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दुनिया भर में विलुप्त हो रही नई प्रजातियों को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी : विशेषज्ञ

आने वाले दशकों में आगे की प्रजातियां विलुप्त हो सकती हैं। इसलिए, विलुप्त होने के खतरे को कम करना बहुत जरूरी है

By Dayanidhi

On: Tuesday 16 June 2020
 
Photo: Needpix
Photo: Needpix Photo: Needpix

जैव विविधता को लगातार नुकसान हो रहा है, इसको बचाने के लिए अब तक हुए वैश्विक समझौते भी अधिक सफल नहीं रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि नुकसान पर रोक लगाने के लिए विज्ञान आधारित कार्रवाई होनी चाहिए। जैव विविधता को बचाने के लिए जलवायु परिवर्तन और तापमान पर नियंत्रण भी जरूरी है।

प्रस्तावों में संरक्षण विशेषज्ञ प्राकृतिक दरों से प्रजातियों के विलुप्त होने को कम करने के लिए एक दीर्घकालिक लक्ष्य का सुझाव दिया गया है, जिसमें एक वर्ष में कम से कम 20 विलुप्त होने वाली प्रजातियों को बचाने का उद्देश्य है। यह पेपर साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

संरक्षण सभी प्रमुख प्रजातियों पर लागू होगा जो कि प्रमुख वर्गीकरण समूहों (कवक, पौधे, अकशेरुकी और कशेरुक) और विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र जिसमें ताजे पानी, समुद्री और स्थलीय शामिल हैं।

यूसीएल सेंटर फॉर बायोडायवर्सिटी एंड एनवायरनमेंट रिसर्च के सह-अध्ययनकर्ता प्रोफेसर डेम जार्जिना मेस  ने कहा जैव विविधता के नुकसान को रिकॉर्ड करने के कई तरीके हैं लेकिन विलुप्त होना अलग है। एक बार एक प्रजाति का नुकसान होता है, तो यह हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। 

जैव विविधता को बचाने के लिए दुनिया भर में योजनाएं बनाना आदि अंतर्राष्ट्रीय संधि में शामिल है। इस संधि को कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी (सीबीडी) कहते हैं। इसके तहत 2020 के बाद जैव विविधता को बचाने के लिए इसके द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीति को एक प्रमुख लक्ष्य के रूप में प्रस्तावित किया गया है।

2010 में, सीबीडी ने प्रकृति के लिए एक रणनीतिक योजना बनाई थी, जिसमें वर्ष 2020 तक 20 समयबद्ध, मापने योग्य लक्ष्य रखे गए थे, जिसे एची जैव विविधता लक्ष्य कहते है। इनमें से, केवल 4 में अच्छी प्रगति देखी गई है, 4 के बारे में स्पष्ट नहीं है जबकि 12, प्रकृति से संबंधित प्रवृत्तियां, काफी खराब हो गई हैं।

सीबीडी की अगली बैठक में नए लक्ष्यों और लक्ष्यों पर सहमति को 2021 तक टाल दिया गया है। इन लक्ष्यों में जैव विविधता के लिए आवश्यक परिणामों पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों ने कहा प्रगति सुनिश्चित करने के लिए हमें एक मजबूत जवाबदेही तंत्र बनाना होगा। 

एक प्रजाति के कभी पूरा होने वाले नुकसान का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक रूप से रक्षात्मक उपाय किए जाने की जरुरत है।

प्रोफेसर रिचर्ड ग्रेगोरी के अनुसार हमें प्रकृति को बचाने के लिए 'नॉर्थ स्टार' अर्थात आशा की किरण की आवश्यकता है। ताकि हम ऊपर और नीचे से जैव विविधता के नुकसान को कम कर सके, और हमारे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा और पुनर्स्थापना करके प्रजातियों की आबादी को पुनर्प्राप्त कर पाएं।

प्रोफेसर मार्क रौंसेवेल प्रमुख अध्ययनकर्ता ने कहा: आने वाले दशकों में ग्रह पर पड़ने वाले मानव दबाव के कारण आगे की प्रजातियां विलुप्त हो सकती हैं। इसलिए, विलुप्त होने के खतरे को कम करना प्रमुख लक्ष्य है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण नीति के आगे विकास में मदद की जरूरत है, पृथ्वी पर जीवन की हानि को कम करने में सरकारों का समर्थन सबसे बड़े साधन के रूप में है।

डॉ. माइक हरफुट ने बताया कि अगले दशक में जैव विविधता के नुकसान को कम करने और लोगों और प्रकृति के बीच बेहतर संतुलन खोजने के लिए समन्वय महत्वपूर्ण है। एक नई प्रजाति के विलुप्त होने से पहले उसको बचाने का प्रयास किया जा सकता है। दुनिया में प्रकृति संकट से निपटने के लिए सकारात्मक परिणामों को प्राप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय नीति के लिए प्रयास किया जाना चाहिए।