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पर्यावरण मुकदमों की डायरी: राजस्थान में 'जल माफिया' द्वारा अवैध रूप से किया जा रहा था भूजल का दोहन

पर्यावरण से संबंधित मामलों में सुनवाई के दौरान क्या कुछ हुआ, यहां पढ़ें-

By Susan Chacko, Lalit Maurya

On: Thursday 29 October 2020
 

एनजीटी ने 'जल माफिया' द्वारा अवैध रूप से भूजल निकालने के मामले में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं | मामला राजस्थान में चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा का है|  जहां 'जल माफिया' द्वारा व्यावसायिक उद्देश्य के लिए जमीन से पानी लिया जा रहा था| इसी को देखते हुए एनजीटी ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं |

गौरतलब है कि इस मामले में पहले 5 फरवरी को सुनवाई हुई थी| जिसमें एनजीटी ने आरएसपीसीबी को आदेश दिया था कि वो सुनिश्चित करे कि 'पॉल्यूटर पे प्रिंसिपल' को ठीक से लागु किया जाए, जिससे कानून का उल्लंघन करने वाले कमियों का फायदा न उठा सके|

इस आदेश का पालन करते हुए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 26 अक्टूबर को एक रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट की थी। इस रिपोर्ट में केवल इस बात का जिक्र किया गया है कि इस मामले में  परियोजना के मालिकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है| जिसपर उन्होंने आपत्ति की है और मामला विचाराधीन है|

ऐसे में प्रदूषण बोर्ड द्वारा प्रभावी कदम उठाने में की गई देरी पर एनजीटी ने नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने कार्यवाही को स्थगित कर दिया है और 22 फरवरी, 2021 से पहले आरएसपीसीबी को मामले में कार्रवाई करने और उसपर रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया है। 


पर्यावरण मंजूरी से जुड़े प्रावधानों और उनके संशोधन पर पुनःविचार करे मंत्रालय: एनजीटी

एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 28 मार्च, 2020 को जारी अधिसूचना पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। इस नई अधिसूचना में 14 सितंबर, 2006 को जारी पुराने नोटिफिकेशन के कुछ प्रावधानों में बदलाव कर दिया था| यह संशोधन पर्यावरण मंजूरी से जुड़े प्रावधानों के विषय में थे| 

गौरतलब है कि नए संशोधन के तहत खनन के लिए दिए नए पट्टों में पर्यवरण मंजूरी के लिए दो वर्ष का अतिरिक्त समय दे दिया है| इस तरह यदि पुराने पट्टे के लिए पर्यावरण मंजूरी ली गयी है तो पट्टे की तारीख से दो साल की अवधि के लिए फिर से पर्यावरण मंजूरी लेने की जरुरत नहीं है, चाहे वह पट्टा किसी और को दिया जा रहा हो| 

इसके साथ ही इस संशोधन में कुछ अन्य कार्यों जैसे सड़क, पाइपलाइन, बांधों से गाद निकालने, जलाशयों, बैराज, नदी और नहरों को उनके रखरखाव और आपदा प्रबंधन के उद्देश्य से खनन करने पर पर्यावरण मंजूरी लेना जरुरी नहीं है| एनजीटी ने इन दो मुद्दों पर गौर करने के लिए कहा है। 


पर्यावरण नियमों की अनदेखी पर एनजीटी ने स्थगित की कार्यवाही

पर्यावरण नियमों के पालन में की जा रही देरी के चलते एनजीटी ने 19 फरवरी, 2021 को की जाने वाली कार्यवाही को स्थगित कर दिया है| नियमों के पालन में यह देरी मैसर्स ललितपुर पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (एलपीजीसी) द्वारा की गई थी| जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और श्यो कुमार सिंह की पीठ ने कहा कि उम्मीद है कि एलपीजीसी पर्यावरण और उससे जुड़े नियमों के पालन में अपनी जिम्मेदारी को समझेगा और अब इस विषय पर प्रभावी कदम उठाएगा।

कोर्ट ने कहा है कि इस मामले पर पिछले दो वर्षों में कई मौकों पर विचार किया गया है| इसके बावजूद पर्यावरण से जुड़े कई अहम मुद्दों पर पर्यावरण से जुड़े नियमों को अनदेखा किया जा रहा था| इसमें फ्लाई एश का निपटान, हवा की गुणवत्ता की निरंतर निगरानी के लिए स्टेशनों का निर्माण, हानिकारक वेस्ट का निपटान, उत्सर्जन की रोकथाम, पर्याप्त मात्रा में पेड़ लगाना और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के उचित संचालन जैसे मुद्दे शामिल हैं|