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अक्टूबर 2020 तक पुनर्जीवित हो जाएंगी दिल्ली की 166 वाटर बॉडी?

एनजीटी को दी गई एक रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली को भूजल संकट से बचाने के लिए वाटर बॉडी को रिचार्ज करने का काम तेजी से चल रहा है

By Bishan Papola

On: Wednesday 05 February 2020
 
दिल्ली में 13वीं सदी की एक वाटर बॉडी। फोटो: विकास चौधरी
दिल्ली में 13वीं सदी की एक वाटर बॉडी। फोटो: विकास चौधरी दिल्ली में 13वीं सदी की एक वाटर बॉडी। फोटो: विकास चौधरी

दिल्ली जल बोर्ड के तहत आने वाले 155 वाटर बॉडी (जल स्त्रोत) अक्टूबर 2020 तक पुनर्जीवित कर दिया जाएगा। इनमें से 22 वाटर बॉडी को जून 2020 तक पुनर्जीवित कर लिया जाएगा और 24 वाटर बॉडी को 31 जुलाई और 18 वाटर बॉडी को अक्टूबर 2020 तक पुनर्जीवित किया जाएगा। जबकि सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण विभाग अलग से 95 वाटर बॉडी को पुनर्जीवित करेंगे, जिसमें 11 निकायों को सितंबर 2020 तक पुनर्जीवित कर लिया जाएगा। राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) द्बारा  दिल्ली में जल प्रबंधन की निगरानी के लिए बनाई गई समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है, लेकिन वर्षा जल संचयन प्रणाली को पूरी तरह नहीं अपनाया गया है, जो  दिल्ली के जल प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है। एनजीटी के आदेश के बाद भी अधिकांश जगहों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली को नहीं अपनाया गया है, जिसमें डीएमआरसी, पीडब्ल्यूडी, स्कूल-कॉलेज, निजी भवन मालिक, एनडीएमसी जैसे संस्थान शामिल हैं। 

डीएमआसी ने 236 स्थानों में से केवल 185 स्थानों पर ही वर्षा जल संचयन प्रणाली को स्थापित किया है। एनडीएमसी के 44 सरकारी स्कूलों में से केवल 30 स्कूलों में ही यह प्रणाली कार्यात्मक पाई गई। ईडीएमसी के अंतर्गत आने वाले 231 स्कूलों में से 217 स्कूलों में ही यह प्रणाली अस्तित्व में पाई गई है। इसके अलावा अन्य 740 अन्य स्कूल व कॉलेजों के भवनों में से केवल 699 भवनों में ही यह प्रणाली अपनाई गई है। उत्तर डीएमसी के तहत आने वाले 568 प्राथमिक स्कूलों में से 455 स्कूलों में ही यह प्रणाली अस्तित्व में पाई गई है। पीडब्ल्यूडी में 339 स्थानों में से 149 व पीडब्ल्यूडी द्बारा बनाए गए 1048 भवनों में से 756 भवनों में ही यह प्रणाली कार्यरत पाई गई है। 

वहीं,  दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड-डीयूएसआईबी में 129 में से 39,  दिल्ली जल बोर्ड के 368 स्थानों पर वर्षा जल संचयन की प्रणाली अपनाई गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि अगर,  दिल्ली को पानी के संकट से बाहर निकालना है तो वर्षा जल संचयन प्रणाली को पूरी तरह से लागू करना पड़ेगा। और प्रबंधन की उचित व्यवस्था को गंभीरता से लागू करना होगा। अपनी रिपोर्ट में समिति ने  दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए, आई एंड एफसी और एएसआई द्बारा जल निकायों के पुनरूद्धार को लेकर बनाई गई कार्ययोजना के संबंध में जानकारी दी है। जिसके तहत 150 से अधिक जल निकायों को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई गई है।

शिक्षण संस्थानों पर लगाया 5 लाख का जुर्माना

एनजीटी ने ऐसे प्रत्येक शिक्षण सस्थानो पर 5 लाख का जुर्माना लगाया है, जिन्होंने अपने यहां वर्षा जल संयचन प्रणाली को नहीं अपनाया हैं और शोधित जल मुहैया कराने में असफल रहने पर हर एसटीपी प्लांट पर 1 लाख और जल निकायों को पुनर्जीवित करने में असफल रहने पर हर माह 50 हजार रूपए भरने के लिए संबंधित एजेंसी को आदेश दिया गया है। 

अवैध बोरवेल से प्रभावित हो रहा यमुना का प्रवाह

 राजधानी  दिल्ली में चल रहे अवैध बोरवेल की वजह से यमुना नदी के प्रवाह पर बुरा असर पर पड़ रहा है। समिति द्बारा एनजीटी में 18 फरवरी 2019 को दी अपनी पहली रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया था। इसीलिए इस संबंध में उचित कदम उठाए जाने की जरूरत बताई गई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि  दिल्ली में 14,231 अवैध बोरवेल चल रहे हैं, जिसमें से अकेले पटपड़गंज औद्योगिक इलाके में 400 बोरवेल चल रहे हैं। जिसकी वजह से  दिल्ली में भूजल के स्तर पर 15 फीसदी नीचे चला गया है। समिति ने अपनी दूसरी रिपोर्ट 31 जुलाई 2019 को एनजीटी में पेश की थी, जिसमें भूजल दोहन पर चिंता व्यक्त करने हुए बताया गया था कि कई ईलाकों में पानी का स्तर 300 फीट से भी नीचे गिर गया है।