Wildlife & Biodiversity

वन्य जीवों की मौत के कारण तलाशेगी कमेटी

वन्य जीवों की मौत के लिए जिम्मेवार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी कमेटी, अधिकारियों पर शिकारियों से मिलीभगत का आरोप है

 
By Varsha Singh
Last Updated: Saturday 20 April 2019

राजाजी टाइगर रिजर्व, जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व समेतउत्तराखंड के जंगलों में पिछले पांच वर्षों में कितने वन्य जीवों की मौत हुई है, किन परिस्थितियों में मौत हुई है, मौत स्वाभाविक हुई या शिकार के चलते हुई। इसकी पड़ताल के लिए राज्य के वन विभाग के प्रमुख सचिव आनंद वर्धन ने एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है।

वर्धन ने बताया कि कमेटी स्वतंत्र होगी और एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। वन्य जीवों की मौत के साथ-साथ कमेटी इस बात की भी पड़ताल करेगी कि वन अधिकारियों ने इन मामलों में क्या कार्रवाई की। कहीं कोई लापरवाही तो नहीं बरती गई। मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक रंजना काला इस कमेटी की अध्यक्षता कर रही हैं। उनके साथ वन विभाग के आला अधिकारी इसमें शामिल हैं।

पिछले वर्ष कार्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व में शिकारियों के साथ अधिकारियों की मिलीभगत की बात सामने आई थी। वरिष्ठ अधिकारियों पर शिकार के सबूत नष्ट करने के आरोप लगे थे। इसके बाद मामला नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जांच बिठायी। जिस पर विभाग के आला अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले लिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा।

देहरादून की गैर-लाभकारी संस्था ऑपरेशन आई ऑफ द टाइगर इंडिया (ओईटीआई) की पहल पर कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में यह मामला सामने आया था। संस्था के प्रमुख राजीव मेहता बताते हैं कि वर्ष 2015-16 के दौरान कार्बेट टाइगर रिजर्व में करीब 25 से अधिक बाघ मारे गए थे। उस समय दिग्विजय सिंह खाती चीफ वाइल्ड लाइफ़ वार्डन थे। ओईटीआई संस्थान ने वन मंत्री हरक सिंह रावत से इसकी शिकायत की। वन मंत्री के निर्देश पर प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने मामले की जांच की। जिसमें तत्कालीन चीफ़ वाइल्ड लाइफ वार्डन दिग्विजय खाती और कार्बेट पार्क के निदेशक समीर सिन्हा वन्य जीवों के शिकार के मामलों में सबूत नष्ट करने के दोषी पाए गए। इस जांच के बावजूद दोनों अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद राजीव मेहता ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

राजीव बताते हैं कि सितंबर 2018 में नैनीताल हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई जांच के निर्देश दिये और 6 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा। इसी वर्ष दिग्विजय सिंह खाती चीफ वाइल्ड लाइफ़ वार्डन पद से रिटायर हुए। रिटायरमेंट के तुरंत बाद वे नैनीताल हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट चले गए और नवंबर 2018 में इस मामले पर स्टे लग गया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच कराने को लेकर राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा।

एक आरटीआई के मुताबिक वर्ष 2016-17 में 55 गुलदार और बाघ की खालों को पुलिस ने सीज किया। राजीव बताते हैं कि जब इस मामले का खुलासा हुआ तो उन्हें और उनकी संस्था को संरक्षित क्षेत्र में जाने से रोक दिया गया। इसके खिलाफ हमने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिस पर हाईकोर्ट ने दो महीने में राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा है।

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