Climate Change

यूएनसीसीडी कॉप-14 सम्मेलन शुरु, 30 फैसलों पर सहमति की उम्मीद

जावेडकर ने कहा, इंसान ने ही धरती व प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है, अब उसे ही इस नुकसान को कम करना चाहिए

 
By DTE Staff
Last Updated: Monday 02 September 2019
यूएनसीसीडी कॉप 14 के उद्धाटन अवसर पर भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेडकर, राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो, यूएनसीसीडी के सचिव इब्राहिम। फोटो: पीआईबी
यूएनसीसीडी कॉप 14 के उद्धाटन अवसर पर भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेडकर, राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो, यूएनसीसीडी के सचिव इब्राहिम। फोटो: पीआईबी यूएनसीसीडी कॉप 14 के उद्धाटन अवसर पर भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेडकर, राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो, यूएनसीसीडी के सचिव इब्राहिम। फोटो: पीआईबी

धरती को बंजर कर रहे मरुस्थलीकरण का सामना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के तहत 12 दिवसीय 14वां कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (कॉप-14) सोमवार को इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में शुरु हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 9 सिंतबर को उच्चस्तरीय बैठक का उद्घाटन करेंगे। सम्मेलन में 30 ठोस निर्णय लिए जाएंगे, ताकि मरुस्थलीकरण को रोका जा सके।

उद्घाटन अवसर पर भारत के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावेडकर ने कहा कि व्यापक स्तर पर जागरूकता तथा लोगों की भागीदारी समय की आवश्यकता है। चाहे जलवायु परिवर्तन हो या मरुस्थलीकरण हो, इंसानों के कार्यों ने प्रकृति के संतुलन को नुकसान पहुंचाया है। अब यह लगने लगा है कि यदि इंसानों के कार्यों से प्रकृति और धरती को नुकसान पहुंचा है तो सकारात्मक मानवीय कार्यों से उस नुकसान को कम किया जा सकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को हम एक बेहतर दुनिया दे सकें।

जावेडकर ने कहा कि दुनिया भर में कृषि योग्य भूमि की उर्वरता शक्ति कम हो रही है, इसलिए विश्व स्तर पर इस भूमि को संरक्षित करने का अभियान शुरू हुआ है और 122 देशों ने  इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय लक्ष्य तय करने के लिए सहमति जताई है। ये देश समावेशी विकास लक्ष्य (एसडीजी) का लक्ष्य हासिल करने के लिए सहमत हैं। इन देशों में ब्राजील, चीन, भारत, नाइजीरिया, रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसे सर्वाधिक आबादी वाले देश शामिल हैं।

जावड़ेकर ने कहा कि ऐसे विश्व मंच पर अपने अनुभवों और सफलता की कहानियों को साझा करने से देशों को सहायता प्राप्त होगी। इसलिए यह यूएनसीसीडी बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि सम्मेलन के कई अच्छे परिणामों को दिल्ली घोषणा पत्र में अधिसूचित किया जाएगा। दिल्ली घोषणा पत्र भविष्य की कार्य योजना की रूपरेखा होगी।

यूएनसीसीडी के कार्यकारी सचिव इब्राहिम थियाव ने हाल के वैज्ञानिक आकलनों की चेतावनी पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मौसम से संबंधित आपदाएं जैसे सूखा, जंगल की आग, अचानक से आई बाढ़ और भूमि का क्षरण हमें चेतावनी देती हैं। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि उन्हें बदलाव के अवसरों को ध्यान में रखना चाहिए और इससे संबंधित कार्य करने चाहिए।

इस सम्मेलन में 197 देशों के लगभग 7200 प्रतिनिधि इस सम्मेलन में शामिल होंगे। प्रतिनिधियों में मंत्री, सरकार के प्रतिनिधि, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, महिलाएं और युवा शामिल हैं। सम्मेलन में लगभग 30 निर्णय लिए जाएंगे। इन निर्णयों से पूरी दुनिया में भूमि के उपयोग की नीतियों को मजबूत बनाया जाएगा और साथ ही सूखे, धूल की आंधी, रेत से होने वाले खतरों से भी निपटने में मदद मिलेगी।

यूएनसीसीडी भूमि के अच्छे रखरखाव पर एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है। यह समावेशी भूमि प्रबंधन के जरिए पर्याप्त खाद्यान, जल और ऊर्जा सुनिश्चित करने में लोगों, समुदायों और देशों की मदद करता है।

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