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संसद में आज: पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन की तैयारी

34 नदियों में फैले प्रदूषण को दूर करने के लिए 2522.03 मिलियन लीटर प्रतिदिन सीवेज उपचार क्षमता को बढ़ाया गया है

By Madhumita Paul, Dayanidhi

On: Thursday 25 March 2021
 
As told to Parliament

उत्तर प्रदेश के भू-जल विभाग (जीडब्ल्यूडी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जीडब्ल्यूडी द्वारा मॉनसून से पहले 2020 के दौरान एकत्र किए गए जल स्तर के आंकड़ों की तुलना जब डेसडल औसत (2010-2019) से की जाती है, तो पता चलता है कि लगभग 94 फीसदी कुओं के जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई। अछनेरा, अकोला और जैतपुर कलां को छोड़कर सभी ब्लॉकों में 4 मीटर से अधिक की गिरावट देखी गई है। यह आज जल शक्ति, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने लोकसभा में बताया।

कटारिया ने सदन को यह जानकारी भी दी कि आगरा क्षेत्र में यमुना नदी के कायाकल्प के लिए, स्वच्छ गंगा (एनएमसीजी) के लिए राष्ट्रीय मिशन के तहत अतिरिक्त 178.60 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) क्षमता के ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए आगरा सीवरेज योजना शुरू की है। इसके लिए 842.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।

नदी विकास और प्रदूषण उन्मूलन परियोजनाएं

राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) ने अब तक देश में 16 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के 77 शहरों की 34 नदियों में फैले प्रदूषण को दूर करने के लिए 2522.03 मिलियन लीटर प्रतिदिन सीवेज उपचार क्षमता को बढ़ाया है, इस पर लगने वाली लागत के लिए 965.90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह जानकारी आज जल शक्ति, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने लोकसभा में दी।

कटारिया ने सदन को बताया कि राजस्थान राज्य में नमामि गंगे के तहत चंबल नदी के संरक्षण के लिए भारत सरकार और राजस्थान सरकार के बीच कॉस्ट शेयरिंग के आधार पर कोटा शहर के लिए 25.48 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न प्रदूषण उन्मूलन कार्य स्वीकृत किए गए हैं। राज्य सरकार को अब तक 68.71 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान जारी किया गया है और परियोजना पर अब तक 62.79 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।

कटारिया ने यह भी कहा कि उनके मंत्रालय को एनआरसीपी के तहत राजस्थान के पाली जिले में लूणी नदी पर रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के लिए कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।

प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता

केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा 2019 में स्पेस इनपुट्स का उपयोग करके भारत में जल उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन का अध्ययन किया गया। देश के 20 घाटियों (बेसिन) के औसत वार्षिक जल संसाधनों का आकलन 1999.20 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) के रूप में किया गया है। जनसंख्या द्वारा वार्षिक औसत जल उपलब्धता को विभाजित करके प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता का अनुमान लगाया जाता है।

वर्ष 2011 में प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक जल उपलब्धता 1545 क्यूबिक मीटर आंकी गई थी। इसके अलावा, उपरोक्त अध्ययन के आधार पर, 2021 तक औसत वार्षिक प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 1486 घन मीटर तक कम हो सकती है। यह एक औसत आंकड़ा है जो मौसम और क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। जल संसाधन के आंकड़ों को बेसिन के आधार पर बनाए रखा गया है और यह राज्यवार नहीं है। यह आज जल शक्ति, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने लोकसभा में बताया।

पुराने वाहनों पर ग्रीन टैक्स

सरकार ने पुराने, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के उपयोग करने के लिए राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारों द्वारा पुराने वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए हैं। ये सभी राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों को उनकी विवेचना के लिए भेजा गया है, इस बात की जानकारी आज सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने लोकसभा में दी।

देश में सड़कों पर चलने वाले पुराने वाहनों पर मंत्री द्वारा सदन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 3,199,180 पुराने वाहन हैं।

पानी की इलेक्ट्रोलिसिस से ऊर्जा

केंद्रीय विद्युत, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आर. के. सिंह ने आज लोकसभा में इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सरकार पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से ऊर्जा विकसित करने के बारे में विचार कर रही है।

सिंह ने सदन को बताया कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए शोध और विकास (आर एंड डी) और प्रदर्शन परियोजनाओं का समर्थन कर रही है। मंत्रालय द्वारा समर्थित परियोजनाओं के तहत, राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान, गुरुग्राम में सौर ऊर्जा द्वारा संचालित ए5 एनएम3 / एचआर (सामान्य घन मीटर प्रति घंटा) इलेक्ट्रोलाइजर स्थापित किया गया है। इंडियन ऑयल आरएंडडी सेंटर, फरीदाबाद में ग्रिड बिजली द्वारा संचालित एक 30 एनएम 3 / घंटा इलेक्ट्रोलाइजर स्थापित  किया गया है। इन परियोजनाओं से उत्पन्न हाइड्रोजन का उपयोग वाहनों में ईंधन के रूप में किया जाता है।

बाल कुपोषण का बढ़ता स्तर

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) - 4 (2015-16) के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के 38.4 फीसदी बच्चों का विकास नहीं हो पाया है अर्थात उनका कद छोटा है, 35.7 फीसदी का वजन कम है और 21 फीसदी कमज़ोर हैं। हालांकि, व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण (सीएनएनएस) (2016-18) के अनुसार, 34.7 फीसदी बच्चों का विकास नहीं हो पाया, 33.4 फीसदी कम वजन और 17 फीसदी कमजोर हैं, एनएफएचएस-4, की रिपोर्ट में सुधार देखा गया। महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने आज राज्यसभा में बताया।