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मौसम अपडेट: जानें, अगले दो सप्ताह कैसा रहेगा देश का मौसम

मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी कर बताया है कि साल के अंत तक मौसम कैसा रहेगा

By DTE Staff

On: Friday 18 December 2020
 
Weather update
File Photo: Soma Basu File Photo: Soma Basu

मौसम विभाग के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार अगले दो सप्‍ताह के दौरान जहां हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात होगा। वहीं देश के कई इलाकों में भारी बारिश का भी अनुमान लगाया गया है। 

मौसम विभाग ने कहा है कि 18 और 19 दिसंबर को केरल और माहे में कहीं-कहीं पर भारी बारिश व 19 और 20 दिसंबर, 2020 को लक्षद्वीप में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है। जबकि नये तेज पश्चिमी विक्षोभ से 20 और 21 दिसंबर, 2020 को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हल्की बारिश/हिमपात हो सकता है। इसके अलावा देश के दूसरे हिस्सों में बारिश होने की संभावना नहीं है। 

विभाग का कहना है कि दूसरे सप्‍ताह (24 से 30 दिसंबर, 2020) में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ न होने,ताजी पूर्वी लहर के प्रभाव के कारण पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सामान्य बारिश/ हिमपात होने की संभावना है। इसके अलावा दक्षिणी उपद्वीप में सामान्य बारिश हो सकती है। 

पहले और दूसरे सप्‍ताह (17 से 30 दिसंबर, 2020) के दौरान उत्‍तर-पश्चिम भारत के अधिकांश भागों में न्‍यूनतम तापमान दो डिग्री से छह डिग्री सेल्सियस रहेगा। यह तापमान जम्‍मू-कश्‍मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग स्‍थानों में सामान्‍य से कम (-5 डिग्री सेल्सियस या उससे कम) रहेगा, जबकि पश्चिम राजस्‍थान, पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के कुछ स्‍थानों तथा पूर्वी राजस्‍थान, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, सौराष्‍ट्र और कच्‍छ, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्‍ली के कुछ स्‍थानों पर तापमान सामान्‍य से कम (-3.1 डिग्री सेल्सियस से -5.0 डिग्री सेल्सियस) रहेगा। इसके अलावा पंजाब और उत्तराखंड के कुछ स्थानों पर तापमान सामान्य से कम (-1.6° सेल्सियससे -3.0 ° सेल्सियस) रहेगा।

अगले 2 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होगा और बाद के 3 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी। पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की कमी तथा पहले सप्ताह के पहले कुछ दिनों के दौरान पूर्वी भारत में तापमान 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। अगले 2 दिनों के दौरान पश्चिमी भारत में न्‍यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होगी।

कुल मिलाकर उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के अधिकांश स्‍थानों में सामान्य न्‍यूनतम तापमान 2 से 6 डिग्री सेल्सियस कम रहेगा और पहले सप्ताह के दौरान देश के शेष भागों में न्‍यूनतम तापमान सामान्य या सामान्य से थोड़ा अधिक रहेगा। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान के कुछ भागों में पहले सप्ताह के पहले कुछ दिनों में शीत लहर से कड़ाकेकी ठंड की स्थिति रहेगी। इसके बाद शीतलहर में गिरावट आ सकती है।

पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, उत्तरी राजस्थान और उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में अगले दो दिनों में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है, जिसमें बाद में गिरावट आ सकती है। पहले सप्‍ताह के मुकाबले दूसरे सप्ताह न्यूनतम तापमान में मामूली वृद्धि होगी। हालांकि, न्‍यूनतम तापमान उत्‍तर पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस कम रहेगा जबकि देश के शेष भागों में तापमान सामान्‍य से थोड़ा अधिक रहेगा

दक्षिण अंडमान सागर और इससे सटी दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में दूसरे सप्ताह के पहले कुछ दिनों के दौरान चक्रवात आने की बहुत कम संभावना है।

पिछले सप्ताह की महत्वपूर्ण विशेषताएं 

मौसम विभाग ने पिछले सप्ताह (10 से 16 दिसंबर, 2020) की महत्वपूर्ण विशेषताओं के बारे में भी बताया है। विभाग के मुताबिक, दो पश्चिमी विक्षोभों और उनके तेजी से चक्रवाती परिचालनों से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र मेंपिछले सप्‍ताह के पहले कुछ दिनों में दूर-दूर तकबारिश/हिमपात/गरज (थन्‍डस्‍टोर्म) के साथ तेज बारिश हुई और इससे लगते उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में कहीं-कहीं पर छिटपुट बारिश या गरज के साथ हल्‍की बारिश हुई।

इस सप्‍ताह के दौरान व्यापक तरंगों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में छिटपुट से लेकर तेज और दूर-दूर तक अच्‍छी बारिश और गरज के साथ बारिश हुई। इसके अलावा दक्षिण उपद्वीप और लक्षद्वीप द्वीप समूह में कहीं-कहीं छिटपुट तो कहीं-कहीं सामान्‍य बारिश और कहीं-कहीं गरज के साथ बारिश हुई। देश के मध्य भागों में हवा और गर्त के संयोग के कारणमध्य भारत में पिछले सप्ताह के दौरान लंबी अवधि औसत (एलपीए) की तुलना में 112 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।