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पीएम-सीएम के चुनावी क्षेत्रों के इन गांवों में क्यों नहीं हो रही शादियां

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के संसदीय और विधानसभा क्षेत्र के इन गांवों में कई सामाजिक समस्या उत्पन्न हो गई हैं। जिससे इन गांवों में लोग अपनी बेटी की शादी करने से कतराने लगे हैं

 
Last Updated: Wednesday 26 June 2019
Photo: Creative commons
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अनिल अश्विनी शर्मा-नचिकेता शर्मा

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के संसदीय और विधानसभा क्षेत्र में ऐसे गांव हैं जहां पर देखने पर पता चलता है कि यहां पांच साल तक चले स्वच्छता अभियान से कोसों दूर नजर आ रहा है। आमतोर पर पर कचरा डालने वाले गांवों में स्वास्थ्य संबंधी बीमारी की समस्या होती है लेकिन यहां तो इसके ठीक उलट ही है। क्योंकि इन गांवों में कचरे की भीषण स्थिति को देखते हुए बहुत अजीबोगरीब समस्या पैदा हो गई है। कायदे से देखा जाए तो यहां सामाजिक समस्या उठ खड़ी हुई है। जी हां इन गांव के वासियों का कहना है कि हमारे गांव में गंदगी का साम्राज्य होने के कारण आसपास के दूसरे गांव वाले हमारे गांव में अपने शादी आदि का संबंध बनाने से कतराने लगे हैं। यहां पर दोनों नेताओं के संसदीय व विधान सभा क्षेत्र से एक-एक गांव कि वस्तुस्थिति जानने के लिए दौरा किया गया।

 

 करसडा गांव, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का कूड़ा एक ऐसे गांव में डाला जाता है, जहां के ग्रामीणों का कहना है कि इस कूड़े कारण बीमारियां और हमारे खेत पॉलिथीन की पन्नियों से अटे पडे हैं,  लेकिन इसका सबसे दुखदायी पहलू यह है कि हमारे रिश्तेदारों की आवक कम हो गई है। लोगबाग अब हमारे गांव में आना पसंद नहीं करते हैं। इससे अधिकांश ग्रामीण बहुत दुखी हैं। फूलपुर निवासी रमेश कुमार की बहन की शादी इस गांव में हुई लेकिन कूड़े की दुर्गंध के कारण वे साल-दो साल में एकाध बार मन मार कर आ पाते हैं। यही नहीं इस गांव के निवासी सुरेश कुमारी ने कहा-“लोग अब इस गांव से दूरी बना रहे है, परिचित और रिश्‍तेदारों का आना बहुत कम हो गया है।”

यहां शहर का कचरा डालने से यही एक अकेली सामाजिक समस्या नहीं उभर रही है बल्कि इस गांव में कूडे कारण प्राथमिक विद्यालय में माता-पिता अपने बच्चों को भेजने से कतराते हैं। कारण जब भी बच्चा स्कूल से लौटता है तो उसे या तो खुजली हो गई होती है या लंबी-लंबी सांसे लेता नजर आता है। ऐसे ही एक पीडित छात्र के पिता रामशरण बताते हैं,-पिछले हफ्ते मेरा तीसरी कक्षा में पढने वाला लडका प्रेम प्रकाश स्कूल से लौटा तो वह अपने हाथ-पैर तेजी से खुजला रहा था, पूछने पर बोला जब से स्कूल गया हूं तब से ही यह खुजली हो रही है। अब हमने उसे भेजना बंद कर दिया  है। कारण की कूडा घर स्कूल से लगा हुआ ही है। विद्यालय में कुल लगभग 200 छात्र पढ़ते हैं।  

शहर की गंदगी को ठिकाने लगाने के लिए लगभग 10 किलामीटर दूर करसड़ा गांव में डंपिंग ग्राउंड बनाया गया है। यहां प्रतिदिन 500 से 550मैट्रिक टन कूड डाला जाता है। यह लगभग 70 एकड में फैला हुआ है। इसके कारण इसके आसपस के खेतों की जमीन खराब होने लगी हैं। क्योंकि उनके खेतों में कूडों से उडी पॉलिथीन की पन्नियां उडकर खेतों में अट जाती हैं।  इसके खिलाफ करसडा गांव के लोग पिछले तीन सालों  से ही विरोध-प्रदर्शन करते आ रहे हैं। लेकिन 2016 में यह प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब ग्रामीणों ने यहां कचरा डालने वाली कंपनी एटूजेड की एक गाड़ी को आग के हवाले भी कर दिया था। इस घटना के बाद दस से बारह दिनों तक यहां कूड़ा नहीं फेंका गया। लेकिन  इसके बाद फिर से यहां कूड़ा फेंका जाने लगा है।  

यहां कचरा डालने से अकेला करसडा गांव ही प्रभावित नहीं है बल्कि आसपास के 4 गांव भी इसकी बदबू से परेशान हैं। करसड़ा गांव के निवासी रामसूरत को इसी गंदगी में सांस लेने के कारण अस्‍थमा की बीमारी से पीडित हैं। यहां सिर्फ एक ही इंसान सांस की बीमारी से ग्रसित नहीं है बल्कि कई लोगों को ये बीमारी हो गई है और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। बच्‍चों और महिलाओं को इस गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियां और त्‍वचा रोग भी हो रहे हैं। यहां के स्‍थानीय निवासी इस गांव रहना नहीं चाहते, इसके लिए वे लगातार विरोध कर हरे हैं  लेकिन कुछ असर नहीं हो रहा है।

                                   

झारवा गांव, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

मुख्‍यमंत्री आदित्‍यनाथ योगी यहां से 5 बार सांसद रह चुके हैं। इस शहर का कूडा जिस गांव में डंप किया जा रहा है उस गांव में सबसे बडी सामाजिक समस्या उठा खडी हुई हैं। इस गांव के आसपास के ग्रामीण अपनी लडकी की शादी इस गांव में करने से कतराने लगे हैं। यह गांव है झारवा। गांव की ही मीना देवी ने कहा- “पहले रिश्‍तेदार अपने बीवी-बच्‍चों के साथ महीनों आकर हमारे गांव में रहते थे, लेकिन 2013 से  यहां जब कूड़ा फेका जाने लगा है तब से रिश्तेदारों का आना तो अब नगण्य ही हो गया है। यहां तक यहां होने वाले शादी-व्‍याह के समारोह में नजदीकी रिश्तेदार भी अब मुंह मोडने लगे है।“ झरवा गांव के एक बुजुर्ग राम सिरोही ने बताया,–“गांव में गंदगी से रहना तो दूभर हो ही रहा है, लेकिन सबसे बड़ी समस्‍या अब यहां पर ये हो रहा है कि इस गांव में कोई अपनी लड़की देने को तैयार नहीं है, इस गांव से लोग संबंध ही नहीं रखना चाहते।“अकेले शादी या रिश्तेदार ही इस गांव से दूर नहीं हो रहे हैं बल्कि कूडे के पास स्थित माध्यमिक विद्यालय में छात्रों की संख्या में पिछले 4 सालों में तेजी से कमी होते जा रही है। गांव के महेश केसरवानी ने कहा-“ इस समय यहां छात्रों की उपस्थिति केवल 30 फीसदी रह गई है। विद्यालय में पढने वाले अपने बेटे का  नाम कटवाकर पिता विनोद वर्मा ने गांव के दूसरी ओर स्थित दूसरे स्कूल में करवा दिया है। “

लगातार पिछले चार सालों से ग्रामीणों के विरोध का नेतृत्व करनेवाले ब्रिजनंदन वर्मा ने बताया-गांव में शहर का प्रतिदिन लगभग 600 मैट्रिक टन कूडा डाला जा रहा है। इसका हम सभी ग्रामीण चार सालों से विरोध करते आ रहे हैं।“ ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री के इस गांव में कचरा प्रबंधन की तैयारी नहीं हुई। गांव के सोनेलाल वर्मा इस संबंध  कहते हैं-” योगी के इस शहर में डंपिंग ग्राउंड के नाम पर जमीन का अधिग्रहण तो 2०१२  हुआ, लेकिन यहां पर रिसाइकिल प्‍लांट नहीं लग पाया है। क्‍योंकि जिस जगह पर प्‍लांट बनना है, वह जमीन से लगभग 20 फुट नीचे है। और यहां पर हमेशा जल-भराव रहता है। अब झरवा गांव में बने इस डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा बज-बजा रहा है।“

 

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