Climate Change

मौत का पैगाम देती आकाशीय बिजली

आकाशीय बिजली को ईश्वरीय आपदा मानने की बजाय उससे होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है 

 
By Raju Sajwan
Last Updated: Thursday 18 April 2019

कई राज्यों में आंधी, तूफान व आकाशीय बिजली गिरने से लगभग 35 लोगों की जान चली गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि बुधवार को तूफान और ओले और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। देश में आकाशीय बिजली की घटनाएं बढ़ रही हैं। खासकर पिछले कुछ सालों में अप्रैल में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ा है।

पिछले वर्ष 2 मई को आंध्रप्रदेश में एक दिन में 41025 बार बिजली गिरने से 14 लोगों की मौत हुई थी। यह अब तक सबसे अधिक बार बिजली गिरने का आंकड़ा है। इससे पहले 24 अप्रैल को13 घंटों के भीतर 37 हजार बार बिजली गिरी थी। बिजली गिरने की घटना अकसर मानसून के दौरान होती हैं, लेकिन अब मानसून पूर्व आने वाले तूफान और बारिश के दौरान भी बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं।

मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी और मध्य भारत में बिजली गिरने की घटनाएं अधिक होती हैं। विभाग ने 12 राज्यों की पहचान की है, जहां आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छतीसगढ़, ओडिशा शामिल है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि ज्यादातर लोग, जिसमें सरकारें  भी शामिल हैं का मानना है कि ईश्वरीय प्रकोप के चलते बिजली गिरने की घटनाएं होती हैं। यही वजह है कि न तो इस तरह की घटनाएं रोकने के कोई इंतजाम किए जा रहे हैं और ना ही आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मरने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजे का प्रावधान है।

डाउन टू अर्थ द्वारा जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में बिजली गिरने से मरने वालों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। अमेरिका में 1970 के दशक में जहां औसतन साल भर में100 लोगों की मौत होती थी, वहीं 2015 में यह संख्या घटकर 27 रह गई। वहीं भारत में ये आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि 2000से 2014 के बीच लगभग 32743 लोगों की मौत आकाशीय बिजली के चपेट में आने से हुई।

अमेरिका में आंकड़ों में आई कमी का कारण सरकारी प्रयास हैं। वहां, सरकार ने लोगों को तूफान व आकाशीय बिजली के समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जागरूक किया। जबकि भारत में इसका अभाव देखा गया है। यहां आकाशीय बिजली की वजह से मौत की अधिकतर घटनाएं खेतों में होती हैं। इस तरह की बढ़ती घटनाओं को सबसे पहले ओडिशा सरकार ने नोटिस किया और पाया कि 2017 में ओडिशा में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 280 किसानों की मौत हुई, इनमें से 94 किसान धान के खेत में काम कर रहे थे। अध्ययन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि खेतों के आसपास लगे ताड़ के पेड़ कटने से आकाशीय बिजली से मौतें बढ़ी हैं।

आईआईटी, भुवनेश्वर के स्कूल ऑफ अर्थ, ओसियन एंड क्लाइमेट साइंस के विजिटिंग प्रोफेसर यूसी मोहंती बताते हैं कि भारत में खेतों के आसपास तोड़ के पेड़ लगे हैं और जब बिजली गिरती है तो सबसे पहले ताड़ के पेड़ पर गिरती है और पेड़ बिजली के करंट को अवशोषित कर जमीन के अंदर पहुंचा देता है। इसलिए खेतों के दोनों ओर या कम से कम एक ओर ताड़ के पेड़ लगाने चाहिए। पर्यावरणविद विजय मिश्रा भी कहते हैं कि भारत में व्यापक तौर पर ताड़ वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, क्योंकि बांग्लादेश में यह प्रयोग सफल रहा है।

ऐसा नहीं है कि भारत में आकाशीय बिजली का प्रकोप रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया गया। कुछ राज्यों ने इस दिशा में काफी काम किया है। जैसे कि, बिहार सरकार लाइटिंग (आकाशीय बिजली) सेंसर के तौर पर एक मोबाइल ऐप लॉन्च करने का वादा कर चुकी है। जबकि झारखंड में नामकुम नामक जगह पर एक लाइटनिंग अरेस्टर लगाया गया है, जो बिजली को सोखकर जमीन के अंदर पहुंचा देता है। इससे आसपास के इलाकों में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों की संख्या में कमी का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा रांची एयरपोर्ट, स्टेडियम और देवघर बाबा मंदिर में इस तरह के अरेस्टर लगाए गए हैं। झारखंड सरकार हर स्कूल और अस्पताल में इस तरह के अरेस्टर लगाने की दिशा में काम कर रही है।

कैसे गिरती है बिजली

तूफान के दौरान हवा हवा की गति के बढ़ने और कम होने के कारण एक विद्युतीय प्रवाह बनता है। इस दौरान पृथ्वी की बाहरी परत पर सकारात्मक चार्ज होता है, जो विपरीत चार्ज के आकर्षित करता है और आंधी के बादलों में मौजूद नकारात्मक चार्ज पृथ्वी की बाहरी परत पर मौजूद सकारात्मक चार्ज से जुड़ना चाहता है। बादल के निचले हिस्से में हवा के दबाव को दूर करने के लिए जब यह बहुत ज्यादा चार्ज हो जाता है तो चार्ज का बहाव पृथ्वी की ओर तेजी से भागता है। इसे स्टैप्ड लीडर कहते हैं। पृथ्वी का सकारात्मक चार्ज इस स्टैप्ड लीडर की तरफ आकर्षित होता है और सकारात्मक चार्ज आपस में मिलते है, जिससे एक विद्युतीय प्रवाह बादल में सकारात्मक चार्ज उत्पन्न करता है। इस विद्युतीय प्रवाह को बिजली का स्टैप्ड लीडर कहा जाता है, जिसे देखा जा सकता है। चूंकि मानव का शरीर विद्युत का संवाहक होता है, इसलिए हमारा शरीर आसमानी बिजली के प्रवाह को स्वीकार कर लेता है, जिसे बिजली गिरना कहते हैं।

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