गजब! झील-तालाबों को भी नहीं बख्शा, अतिक्रमण का शिकार हैं देश में 38,496 जल निकाय

आंकड़ों के अनुसार जल निकायों पर होते अवैध कब्जे के मामले में दिल्ली अव्वल है जहां करीब 24.2 फीसदी जल निकाय अतिक्रमण का शिकार हैं

By Lalit Maurya

On: Friday 04 August 2023
 
फोटो:आईस्टॉक12jav.net12jav.net

पहले लोग झीलें तालाब, टैंक, बावली, कुंड आदि बनवाते थे, जिससे आने वाली कई सदियों तक इंसानों और दूसरे जीवों की प्यास बुझती रहे, लेकिन जब इन जल निकायों पर ही लोग कब्जा करना शुरू कर दें तो देश में बढ़ता जल संकट कैसे कम होगा।

आपको जानकर हैरानी होगी की देश में 38,496 करीब 1.6 फीसदी जल निकाय अतिक्रमण का शिकार हैं। सदियों से लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले इन झीलों, तालाबों आदि पर बढ़ता अतिक्रमण आज उनके अस्तित्व के लिए ही खतरा बन चुका है।

संसद के मौजूदा सत्र में इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में जलशक्ति राज्यमंत्री विश्वेश्वर टुडू ने जानकारी दी है कि देश में 38,496 जल निकाय अवैध अतिक्रमण का शिकार हैं। इनमें से 95.4 फीसदी जल निकाय ग्रामीण क्षेत्रों में जबकि 4.5 फीसदी शहरी क्षेत्रों में हैं।

हालांकि इनकी संख्या के आधार पर देखें तो देश के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद 1.6 फीसदी जल निकायों पर अतिक्रमण किया गया है जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 2.5 फीसदी दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि उनके द्वारा साझा की गई यह जानकारी हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा भारत में मौजूद जल निकायों पर जारी पहले सेन्सस पर आधारित है।

रिपोर्ट के अनुसार देश में जल निकायों की कुल संख्या 13,38,735 है, जिनमें से 55.2 फीसदी जल निकाय जैसे तालाब, झीलें, चेक डैम आदि निजी हाथों में है। वहीं 44.8 फीसदी जल निकाय सार्वजनिक क्षेत्र में हैं, जो ग्राम पंचायत या राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

इनमें 59.5 फीसदी तालाब हैं, जबकि 15.7 फीसदी टैंक, 12.1 फीसदी जलाशय और 9.3 फीसदी चेक डैम हैं, जबकि केवल 0.9 फीसदी झीलें हैं। 16.3 फीसदी यानी करीब 3,94,500 जल निकाय ऐसे हैं, जिन्हें उपयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे में यदि उनपर पर्याप्त ध्यान न दिया गया तो वो जल्द खत्म हो सकते हैं।

राजधानी दिल्ली में 24.2 फीसदी जल निकाय हैं अतिक्रमण का शिकार

इस रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा जल निकायों पर अवैध कब्जा हुआ है। इन जल निकायों की कुल संख्या 15,301 है। वहीं यदि राज्य अथवा केंद्रशासित प्रदेश में मौजूद कुल जल निकायों के प्रतिशत के आधार पर देखें तो दिल्ली इस मामले में अव्वल है जहां करीब 24.2 फीसदी जल निकाय अतिक्रमण का शिकार हैं।

इसके बाद पंजाब का नंबर हैं जहां करीब 9.86 फीसदी जल निकायों पर अतिक्रमण हुआ है। इसके बाद तमिलनाडु 7.82 फीसदी, उत्तरप्रदेश 6.24 फीसदी, तेलंगाना 4.73 फीसदी, कर्नाटक 3.51 फीसदी, पुदुचेरी 2.90 फीसदी, और आंध्र प्रदेश में 2.05 फीसदी,  झील-तालाब इसकी चपेट में हैं।

वहीं बिहार, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, जम्मू कश्मीर, ओडिशा, गोवा, झारखंड, मणिपुर, हरियाणा, छत्तीसगढ, मिजोरम, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड, नगालैंड, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, गुजरात और असम में यह आंकड़ा दो फीसदी से कम है। वहीं यदि जल निकायों की संख्या के आधार पर देखें तो उत्तरप्रदेश इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं जहां 15 हजार से ज्यादा जल निकाय अतिक्रमण का शिकार हैं।

वहीं तमिलनाडुमें 8366, आंध्र प्रदेश में 3920, तेलंगाना में 3032, मध्य प्रदेश में 1779, पंजाब      में 1578, ओडिशा में 1048, कर्नाटक में 948, बिहार में 871, झारखंड में 560, महाराष्ट्र में 251, दिल्ली में 216, छत्तीसगढ में 111, केरल में 111, जम्मू एवं कश्मीर        में 103, अंडमान निकोबार द्वीप समूह          में 59, हरियाणा में 50, राजस्थान में 47, हिमाचल प्रदेश में 42, पुदुचेरी में 34, गुजरात में 22, असम में 13, गोवा   में 8, मिजोरम में 7, मणिपुर में 6, मेघालय में 6, उत्तराखंड में 5 और नागालैंड-त्रिपुरा में एक-एक जल निकाय बढ़ते अतिक्रमण की मार झेल रहा है।

पता चला है कि अतिक्रमण किए गए 62.8 फीसदी जल निकायों के 25 फीसदी से कम हिस्से पर अतिक्रमण हुआ है। वहीं 11.8 फीसदी जल निकाय ऐसे हैं, जिनका 75 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा अतिक्रमण का शिकार है। देश में कई झीलें अतिक्रमण का सामना कर रही हैं। ऐसे अनेक उदाहरण है जिनमें इनके बचाव के लिए कई बार कोर्ट को भी सामने आना पड़ा है।

क्या इस अतिक्रमण को दूर करने के लिए कोई कार्रवाई की गई है? इस बारे में जल शक्ति राज्य मंत्री का जबाव था कि जल निकायों पर किए इस अतिक्रमण को रोकने/ हटाने के लिए की जाने वाली कार्रवाई संबंधित राज्य सरकारों के दायरे में आती है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब हम यह जानते हैं कि देश में बढ़ते तापमान और जलवायु में आते बदलावों के साथ जल संकट गहराता जा रहा है। तो भी हम इस मुद्दे पर गंभीर क्यों नहीं हैं, क्यों इन जल स्रोतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

यह कभी आसमान से गिरती हर एक बून्द को संजोने में मदद करते थे, जिससे पूरे साल जीवों की प्यास बुझती रहे। इनपर बढ़ता अतिक्रमण कहीं न कहीं सरकारी उदासीनता का ही नतीजा है। जो अपनी पुरखों की धरोहर को भी संजोने में कामयाब नहीं हो रहा।

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