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जलशक्ति अभियान की हकीकत: मध्यप्रदेश के राजगढ़ की दारुण तस्वीर

जलशक्ति अभियान के तहत कोई फंड नहीं मिला, हमने मनरेगा के जरिये काम कराया: जिला अधिकारी

By Jitendra

On: Saturday 21 March 2020
 
महेश चंद्रवशी को इंतजार है मनरेगा फंड का, ताकि वह अपनी जमीन पर कुआं बनवा सके।
महेश चंद्रवशी को इंतजार है मनरेगा फंड का, ताकि वह अपनी जमीन पर कुआं बनवा सके। महेश चंद्रवशी को इंतजार है मनरेगा फंड का, ताकि वह अपनी जमीन पर कुआं बनवा सके।

 

जलशक्ति अभियान(जेएसए) की मदद से एक ओर जहां हमें उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में बांध बनाकर भूजल स्तर को सुधाराने की कहानी मिलती है, वहीं वहां से 400 किमी दूर मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में इस अभियान की अलग औऱ उल्टी तसवीर दिखायी देती है। इस जिले को जलशक्ति अभियान और सामुदायिक भागीदारी के लिहाज से जलसंकट ग्रस्त 250 जिलों की सूची में 205वें स्थान पर रखा गया है। इस तथ्य के बावजूद कि राजगढ़ जिले में औसतन सालाना 1100 मिमि बारिश होती है।

इस विफलता की वजह बताते हुए राजगढ़ की जिला कलेक्टर मृणाल मीना कहती हैं, चूकि हमें इस अभियान के लिए फंड ही नहीं मिला, इसलिए हम कोई काम नहीं कर पाये। हां, मनरेगा के तहत हमने जरूर कुछ काम करवाये हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक गंभीर जल संकट वाले दो प्रखंडों नरसिंहगढ़ औऱ सारंगपुर में वाटर रिचार्ज पिट का निर्माण औऱ पौधरोपण का काम कराया गया है।

मनरेगा वेबसाइट पर नरसिंहगढ़ प्रखंड के मुआलीखादेड़ पंचायत के नाम पांच कार्ययोजना दर्ज है। इनमें से एक भी मार्च, 2020 तक पूरा नहीं हो पाया है। दो नये प्रोजेक्ट हैं, दो स्वीकृत हो चुके हैं और एक पर काम चल रहा है। केंद्र सरकार ने इस साल रेत फिल्टर बनवाने के लिए 1500 रुपये( आंकड़े वेरिफाइ कर लेंगे) जारी किये हैं, इस काम के लिए 5.34 लाख की राशि आगे भी जारी होने की संभावना है।

हालांकि जिले में मनरेगा का काम देख रहे केसी दुबे का दावा है कि इस पंचायत में 15 से अधिक भूजल रिचार्ज पिट और दर्जनों कुओं का निर्माण कराया जा चुका है। मगर डाउन टू अर्थ को इस पंचायत की यात्रा के दौरान अलग ही कहानी देखने को मिली।

मुआलीखेदर गांव के प्रधान मेहरबान गुज्जर ने दावा किया कि 2020 में उनके पंचायत में एक कुआं बना है, मगर जब हमने उस कुएं को देखने की इच्छा जाहिर की तो उनकी प्रतिक्रिया बहुत उत्साहवर्धक नहीं थी।

एक छोटे किसान जय प्रकाश ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और सरकारी अधिकारियों ने उन्हें कुआं बनवाने के लिए 2.4 लाख रुपये देने का वादा किया था, मगर उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया। डाउन टू अर्थ ने नरसिंहगढ़ के कुछ और गांवों की यात्रा के दौरान ऐसे ही कई ग्रामीण मिले, जो वर्षों से पैसे मिलने का इंतजार कर रहे थे।

जलशक्ति अभियान के जिला नोडल पदाधिकारी बीके अहिरवार ने इस अभियान पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उनका कहना था कि बिना फंड जारी किये सरकार कैसे एक अलग मंत्रालय बना सकती है, हमारे पास तो सिर्फ हैंडपंप की मरम्मत के लिए ही पैसा होता है। अहिरवार ने अब तक इस अभियान को लेकर कोई बैठक नहीं की, न ही कोई जागरूकता अभियान चलाया है।

एक वरीय अधिकारी के मुताबिक अधिकारियों की भागीदारी नहीं होने की वजह से यहां यह अभियान फेल हो गया है। यह अभियान वहीं सफल हुआ है, जहां जिला कलेक्टर ने विशेष रुचि ली है।