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50 फीसदी तक कम किया जा सकता है प्रजातियों के विलुप्ति का खतरा: शोध

पहली बार सामने आए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि अगर भूमि का संरक्षण सही तरीके से किया जाए तो प्रजातियों के विलुप्ति की दर आधी की जा सकती है

By Dayanidhi

On: Friday 28 February 2020
 

Photo: Pixabay 

एक नए अध्ययन से पता चला है कि यदि उष्णकटिबंधीय (ट्रापिक्स) क्षेत्रों की 30 प्रतिशत भूमि को संरक्षित कर दिया जाए तो प्रजातियों के विलुप्त होने के खतरे को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। 

लीड्स विश्वविद्यालय, इंगलैंड के प्रोफेसर जॉन लोवेट सहित 21 वैश्विक जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिकों ने इस विषय पर एक पेपर प्रकाशित किया है। इसमें कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है, इससे भूमि संरक्षण के प्रयासों में भी वृद्धि हुई है। इसलिए यह सही समय है, जब हम प्रजातियों के नुकसान को रोक सकते हैं। 

इकोग्राफी में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। यह ऐसा पहला अध्ययन है, जिसमें संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में प्रजातियों के विलुप्ति दर का विश्लेषण किया गया है।

 

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

 

  • 30% भूमि क्षेत्र का संरक्षण करने से सभी जाने पहचाने उष्णकटिबंधीय पौधों, पक्षियों और स्तनधारियों में आधे से अधिक के विलुप्त होने के खतरे को कम किया जा सकता है।
  • यदि प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जाए तो पारिस्थितिकी तंत्र भी स्वस्थ रहेगा। साथ ही, कई ऐसे पेड़-पौधों की प्रजातियां बचेगी, जो बहुत अधिक कार्बन स्टोर करती हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन को रोकने में मदद मिलेगी।

ग्लोबल चैलेंजेज इन द स्कूल ऑफ़ जियोग्राफी के अध्यक्ष और सह-अध्ययनकर्ता प्रोफेसर लोवेट ने कहा कि भूमि के संरक्षण के साथ-साथ, कृषि, वानिकी और पशुपालन पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। 

कंजर्वेशन इंटरनेशनल के मूर सेंटर फॉर साइंस के प्रमुख अध्ययनकर्ता और वरिष्ठ वैज्ञानिक ली हनाह ने कहा कि 2020 'सुपर ईयर फॉर नेचर' है और मौजूदा शोध से पता चलता है कि अगर हम संरक्षण प्रयासों को नहीं बढ़ाते हैं, तो हम छठे सामूहिक विलुप्ति के कगार पर पहुंच जाएंगे। उल्लेखनीय है इससे पहले प्रजातियों की पांच बड़ी सामूहिक विलुप्तियां हो चुकी हैं, पांचवीं सामूहिक विलुप्ति 37.5 करोड़ वर्ष पूर्व डेवोनियन काल में हुई, जब 75% प्रजातियां विलुप्त हो गईं थी।

अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि अच्छी खबर यह है कि अब हमारे पास इस संकट से निपटने के लिए विज्ञान है। यदि हम सामूहिक रूप से संरक्षण के लिए प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हैं तो हम एक ही समय में जैव विविधता हॉटस्पॉट को संरक्षित कर सकते हैं और ग्लोबल वार्मिंग को भी धीमा कर सकते हैं। 

कंजर्वेशन इंटरनेशनल के सह-अध्ययनकर्ता और वैज्ञानिक पैट्रिक रोहरडानज ने कहा जलवायु परिवर्तन और प्रजातियों के नुकसान में काफी हद तक मानव जिम्मेदार है। अब हमें संरक्षण के लिए स्थिर तापमान और स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र की आवश्यकता है।