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मैडेन जूलियन ऑसीलेशन क्या है? यह वर्षा को कैसे प्रभावित करता है?

आईएमडी उपग्रह और रडार जैसी रिमोट सेंसिंग तकनीकों का उपयोग करके मानसून की वास्तविक समय की निगरानी करता है।

By Dayanidhi

On: Monday 07 June 2021
 
मैडेन जूलियन ऑसीलेशन क्या है? यह वर्षा को कैसे प्रभावित करता है?
Photo:Wikimedia Commons Photo:Wikimedia Commons

मानसून की जानकारी के दूसरे भाग में हमने इसके विभिन्न पहलुओं के बारे में जाना था, अब और रोचक जानकारी के लिए निम्नलिखित को पढ़े।

मानसून के मौसम के दौरान बारिश में बदलाव कैसे होता है?
मानसून के दौरान, जगह और समय के साथ वर्षा में काफी बदलाव देखा जाता है। निम्नलिखित कारण हैं जो इसमें योगदान देते हैं। इसमें मानसून की शुरुआत, वृद्धि और वापसी शामिल है। इस तरह विभिन्न स्थानों पर मानसून की समय और अवधि तय होती है।

मानसून ट्रफ की स्थिति: यह 24 घंटों के भीतर 5 डिग्री उत्तर की ओर और 5 डिग्री दक्षिण की ओर दोलन कर सकती है। यदि यह ट्रफ रेखा सामान्य स्थिति के दक्षिण में है, तो भारत में मजबूत मानसून की स्थिति देखी जाती है।
यदि यह ट्रफ सामान्य स्थिति के उत्तर में है या हिमालय की तलहटी तक जाती है या बिल्कुल नहीं दिखती है, तो मानसून में कमी देखी जाती है।

संयुक्त प्रणाली के निर्माण, गति और दिनों की संख्या: कम आवृत्ति के दोलन भारत के विभिन्न हिस्सों में वर्षा वितरण को काफी हद तक बदल देते हैं। 40 दिनो के दौरान भूमध्य रेखा से 30 डिग्री उत्तर, अधिकतम बादलों का उत्तर की ओर प्रसार होता है। पश्चिम की ओर 14 से 15 दिनों तक बादलों का साप्ताह में दो बार प्रसार होता है।

मैडेन जूलियन ऑसीलेशन क्या है? यह वर्षा को कैसे प्रभावित करता है?
मैडेन जूलियन ऑसीलेशन (एमजेओ) उष्णकटिबंधीय में सबसे महत्वपूर्ण वातावरण-महासागर से जुड़ी हुई घटनाओं में से एक है, जिसका भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून पर गहरा प्रभाव पड़ता है। एमजेओ उष्णकटिबंधीय मौसम से जुड़ी जलवायु में होने वाले बदलाव का एक तरीका है, जिसकी अवधि आमतौर पर 30 से 60 दिनों की होती है, जिसे मैडेन और जूलियन द्वारा 1971 में खोजा था तथा इस पर एक पेपर भी प्रकाशित किया था। इसकी निम्नलिखित विशेषताएं हैं-

  • एमजेओ एक विराट मौसम की घटना है जिसमें वायुमंडलीय परिसंचरण के साथ गहरा संवहन शामिल है, जो धीरे-धीरे भारतीय और प्रशांत महासागरों पर पूर्व की ओर बढ़ती है।
  • एमजेओ नियम के विरुद्ध होने वाली वर्षा का एक भूमध्यरेखीय पैटर्न है जो कि ग्रहों के पैमाने पर आधारित है।
  • प्रत्येक चक्र लगभग 30-60 दिनों तक रहता है। इसे 30-60 दिन के दोलन, 30-60 दिन की लहर या अंतर-मौसमी दोलन (आईएसओ) के रूप में भी जाना जाता है।
  • एमजेओ में हवा, समुद्र की सतह के तापमान (एसएसटी), बादल और वर्षा में बदलाव शामिल हैं।

संवहनी (कन्वेक्टिव) गतिविधि के स्थान के आधार पर एमजेओ की अवधि को 1-8 चरणों में विभाजित किया जाता है, प्रत्येक चरण लगभग 7 से 8 दिनों तक रहता है। चूंकि एमजेओ उष्णकटिबंधीय मौसम के परिवर्तनशीलता का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है, जो एशियाई क्षेत्रों में मानसून की गतिविधि पर संभावित महत्वपूर्ण प्रभावों के साथ विस्तारित सीमा 7 दिनों से 1 महीने से अधिक होता है, पर एमजेओ सिग्नल कैप्चर करने में सांख्यिकीय या संख्यात्मक मॉडल की क्षमता मानसून के सक्रिय रहने या रूकने के चक्र को पकड़ने में बहुत महत्वपूर्ण है।

मानसून साल-दर-साल कैसे बदलता है? क्या इसकी कोई निश्चित अवधि होती है?
कई सालों से मानसूनी वर्षा में साल-दर-साल बदलाव आ रहा है, इसे मानसून की वर्षा में बदलाव के रूप में जाना जाता है। मानसून का हर चक्र बड़े पैमाने पर अल नीनो दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) जैसी वैश्विक महासागरीय वायुमंडलीय घटनाओं द्वारा नियंत्रित होती है।

दक्षिण पश्चिम मानसून के वार्षिक परिवर्तन को नियंत्रित करने वाले मुख्य कारक क्या हैं?
अंतर-वार्षिक भिन्नताएं मानसून के वार्षिक चक्र पर आकस्मिक रूप से नमी वाले या सूखे वर्षों का उत्पादन करने वाली भिन्नताएं हैं। दक्षिण पश्चिम मानसून की वार्षिक भिन्नता को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कारक अल नीनो दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) और हिंद महासागर द्विध्रुवीय (आईओडी) हैं। अन्य योगदान कारक उत्तरी अटलांटिक ऑसीलेशन (एनएओ) और प्रशांत दशकीय दोलन (पीडीओ) हैं।

मौसम विभाग मानसून की निगरानी कैसे करता है?
नीचे दी गई विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके आईएमडी द्वारा मानसून की निगरानी की जा रही है।

  • सतह और ऊपरी वायु मौसम संबंधी अवलोकनों की निरंतर निगरानी
  • उपग्रह और रडार जैसी रिमोट सेंसिंग तकनीकों का उपयोग करके मानसून की वास्तविक समय की निगरानी।
  • विभिन्न मौसम संबंधी चार्टों का विश्लेषण।
  • विभिन्न स्थानीय-अस्थायी पैमानों पर विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान मॉडल से मार्गदर्शन।

मानसून लंबे समय का पूर्वानुमान क्या है?
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की परिभाषा के अनुसार, लंबे समय के पूर्वानुमान को 30 दिनों से लेकर एक मौसम तक के औसत मौसम मापदंडों के विवरण के रूप में परिभाषित किया गया है। मासिक और मौसमी पूर्वानुमान लंबे समय के पूर्वानुमान के अंतर्गत आता है।