आर्किड की नई और दुर्लभ प्रजातियों की हुई खोज

शोधकर्ताओं ने बताया कि तीन वर्षों की निगरानी में, एल. माइक्रोप्रोसार्टिमा के केवल 40 पौधे पाए गए जिससे पता चलता है कि यह एक दुर्लभ प्रजाति है।

By Dayanidhi

On: Friday 27 August 2021
 
आर्किड की नई और दुर्लभ प्रजातियों की हुई खोज
 फोटो : जर्नल फाइटो कीज, लेपेंथेस माइक्रोप्रोसार्टिमा फोटो : जर्नल फाइटो कीज, लेपेंथेस माइक्रोप्रोसार्टिमा

इक्वाडोर में काफी जैव विविधता पाई जाती है जो प्रजातियों और पारिस्थितिक तंत्रों के एक अनूठे समूह को आश्रय देती है। उनमें से कई स्थानीय हैं जो अब खतरे में हैं। अधिक जैव विविधता होने के चलते अधिकांश अध्ययन अभी भी प्रजातियों की समृद्धि को रिकॉर्ड करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि ये प्रजातियां वास्तव में परस्पर कैसे प्रतिक्रिया करती हैं। यही कारण है कि 2017 में स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट फॉर फॉरेस्ट, स्नो एंड लैंडस्केप रिसर्च के डॉ कैथरीन एच. ग्राहम ने यूरोपीय अनुसंधान परिषद और स्थानीय एनजीओ एस वाई कंजर्वेशन के समर्थन से, इक्वाडोर के उत्तर-पश्चिमी एंडीज में अध्ययन करने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की। इसमें ऊंचाई वाली भूमि, ढाल के साथ पेड़-पौधे, चिड़ियों के परस्पर प्रतिक्रिया के बारे में पता लगाया गया है।

इसके लिए, शोधकर्ताओं ने अच्छी तरह से संरक्षित जंगल के क्षेत्रों में और अलग-अलग ऊंचाई पर, कोलाहल वाले विभिन्न स्तरों के साथ 18 हिस्सों की स्थापना की। उन फूलों की गिनती करने के लिए मासिक दौरा किया जो चिड़ियों को आकर्षित करते हैं और फूलों और पौधों में टाइम-लैप्स कैमरे लगाए गए।

कार्य के दौरान कई नई प्रजातियों की खोज की गई, इस दौरान सर्वेक्षण और कैमरों द्वारा लगभग 400 पौधों की प्रजातियों की पहचान की गई। उनमें से एक नई आर्किड प्रजाति है जिसे लेपेंथेस माइक्रोप्रोसार्टिमा कहा जाता है, उसकी पहचान की गई है।

उत्तरी इक्वाडोर में पीचिंचा ज्वालामुखी के पश्चिमी ढलानों पर पाया जाने वाला, एल. माइक्रोप्रोसार्टिमा यानाकोचा और वर्देकोचा रिजर्व के पास है। यह सदाबहार पर्वतीय जंगल समुद्र तल से 3200 से 3800 मीटर ऊपर है। उल्लेखनीय रूप से, यह प्रजाति जंगल की गहरी छाया में भी पनप सकती है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि तीन वर्षों की निगरानी में, एल. माइक्रोप्रोसार्टिमा के केवल 40 पौधे पाए गए, जिससे पता चलता है कि यह एक दुर्लभ प्रजाति है। क्योंकि यह केवल एक छोटे से क्षेत्र में पाया जाता है, शोधकर्ताओं ने प्रारंभिक रूप से आईयूसीएन मानदंडों के अनुसार इसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में मूल्यांकन किया।

उसी हमिंगबर्ड निगरानी परियोजना के अंतर्गत, पूर्वी पीचिंचा में एक और नया आर्किड - लेपेंथेस कैरानक्वी खोजा गया था। लगभग उसी समय, इक्वाडोर के पोंटिफिकल कैथोलिक विश्वविद्यालय के एक अलग शोध समूह ने इम्बाबुरा में इसकी एक ही प्रजाति का पता लगा पाई। जबकि इम्बाबुरा में यह सड़क के किनारे के तटबंधों पर छोटे समूहों के साथ, पैरामो में बढ़ता हुआ पाया गया।

पीचिंचा में यह अन्य ऑर्किड प्रजातियों में, पेड़ की निचली शाखाओं के ऊपर सदाबहार पर्वतीय जंगल में विकसित हुआ। इसका नाम, लेपेंथेस कैरनक्वी, कारान्क्वी संस्कृति का सम्मान करता है जिसने ऐतिहासिक रूप से उन क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया जहां यह पौधा उगता है। यह शोध जर्नल फाइटो कीज में प्रकाशित हुआ है।

लेकिन इक्वाडोर की जैव विविधता के चमत्कार यहीं नहीं रुकते है, इक्वाडोर के राष्ट्रीय जैव विविधता संस्थान की एक शोध परियोजना को एल ओरो के दक्षिण-पश्चिम में 3 सेमी जितनी छोटी एक और नई प्रजाति मिली है। लेपनथस ओरो लोजेन्सिस वास्तव में एल ओरो और लोजा प्रांतों के बीच की सीमा पर खोजा गया था, इसलिए इसका नाम इस तरह रखा गया। यह केवल एक इलाके से पाया गया था, जहां इसकी आबादी को पशुपालन, आग, विदेशी प्रजातियों के वृक्षारोपण और जलाऊ लकड़ी के रूप में झाड़ियों के संग्रह से खतरा है। यही कारण है कि शोधकर्ताओं का मानना है कि इसे आईयूसीएन मानदंड के अनुसार गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।