Climate Change

क्या भारी बारिश से कांप रही है भोपाल की धरती?

भोपाल में सामान्य से 73 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है, जिससे तालाब व बांध भर चुके हैं, जिसे धरती में कंपन की वजह माना जा रहा है 

 
By Manish Chandra Mishra
Last Updated: Wednesday 11 September 2019
Photo: GettyImages
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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित कोलार रोड के सर्व धर्म सी सेक्टर, विनीत कुंज, बीमाकुंज, राजहर्ष, आशीर्वाद कॉलोनी, बंजारी, गुड शेफर्ड कॉलोनी में बुधवार (11 सितंबर) को लोगों ने महसूस किया कि धरती हिल रही है। किसी आशंका के डर से लोग बाहर की ओर भागे। हालांकि बिना किसी नुकसान के कुछ देर बाद सामान्य हो गया।  इससे पहले भोपाल में कलियासोत बांध के किनारे बसे कोलार इलाके में भी इस तरह के झटके महसूस किए गए थे। अगस्त में शहर के कान्हा कूंज कॉलोनी के नागरिकों को दिन में धरती कांपने का अनुभव हुआ।

कान्हा कुंज कॉलोनी के भूपेश लोखंडे बताते हैं कि उन्हें ऐसा कंपन 27 अगस्त को पहली बार महसूस हुआ था। पहले एक तेज आवाज आई और फिर लगा कि धरती झटके के साथ हिल गई हो। शहर के कोलार क्षेत्र स्थित आशीर्वाद कॉलोनी फाइन एनक्लेव अपार्टमेंट में देर रात तेज धमाके के साथ धरती में झटके महसूस किए गए। इस इलाके में रहने वाले डॉ धीरज शुक्ला बताते हैं कि लोग 15 दिनों से झटके की बात कर रहे थे पर उन्हें एक दिन रात को 12 बजे के करीब झटका महसूस हुआ। पहले एक तेज आवाज आई, ऐसा लग मानो कहीं बम फटा हो। कुछ देर बाद झटका महसूस हुआ। धीरज बताते हैं कि जो लोग खड़े थे उनको अधिक कंपन महसूस हुआ। उन्होंने पुलिस को भी यह जानकारी दी। साथ ही, अपने क्लिनिक में कर्मचारियों से पूछा तो उन्होंने भी बिल्डिंग कांपने की बात कही। यह झटका आने के बाद लोग डर गए और सड़कों पर जमा हो गए।

ऐसा क्यों हो रहा है, इस बारे में डाउन टू अर्थ ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के भोपाल शाखा के डिप्टी डायरेक्टर जनरल हेमराज सूर्यवंशी से बात की। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने इस बात की पड़ताल की। उन्होंने इलाके के लोगों से बात की, जिसमें कुछ लोगों को इस कंपन के बारे में पता नहीं चल पाया जबकि कुछ लोगों ने इसे महसूस किया है। क्या यह भूकंप था? के जवाब में उन्होंने कहा कि उस इलाके में कोई भी इस तरह के साक्ष्य नहीं मिले जिससे भूकंप की आशंका जताई जा सके। अगर ये झटके उतने प्रभावी होते तो जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के सिस्मोलॉजिकल यूनिट (नागपुर और जबलपुर) में भूकंपीय गतिविधि में दर्ज हो जाते। भोपाल के अरेरा हिल स्थित मौसम केंद्र ऑब्जरवेटरी के सिस्मोग्राफ में भी कोई गतिविधि रिकार्ड नहीं की गई। ऐसी कोई गतिविधि मौसम विज्ञान विभाग की भोपाल के नजदीक गुना और जबलपुर स्थित सिस्मोग्राफिक ऑब्जरवेटरी में कोई भूगर्भीय गतिविधि दर्ज नहीं हुई।

प्रशासन सचेत

भोपाल के कलेक्टर तरुण पिथोड़े के मुताबिक वह जमीन के भीतर हो रहे कंपन की घटना पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यह घटना भूकंप नहीं है बल्कि धरती के भीतर स्थानीय कारणों से हो रही है। भू वैज्ञानिकों की टीम ने इलाके की जांच की है और वे इस बात की पुष्टि भी करते हैं। वैज्ञानिकों ने दो बार इलाके की गहन जांच की। जिला प्रशासन ने इलाके के लोगों को इस बारे में चेताया भी है और उन्हें चौकन्ना रहने को सलाह दी है।

क्या अधिक बारिश है वजह?

पिछले 24 घंटों में जिले में 96.47 मिली मीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। पिछले एक दिन में सर्वाधिक 140.4 मिली मीटर वर्षा बैरागढ़ में जबकि बैरसिया में 97 एवं कोलार में 52 मिली मीटर वर्षा रिकार्ड हुई है। पिछले वर्ष अब तक 639.3 मिली मीटर वर्षा की रिकार्ड हुई थी। अब तक का कुल आंकड़ा देखें तो बैरागढ़ तहसील में 1482.65, बैरसिया में 741.7 और कोलार में 1 जुलाई से अब तक 900 मिली मीटर से अधिक वर्षा दर्ज हुई है। भोपाल में अब तक 1512.9 मिमी बारिश हुई है जो सामान्य से 73 प्रतिशत अधिक है। 1 जून से 10 सितंबर के बीच सामान्य तौर पर 872.4 मिमी बारिश होती है।

इस वजह से शहर के सारे तालाब और बांध लबालब भरे हैं। बड़ा तालाब के ऊपर बने भदभदा बांध के गेट इस सीजन में लगभग एक दर्जन बार खोल गए थे, जिसके बाद यह पानी कलियासोत डैम में जमा हुआ। जिन इलाकों में कंपन महसूस हो रहा है वे बांध और तालाब के बीच में है। कान्हा कुंज कॉलोनी से ठीक उत्तर दिशा में 2 किलोमीटर दूर कलियासोत डैम और ठीक पश्चिम दिशा में 3 किलोमीटर दूर केरवा डैम हैं। कलियासोत नदी यहां से एक किलोमीटर और केरवा नदी 2.5 किलोमीटर है। दोनों ओर बीच में पहाड़ है। डॉ. सूर्यवंशी बताते हैं कि एक संभावना ये हो सकती है कि अधिक बारिश की वजह से धरती में पानी जा रहा हो और वहां पत्थरों के खिसकने से कंपन हो रहा हो। जमीन की ऊपरी सतह भी पानी सोखने के कारण भारी हो गई है। पानी के भारी दबाव और नीचे गैप होने के कारण जमीन के नीचे की कोई रॉक फ्रैक्चर या क्रेक हुई है, इस कारण तेज आवाज हो सकती है।

बांध और कंपन का है पुराना नाता

कलियासोत और केरवा बांध के बीच बसे इलाकों में कंपन के बाद इस बात पर भी बहस हो रही है कि क्या बांध की वजह से धरती के भीतर कंपन हो रहा है। यह चर्चा इसलिए भी गर्म है कि मध्यप्रदेश में ही सरदार सरोवर बांध के आसपास भूकंप जैसा कंपन पिछले महीनों में कई बार महसूस किया गया है और नागपुर से जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम पिछले 4 दिनों से इस बात की पड़ताल कर रही है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से रिटायर्ड वैज्ञानिक मनोरंजन घोष बताते हैं कि बांध के आसपास के इलाकों में कंपन महसूस हो सकता है। हालांकि उन्होंने भोपाल में हो रहे कंपन के पीछे की वजह पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि इस मामले में बांध वजह हो भी सकते हैं और नहीं भी। इसकी जांच होनी चाहिए। नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च संस्थान के डॉ. हर्ष के गुप्ता ने एक रिसर्चमें पाया कि दुनिया में कम से कम 100 ऐसी घटनाएं हुई है जिसमें भूकंप के पीछे मानव निर्मित बांध को माना गया है। डॉ. वीपी जौहरी ने वर्ल्ड कमिशन ऑन डैम्स के लिए एक रिपोर्ट तैयार की जिसमें उन्होंने पाया कि बांध की वजह से धरती में दरार पैदा होती है जिससे अधिक मात्रा में पानी भीतर जाता है। इस तरह घर्षण की वजह से कंपन होता है।

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