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जलापूर्ति डिजाइन बदलना होगा

आपूर्ति में समानता लाने के लिए जल प्रवाह को फिर से डिजाइन करें

On: Wednesday 31 March 2021
 
जलापूर्ति डिजाइन बदलना होगा

इर रॉब रागमा 
प्रोफेसर, हेंज यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंस, नीदरलैंडकृषि, पेयजल और प्रकृति के लिए जल की आपूर्ति मानव हस्तक्षेप और तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन पर निर्भर करती है। प्राकृतिक जल प्रणाली में जितना अधिक मनुष्य हस्तक्षेप करता है, बुनियादी कार्यों के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था करना उतना ही कठिन हो जाता है। फिर, वर्षा का पैटर्न बदलने के परिणामस्वरूप जल प्रणाली को अधिक लचीलेपन की आवश्यकता होती है। इसका असर लोगों और प्रकृति के लिए कम पानी की उपलब्धता के रूप में दिखता है। इस प्रकार उपभोग का पैटर्न सबसे पहले उन लोगों को पानी उपलब्ध कराती है, जिनकी पानी तक पहुंच हमेशा से आसान रही है, फिर कृषि प्रयोजनों के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है, इसके बाद उन लोगों के लिए जिनकी पानी तक आसान पहुंच नहीं है और जो आबादी का सबसे गरीब हिस्सा है। अंत में प्रकृति के हिस्से में पानी आता है।

लचीलापन बढ़ाने के लिए, उपभोग की सीढ़ी (पैटर्न) को बदलना होगा। कल्पना कीजिए कि प्रकृति स्वयं उपलब्ध पानी के लिए पहला प्रवेश बिंदु हो। प्रकृति स्वयं ऐसा सिस्टम बनाएगी ताकि अधिक पानी संग्रहित की जा सके। जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि करके समुद्र में पानी जाने के बजाय बड़ी मात्रा में पानी को संसाधन के रूप में ग्रहण किया जा सकता है। जलाशयों और नहरों में पानी को बांधकर उसका उपयोग सबसे पहले उन लोगों द्वारा किया जा सकता है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, जैसे जो लोग खेतों में काम करते हैं और अपने प्रत्यक्ष वातावरण में पानी पर निर्भर हैं। इस पानी को एक बार उपयोग करने के बाद धान के खेतों, मछली पालन या कृषि उपयोग के लिए साफ किया जा सकता है। जो पानी बचता है वह कृत्रिम प्रणाली में अपनाए जाने के लिए उपयुक्त है। उसे रीसाइकल करके शहरी आबादी के लिए पीने के पानी के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

प्रकृति-आधारित तरीके से जल आपूर्ति अनुक्रम को बदलने से हर किसी का फायदा होगा और ये एक अधिक लचीला प्रणाली बनाता है, जो बारिश में उच्च उतार-चढ़ाव की समस्या से निपट सकता है, बाढ़ को रोकता है और सभी उपयोगों के लिए ताजा पानी प्रदान करता है। लेकिन इसे लागू करने के लिए केवल एक बेहतर सोच ही काफी नहीं है। एक शानदार परिणाम पाने के लिए डिजाइन दृष्टिकोण सबसे अच्छा काम करता है। नए डिजाइन से बेहतरीन नतीजे और नए समाधानों की परिकल्पना की जा सकती है। यह नए विकल्पों, परीक्षण और अन्वेषण को जन्म देता है। इसे अक्सर हमारे द्वारा संचालित तकनीकी, इंजीनियरिंग प्रणाली में कम करके आंका जाता है। यह हमें वर्तमान पानी की समस्याओं को लेकर प्रतिक्रिया करने के तरीके को बदलने में मदद कर सकता है, जो अक्सर अतीत के समाधानों के कारण होता है।

अप्रत्याशित भविष्य को डिजाइन करना ही एकमात्र अवसर है, जिससे हम जल आपूर्ति अनुक्रम को बदल सकते हैं। इसका तात्पर्य यह है कि हमें पानी की पहुंच के मामले में सभी के लिए अधिक लचीला भविष्य बनाना होगा। यह अमीर और गरीब के बीच असमानता को भी कम करेगा, जहां अमीरों का अक्सर स्वच्छ पानी तक पहुंच पर एकाधिकार होता है।