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“एआई युक्त मशीनें बदल देंगी ब्रह्मांड में मानव जीवन”

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में खगोल विज्ञान विभाग के प्रमुख व भौतिकी वैज्ञानिक अब्राहम लोएब ने डाउन टू अर्थ से नई भौतिकी को लेकर बात की

By Akshit Sangomla

On: Thursday 12 March 2020
 

ब्रह्मांड की शुरुआत को लेकर महाविस्फोट (बिग-बैंग) एक व्यापक स्वीकृत सिद्धांत है, वैज्ञानिकों को इस सिद्धांत पर कितना भरोसा है और क्यों?

सबूतों की एक लंबी सूची की मदद से ही बिग-बैंग मॉडल बना है। इस मॉडल का स्वीकृत पक्ष यह है कि ब्रह्मांड की शुरुआत एक बेहद गर्म और सघन दशा से हुई थी। यह मॉडल मानता है कि कुछ मामूली विसंगतियों को छोड़कर ब्रह्मांड की प्रारंभिक अवस्था एकसमान थी, जो गुरुत्वाकर्षण के कारण समय के साथ बढ़ती गई। इससे खगोलीय संरचनाएं बनीं, जिसे आज हम आकाशगंगाओं और सितारों के रूप में देखते हैं। मिसाल के तौर पर हमारी दूधिया आकाशगंगा (मिल्की-वे), जो हमारे सूर्य की मेजबानी कर रहा है।

वास्तव में हमने पाया कि कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (सीएमबी) यानी खगोलीय सूक्ष्मतरंग पृष्ठभूमि आकाश में एकसमान चमक के साथ सभी दिशाओं में उपयुक्त परिमाण में बहुत कम अंतर से फैली हैं। यह ब्रह्मांड की प्रारंभिक अवस्था को प्रदर्शित करती है। यह मॉडल हीलियम, ड्यूटीरियम और लीथियम जैसे हल्के तत्वों की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता की ओर भी संकेत करता है। यह हल्के तत्व महाविस्फोट के बाद ब्रह्मांड के विस्तार के शुरुआती चंद मिनटों में ही अस्तित्व में आए थे।

महाविस्फोट के वक्त पूरा ब्रह्मांड सितारों की आतंरिक भाग से भी ज्यादा गर्म था। कई अनुमान इन टिप्पणियों से सहमत हैं। कुल मिलाकर हम जो आंकड़े मुहैया करा रहे हैं वे महाविस्फोट (बिग-बैंग) मॉडल का समर्थन करते हैं। लेकिन यहीं कुछ पेचीदा सवाल भी जन्म लेते हैं:

1. ऐसा क्या था जिससे बिग-बैंग हुआ या हम जो ब्रह्मांडीय विस्तार देखते हैं उससे पहले क्या था? पहली नजर में जैसे गुरुत्वाकर्षण महत्वपूर्ण है वैसे ही क्वांटम मेकेनिक्स (पदार्थ और प्रकाश के बेहद सूक्ष्म कणों का व्यवहार अध्ययन) महत्वपूर्ण था, लेकिन हमारे पास अब भी कोई सिद्धांत नहीं है जो आधुनिक भौतिकी के इन दो स्तंभों को एकजुट करता हो और इसलिए हम यह अनुमान नहीं लगा सकते कि बिग-बैंग से पहले क्या हुआ होगा।

2. हम खगोलीय आंकड़ों से अनुमान लगाते हैं कि मौजूदा ब्रह्मांड में अधिकांश पदार्थ और ऊर्जा एक अंधकार में है। हम उन्हें “डार्क मैटर” और “डार्क एनर्जी” कहते हैं। लेकिन ये सिर्फ ऐसे लेबल हैं जो हमारी अज्ञानता का संकेत देते हैं। हम भविष्य में इन्हें जानना चाहेंगे।

क्या ब्रह्मांड के बारे में जो ताजा जानकारी है उसमें डार्क एनर्जी और डार्क मैटर प्रमुख अज्ञात चीजे हैं?

हमारे पास इस बात का सबूत है कि हम जिस सामान्य पदार्थ से बने हैं, उससे कहीं अधिक पदार्थ ब्रह्मांड में हैं। सबसे पहले शुरुआती समय में विसंगतियां थीं, यदि वहां केवल सामान्य पदार्थ होता तो संबंधित विसंगति विकिरण द्वारा निकाल दी जाती। मिल्की-वे जैसी आकाशगंगाओं के निर्माण के लिए पदार्थ के एक रूप की आवश्यकता है जो विकिरण से न जुड़ती हो। जब हम आकाशगंगाओं को देखते हैं, तो हम अनुमान लगाते हैं कि उनके गैस और तारों के दृश्यमान द्रव्यमान की तुलना में उनमें अधिक द्रव्यमान होना चाहिए।

भौतिकविद फ्रिट्ज ज्विकी ने यह अनुमान लगाया था कि आकाशगंगाओं के समूहों में उनके दृश्यमान द्रव्यमान की तुलना में बहुत अधिक पदार्थ होते हैं। लेकिन हम अभी भी डार्क मैटर की प्रकृति के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। यह उन कणों से बना होता है, जो प्रकाश के साथ नहीं जुड़ते हैं (इसी कारण हम उन्हें नहीं देख सकते हैं) लेकिन हम नहीं जानते कि ये कौन से कण हैं। हम जानते हैं कि डार्क मैटर के प्राइमरी ब्लैक होल से बने होने की संभावना नहीं है, क्योंकि वे अन्य प्रभावों का उत्पादन करेंगे जो कि पर्यवेक्षणीय रूप से खारिज किए जाते हैं। हालिया प्रयोगों से कुछ अहम खोज होने की उम्मीद बनी है। हो सकता है लार्ज हेड्रॉन कोलायडर (प्रयोगशाला) या किसी अन्य प्रयोग से कोई नया कण खोजा जाए। लेकिन अभी तक हमें कोई सफलता नहीं मिली है। डार्क मैटर कणों की पहचान के लिए दूधिया आकाशगंगा से पृथ्वी पर आने वाले कणों को भी जांचने की कोशिश हुई, लेकिन यह प्रयोग भी बीते कई दशकों से सफल नहीं हुए हैं।

भविष्य में यह ब्रह्मांड बिना मानव और मानव के साथ कैसा होगा?

बिना मानव: कुछ ही अरब वर्षों में दूधिया आकाशगंगा अपने निकटतम आकाशगंगा से टकराएगी और रात्रि का आकाश बदल जाएगा। वहीं, सात अरब वर्ष में सूर्य की मृत्यु हो जाएगी। इस क्रम में पहले सूर्य एक लाल दानव तारा बनेगा और संभव है कि वह पृथ्वी को निगल जाए। इसके बाद उसका केंद्रीय भाग ठंडा होगा और वह सफेद “बौना तारा” बन जाएगा और इसका आकार पृथ्वी के बराबर होगा। अधिकांश तारों के पास सूर्य से दस गुना कम द्रव्यमान है, लेकिन वे 10 खरब वर्ष तक चमकते रहेंगे। यदि ब्रह्मांड का विस्तार जारी रहा तो यह हमारी आकाशगंगा के साथ एक घुप्प अंधेरे वाली और खाली जगह होगी।

मानव के साथ: कुछ वर्षों से तकनीक का विकास तेजी से हो रहा है। हम रोबोटिक्स और जेनेटिक्स जैसे क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटलिजेंस (एआई) में अति आधुनिकता के गवाह होंगे। एक हजार वर्ष के भीतर मानव ऐसी मशीन बनाएंगे जो उनकी बुद्धिमत्ता के पार अंतरिक्ष की लंबी यात्रा तय कर सकेंगी। वहीं, एआई युक्त 3 डी प्रिंटर्स दूसरे ग्रहों के कच्चे माल से वहां जीवन पैदा करेंगे। हमें किसी दूसरी सभ्यता के बारे में भी पता चल सकता है जो हमसे ज्यादा उन्नत हो। रोजाना अखबार पढ़कर मुझे यह बहुत ही गंभीरता से संदेह है “हम इस अंधकार के सबसे होशियार बच्चे हैं।”