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मौसम और जलवायु से जुड़ी सटीक जानकारी हर साल बचा सकती है 23,000 लोगों की जान

हाइड्रोमेट अपनी लागत से कम से कम दस गुना लाभ पैदा करती हैं। इसके बावजूद अभी भी दुनिया के 60 फीसदी देशों में मौसम और जलवायु से जुड़ी पूर्व चेतावनी देने वाली प्रभावी प्रणालियां मौजूद नहीं है

By Lalit Maurya

On: Monday 12 July 2021
 

मौसम पूर्वानुमान, जलवायु से जुड़ी सटीक जानकारी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली में सुधार करके हर वर्ष करीब 23,000 लोगों की जान बचाई जा सकती है, यही नहीं इससे करीब 12 लाख करोड़ रुपए (16,200 करोड़ डॉलर) का लाभ भी होगा। साथ ही यह सतत विकास के लक्ष्यों को भी हासिल करने में मददगार होंगी। यह जानकारी 8 जुलाई 2021 को एलायंस फॉर हाइड्रोमेट डेवलपमेंट द्वारा जारी हाइड्रोमेट गैप रिपोर्ट में सामने आई है। 

गौरतलब है कि मौसम पूर्वानुमान, जलवायु से जुड़ी सटीक जानकारी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को हाइड्रोमेट के रूप में जाना जाता है। यह प्रणालियां अपनी लागत से कम से कम दस गुना लाभ पैदा करती हैं और मौसम की चरम घटनाओं का मुकाबला करने में मददगार हो सकती हैं। इन सबके बावजूद अभी भी दुनिया के केवल 40 फीसदी देशों में मौसम और जल से जुड़े खतरों की प्रभावी पूर्व चेतावनी देने वाली प्रणाली मौजूद है। यही नहीं पिछड़े और छोटे विकासशील द्वीपीय देशों में इनके लिए जरुरी आंकड़ों में भी अभी काफी कमी है। 

डब्ल्यूएमओ महासचिव पेटेरी तालास ने बताया कि हमारी जलवायु तेजी से बदल रही है। जहां पिछला दशक अब तक का सबसे गर्म दशक था। वहीं यदि औद्योगिक काल से पहले की तुलना में वैश्विक औसत तापमान को देखें तो वो लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा बढ़ चुका है। इसके बावजूद हम जलवायु परिवर्तन के सबसे बदतर प्रभावों को रोकने के अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। हम वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और पेरिस समझौते के अनुरूप तापमान में हो रही वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर रोकने से अभी भी काफी दूर हैं।

क्यों जरुरी है सही समय पर मौसम और जलवायु से जुड़ी सही जानकारी

यह सही है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना जरुरी है। साथ ही जलवायु और मौसम से जुड़े खतरों से निपटना और उनके लिए तैयार रहना भी अत्यंत जरुरी है। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 2021 में जलवायु अनुकूलन और खतरों से निपटने के लिए वित्त में बढ़ोतरी की है। जिससे सभी लोगों, विशेष रूप से जो सबसे कमजोर तबके से सम्बन्ध रखते हैं वो इस तरह की मौसम और जलवायु सम्बन्धी घटनाओं का सामना करने के लिए तैयार हो सकें।

वहीं प्रोफेसर तालास का कहना है कि विज्ञान और आंकड़ों पर आधारित मौसम और जलवायु सेवाएं प्रभावी जलवायु अनुकूलन की नींव हैं। इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए मैड्रिड में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कोप-25) में एलायंस फॉर हाइड्रोमेट डेवलपमेंट को लॉन्च किया गया था। जिसका मकसद सभी के लिए मौसम, जलवायु, जल और सम्बंधित पर्यावरणीय सेवाओं को सुनिश्चित करना है, जिससे शाश्वत विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके।

अनुमान है कि मौसम पूर्वानुमान की मदद से उन क्षेत्रों को जो मौसम के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं, के आर्थिक उत्पादन में 716,250 करोड़ रुपए का वार्षिक लाभ हो सकता है। ग्लोबल कमीशन ऑन अडॉप्टेशन के अनुसार 2020 से 2030 के बीच जलवायु अनुकूलन पर किया गया 134.3 लाख करोड़ रुपए का निवेश 522.3 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ देगा, जिनका मुख्य आधार हाइड्रोमेट सेवाएं हैं।

इस बारे में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) के कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि “यह महत्वपूर्ण है कि हम स्थानीय और वैश्विक स्तर पर जलवायु से जुड़े खतरों से निपटने के लिए तैयार रहें और जलवायु अनुकूलन की की क्षमता को मजबूत करें। इस सफलता का एक बड़ा हिस्सा पूर्वानुमान और बचाव की क्षमता पर निर्भर करेगा। इसके लिए बेहतर मौसम पूर्वानुमान, सही समय पर चेतावनी और जलवायु संबंधी सटीक जानकारी आवश्यक है।“