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नए युग में धरती: हिंद महासागर का समुद्री घोंघा हो सकता है पहला शिकार

एंथ्रोपोसीन यानी मानव युग में कई प्रजातियां विलुप्त होती जा रही है, जिसके लिए कहीं न कहीं इंसान ही जिम्मेवार है

By DTE Staff

On: Wednesday 14 October 2020
 

डाउन टू अर्थ, हिंदी मासिक पत्रिका के चार साल पूरे होने पर एक विशेषांक प्रकाशित किया गया है, जिसमें मौजूदा युग जिसे एंथ्रोपोसीन यानी मानव युग कहा जा रहा है पर विस्तृत जानकारियां दी गई है। इस विशेष लेख के कुछ भाग वेबसाइट पर प्रकाशित किए जा रहे हैं। पहली कड़ी में आपने पढ़ा- नए युग में धरती : कहानी हमारे अत्याचारों की । दूसरी कड़ी में आपने पढ़ा- नए युग में धरती: वर्तमान और भूतकाल  तीसरी कड़ी में आपने पढ़ा - नए युग में धरती: नष्ट हो चुका है प्रकृति का मूल चरित्र । चौथी कड़ी में आपने पढ़ा- छठे महाविनाश की लिखी जा रही है पटकथा । अगली कड़ी में आपने पढ़ा, कुछ दशकों में खत्म हो जाएंगे अफ्रीकी हाथी । अगली कड़ी में था, सॉफ्ट शैल कछुआ प्रजाति की अंतिम मादा खत्म । पढ़ें, एक और विलुप्त होने वाली प्रजाति के बारे में - 

यह पपड़ीदार घोंघा हिंद महासागर की तलहटी पर मेडागास्कर के पास तीन जगह पाया जाता है। आईयूसीएन की अपडेटेड रेड लिस्ट में इसे शामिल किया गया है। हिंद महासागर में तीन जगह मिलने वाली घोंघे की यह दुर्लभ प्रजाति पहली समुद्री प्रजाति है जिसे आधिकारिक रूप से डीप सी माइनिंग (समुद्री खनन) के कारण खतरे में घोषित किया गया है। यह प्रजाति हिंद महासागर में स्थित मेडागास्कर के पूर्व में तीन हाइड्रोथर्मल वेंट्स (जलतापीय छिद्र) में पाई जाती है। 18 जुलाई 2019 को आईयूसीएन के विलुप्तप्राय प्रजातियों की अपडेटेड रेड लिस्ट में इस प्रजाति को शामिल किया गया था। हाइड्रोथर्मल वेंट्स समुद्रतल पर वे छिद्र होते हैं जिससे गर्म पानी निकलता है। ये गर्म पानी समुद्र के ठंडे पानी से मिलता है, नतीजतन समुद्र के तल पर कॉपर और मैगनीज जैसे खनिज जम जाते हैं।

अतीत में ऐसे खनिज को समुद्र से निकालना मुश्किल और खर्चीला काम रहा है। लेकिन अब तकनीकी मदद से यह आसान हो गया है। नेचर जर्नल के मुताबिक, जिन स्थानों पर घोंघा पाया जाता है, वहां भविष्य में मूल्यवान खनिजों को निकाला जा सकता है। नेचर की रिपोर्ट बताती है कि रिसर्चरों ने घोंघे को रेड लिस्ट में इस आधार पर शामिल किया है कि यह समुद्र तल पर केवल तीन स्थानों पर पाया जाता है और इस पर डीप सी माइनिंग का खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि डीप सी माइनिंग का केवल एक प्रयास इन घोंघों को विलुप्त कर सकता है क्योंकि इससे समुद्र के छिद्रों को नुकसान पहुंच सकता है।

इस वक्त समुद्र में खनन की गतिविधियों पर दुनियाभर में रोक है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी अंतरराष्ट्रीय सीबेड अथॉरिटी वर्तमान में इस संबंध में दिशानिर्देश बना रही है। ये दिशानिर्देश इस साल बनकर तैयार हो सकते हैं। विशेषज्ञ उम्मीद जताते हैं कि रेड लिस्ट में शामिल हुआ घोंघा शायद खनन कंपनियों को हतोत्साहित कर दे। कम से कम 14 अन्य प्रजातियां भी हाइड्रोथर्मल वेंट्स के पारिस्थितिक तंत्र में पाई जाती हैं। संभव है कि अगली रेड लिस्ट में ये प्रजातियां भी शामिल हो जाएं।