफेसर हैं।

कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) को एथिलीन प्रतिक्रिया (सी2एच4) में कमी करने के लिए तांबे के उपयोग के दौरान दो बार प्रतिक्रिया होती है।

सबसे पहले, प्रारंभिक रासायनिक प्रतिक्रिया ने हाइड्रोजन और मीथेन का उत्पादन किया। दूसरे में एथिलीन उत्पादन के परिणामस्वरूप, पिछला प्रयास लंबे समय तक नहीं चला, क्योंकि रूपांतरण दक्षता अंत में बंद हो गई क्योंकि प्रणाली चलती रही।

इन दो बाधाओं को दूर करने के लिए, शोधकर्ताओं ने अत्यधिक सक्रिय "चरणों" के साथ तांबा नैनोवायर के डिजाइन पर ध्यान केंद्रित किया। जो कि परमाणु पैमाने पर व्यवस्थित सीढ़ियों के एक सेट के समान है। इस अध्ययन की एक पेचीदा खोज यह है कि नैनोवायर की सतहों पर यह पैटर्न प्रतिक्रिया की स्थिति के तहत स्थिर रहा। आम धारणा के विपरीत इसने उच्च ऊर्जा सुविधाओं को सुचारू किया। यह एथिलीन के उत्पादन में प्रणाली के स्थायित्व और चयनात्मकता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

टीम ने 70फीसदी से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड-से-एथिलीन रूपांतरित किया, जो पिछले डिजाइनों की तुलना में अधिक कुशल था। यह समान परिस्थितियों में कम से कम 10 फीसदी कम उत्पादन करता था। नई प्रणाली 200 घंटे तक चली, रूपांतरण दक्षता में थोड़ा बदलाव के साथ, तांबा आधारित उत्प्रेरक ने काफी तेजी से काम किया।