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माइक्रोप्लास्टिक से बदल रहा है समुद्र में रह रहे केकड़ों का व्यवहार: रिसर्च

शोध के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक जीवों के सोचने और समझने की क्षमता पर असर डाल रहा है| जिससे जीवों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है

By Lalit Maurya

On: Wednesday 29 April 2020
 
Hermit Crab
Hermit Crab Hermit Crab

कहते हैं, पूरी दुनिया में कहीं भी चले जाइए वहां प्लास्टिक आपको जरूर मिल जाएगा| ऐसे में समुद्रों का प्रदूषित होना लाजिमी ही है। दुनिया भर में बनने वाला करीब 10 फीसदी प्लास्टिक अंत में समुद्रों में मिल जाता है। यह न केवल समुद्रों को प्रदूषित कर रहा है साथ ही वहां बसने वाले जीवों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। चूंकि तटों पर प्लास्टिक कचरा ज्यादा मात्रा में जमा होता है, इसलिए समुद्र तट पर रहने वाले जीवों पर भी इसका व्यापक असर पड़ रहा है|

हाल ही में इस पर कई शोध भी प्रकाशित हुए हैं। जिनके अनुसार प्लास्टिक जीवों के विकास और उनके प्रजनन करने की क्षमता पर असर डाल रहा है। इनमें से ज्यादातर शोधों में समुद्री जीवों के शरीर पर पड़ रहे असर का अध्ययन किया गया है। पर ऐसे बहुत ही कम अध्ययन हैं, जिनमें उनके व्यवहार पर पड़ रहे असर का अध्ययन किया गया हो। इससे जुड़ा एक अध्ययन क्वीन्स यूनिवर्सिटी, बेलफास्ट और लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी द्वारा किया गया है। यह शोध 29 अप्रैल को जर्नल बायोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित हुआ है, जिसमें हर्मिट केकड़ों पर प्लास्टिक के पड़ रहे असर का अध्ययन किया गया है। गौरतलब है कि यह केकड़े समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का एक अहम हिस्सा होते हैं|

माइक्रोप्लास्टिक्स के चलते जीवों के व्यवहार में आ रहा है बदलाव

यह केकड़े स्वयं के लिए शैल विकसित नहीं करते, बल्कि अपने शरीर को बचाने के लिए घोंघे के शैल का इस्तेमाल करते हैं| एक हर्मिट केकड़े को बढ़ने में सालों लग जाते हैं| ऐसे में जैसे-जैसे यह बढ़ता जाता है, उसे अपने लिए नए बड़े शैल कि जरुरत पड़ती रहती है| यह शैल इन केकड़ों को बढ़ने, प्रजनन करने और सुरक्षा देने में मदद करते हैं| पर इस नए अध्ययन से पता चला है कि जैसे ही यह केकड़े माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में आते हैं| वैसे-वैसे उनके शैलों को पहचानने और उनमें घुसने की क्षमता कमजोर पड़ती जाती है|

इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता गैरेथ अर्नोट ने बताया कि "हमारे शोध से पता चला है कि माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में आने से जीवों के व्यवहार में बदलाव आ जाता है| विशेष रूप से हर्मिट केकड़ों में, इसके कारण खोल को पहचानने की उसकी क्षमता पर असर पड़ता है, क्योंकि यह खोल हर्मिट केकड़े के लिए बड़ा महत्वपूर्ण होता है| इसलिए इसके कारण केकड़े पर व्यापक और दीर्घकालीन असर पड़ता है” उनके अनुसार “इस शोध से यह पहली बार पता चला है कि किस तरह माइक्रोप्लास्टिक के कारण केकड़ों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है|

यह केकड़े इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं| जो मरे हुए जीवों के अवशेषों और बैक्टीरिया को खाकर वातावरण और समुद्र को साफ़ कर देते हैं| साथ ही यह केकड़े कई प्रमुख जीवों को भोजन प्रदान करते हैं जिनमें कॉड, लिंग और वोल्फ फिश प्रमुख हैं| जोकि व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण होते हैं| “स्पष्ट रूप से माइक्रोप्लास्टिक हमारे अनुमान से कहीं ज्यादा जैव विवधता को नुकसान पहुंचा रहा हैं| इससे पहले की बहुत देर हो जाये, माइक्रोप्लास्टिक हो रहे प्रदूषण पर रोक लगाना जरुरी है|