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अदानी को खदान देने के विरोध में आदिवासियों ने मोर्चा खोला

दो दिन पैदल चलकर आदिवासियों ने किरंदुल स्थित एनडीएमसी दफ्तर पर धरना शुरू किया  

 
By Purusottam Thakur
Last Updated: Friday 07 June 2019
किरंदुल में एनएमडीसी दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे आदिवासी। Photo: Mangal Kunjam
किरंदुल में एनएमडीसी दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे आदिवासी। Photo: Mangal Kunjam किरंदुल में एनएमडीसी दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे आदिवासी। Photo: Mangal Kunjam

छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के दंतेवाडा जिला लौह अयस्क का भण्डार हैI इनमें से एक नंदराज पहाड़ पर स्थित एनएमडीसी की डिपाजिट -13 नंबर खदान अदानी को दिए जाने के खिलाफ आदिवासियों ने मोर्चा खोल दिया है।

शुक्रवार को हजारों की तादाद में आदिवासी दंतेवाड़ा के दूरदराज के इलाकों से पिछले एक दो दिन से पैदल मार्च करते हुए किरंदुल में एनएमडीसी दफ्तर पहुंचे और यहां धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनकारियों में महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। यह ग्रामीण आदिवासी अपने साथ अनाज लेकर चले थे और रास्ते में खाना बनाते और खाते हुए पहुंचे हैं।

प्रदर्शन में शामिल और इसका अगुवाई करनेवालों में से एक कुआकोंडा विकासखंड के जनपद सदस्य राजू भास्कर ने डाउन टू अर्थ से बात करते हुए कहा, “यहाँ तीन जिले के सरपंच, जनपद सदस्य, जिला सदस्य और हजारों ग्रामीण यहाँ  सब मिलकर बैलाडीला- किरंदुल में आये हैं, क्योंकि हमारे क्षेत्र में बिना हमारे से बात हुए ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है और हमारी पहाड़ियों को छिना जा रहा है। नंदाराज पहाड़ी और पिटौड़मेटा हमारे 84 गाँव का देवी स्थल है। फर्जी ग्राम सभा का आयोजन दिखा कर यहां की 13 नंबर पहाड़ी में खदान खोलने का ठेका अदानी ग्रुप को दे दिया गया है। हम यहाँ किसी को खदान खोलने नहीं देंगे और इसके खिलाफ लड़ेंगे”। 

अदानी समूह को खदान देने के विरोध में पैदल मार्च करते आदिवासी। Photo: Mangal Kunjam

सामाजिक कार्यकर्त्ता और आम आदमी पार्टी के नेता बल्लू भवानी ने सरकार के इस कदम को संविधान के खिलाफ करार दिया है। उन्होंने कहा, “फर्जी ग्राम सभा के जरिये जनता को धोखे में रखा गया है। यहाँ सिर्फ 106 लोगों ने दस्तखत किए हैं और उसमें भी ज्यादातर दस्तखत फर्जी हैं। इसमें सरपंच के भी दस्तखत फर्जी हैं। यह शासन-प्रशासन की साजिश है। जमीन हमारी जा रही है और ग्राम सभा दंतेवाडा में की जा रही है? हमारे पूरे बस्तर संभाग में ऐसा ही होता है। जब जमीन मेरी जा रही है तो सरकार को मुझसे पूछना चाहिए”।

गौरतलब है कि बैलाडीला डिपोजिटी-13 में 315.813 हेक्टेयर रकबे में लौह अयस्क खनन के लिए वन विभाग ने वर्ष 2015 में पर्यावरण संबंधी अनापत्ति दी थी। जिस पर एनएमडीसी और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से उत्खनन करना था। इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार के बीच हुए करार के तहत संयुक्त उपक्रम एनसीएल बनाया गया था, लेकिन इसे निजी कंपनी अदानी को 25 साल के लिए लीज हस्तांतरित कर दी गई। इस रकबे में 350 मिलियन टन लौह अयस्क मौजूद होने की बात कही जा रही है।  

सरकार और कंपनी पर यह भी आरोप है कि अदानी ग्रुप ने सितम्बर 2018 को बैलाडीला आयरन और माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई और दिसम्बर 2018 को केंद्र सरकार ने इस कंपनी को लीज दे दी।

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