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खोज: नई टॉयलेट कोटिंग बचा सकती है 50 फीसदी से अधिक पानी

दुनिया में हर दिन 14 हजार करोड़ लीटर से अधिक पानी केवल शौचालयों में फ्लश करने के लिए बहा दिया जाता है, लेकिन इसे 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है

By Dayanidhi

On: Tuesday 19 November 2019
 
Photo: Creative commons
Photo: Creative commons Photo: Creative commons

दुनिया में हर दिन 14 हजार करोड़ लीटर से अधिक पानी केवल शौचालयों में फ्लश करने के लिए बहा दिया जाता है, लेकिन इसे 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है।अमेरिका स्थित पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने ऐसे कोटिंग विकसित की है, जो पानी की बचत कर सकता है। नेचर सस्टेनेबिलिटी नामक पत्रिका ने इस शोध को प्रकाशित किया है।

वॉर्मले अर्ली कैरियर इंजीनियरिंग के प्रोफेसर व मैकेनिकल इंजीनियरिंग और जैव-चिकित्सा के एसोसिएट प्रोफेसर टेक-सिंग वोंग ने कहा कि हमारी टीम ने एक मजबूत जैव-प्रेरित, तरल, बैक्टीरिया को हटाने वाला (रोबस्ट बायो-इंस्पायर्ड, लिक्विड, स्लज एंड बैक्टीरिया-रेपेलेंट) कोटिंग विकसित की है, जो एक शौचालय को स्वयं-साफ कर सकती है।

वोंग की प्रयोगशाला में, के जिंग वांग द्वारा विकसित की गई, तरल-सघन चिकनी सतह (लिक्विड-एंटरएन्चेड स्मूथ सर्फेस (एलईएसएस)) की कोटिंग को दो बार लगाया गया, जिसे अन्य  सिरेमिक टॉयलेट में भी लगाया जा सकता है। पहली कोटिंग, आणविक रूप से ग्राफ्टेड पॉलिमर से बनाई गई है, यह अत्यंत चिकना और तरल होता है, जिसका उपयोग इसके नींव बनाने के प्रारंभिक चरण के तौर पर किया गया है।

वांग ने कहा, जब यह सूख जाता है, पहली कोटिंग अणुओं को उभारता है जो छोटे बालों की तरह दिखते हैं, यह एक मानव बाल की तुलना में लगभग 1,000,000 गुना पतले व्यास के होते है। जब हमने उस कोटिंग को लैब में एक टॉयलेट पर रखा और उस पर सिंथेटिक फेकल पदार्थ गिराया, तो यह पूरी तरह से नीचे गिर गया और कुछ भी टॉयलेट से नहीं चिपका।

इस नए फिसलन वाली सतह के साथ, शौचालय के अंदर की गंदगी को प्रभावी ढंग से साफ कर सकता है और इसके लिए पहले से बहुत कम पानी का इस्तेमाल होता है। शोधकर्ता का मानना हैं कि कोटिंग को पारंपरिक शौचालय में लगा कर पानी के लगभग 500 फ्लश तक कम किए जा सकते है।

अन्य तरल फिसलने वाली सतहों को साफ करने मे घंटों लग सकते हैं, जबकि लिक्विड-एंटरएन्चेड स्मूथ सर्फेस (एलईएसएस) कोटिंग साफ होने में पांच मिनट से कम समय लेती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस तरह के टॉयलेट का उपयोग सूखाग्रस्त क्षेत्रों या पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

इस तकनीक का उपयोग पानी रहित शौचालयों में किया जा सकता है तथा इनका उपयोग दुनिया भर में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। वोंग ने कहा शौचालय से गंदगी का चिपके रहना न केवल उपयोगकर्ताओं को खराब लगता है, बल्कि इससे गंभीर बीमारियां भी फैल सकती है। शोधकर्ता ने प्रयोगों में यह भी देखा कि टॉयलेट की सतह पर बैक्टीरिया संक्रामक रोगों को फैलाते है, लेकिन इस नई लिक्विड-एंटरएन्चेड स्मूथ सर्फेस (एलईएसएस) कोटिंग आधारित टॉयलेट इस समस्या का समाधान के रूप में देखी जा सकती है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि यदि एक बिना पानी के शौचालय या मूत्रालय में लिक्विड-एंटरएन्चेड स्मूथ सर्फेस (एलईएसएस) कोटिंग का उपयोग किया जाता है, तो भी यह साफ और अधिक सुरक्षित होगी।