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समुद्र के बढ़ते जल स्तर से इस तरह बचेगें वेटलैंड, इंजीनियरों ने सुझाया समाधान

अगले 80 वर्षों में दुनिया भर में तटीय आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के 35 फीसदी तक गायब होने के आसार हैं।

By Dayanidhi

On: Monday 22 March 2021
 
Wetland will be saved in this way from rising sea level, engineers suggested solution
Photo : Wikimedia Commons, Freshwater wetlands Photo : Wikimedia Commons, Freshwater wetlands

आर्द्रभूमि (वेटलैंड) जलवायु परिवर्तन के चलते खतरे में हैं, समुद्र के स्तर में लगातार वृद्धि हो रही है जिससे इनके अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। अनुमानों से पता चलता है कि अगले 80 वर्षों में दुनिया भर में आर्द्रभूमि के 35 फीसदी तक का नुकसान हो सकता है।

हालांकि इस तरह के प्रभावों को रोकने या उन्हें कम करने के लिए सीमित समाधान हैं। यहां इंजीनियरों ने मूल्यवान वनस्पति से संबंधित पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए एक नया इको-इंजीनियरिंग समाधान दिया है।

यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (यूएनएसडब्ल्यू) सिडनी के इंजीनियरों ने एक ऐसी प्रणाली का डिजाइन और निर्माण किया है, जो बार-बार आने वाले ज्वार के असर से महत्वपूर्ण तटीय आर्द्रभूमि को सुरक्षित और बहाल करने में मदद करती है।

यूएनएसडब्ल्यू इंजीनियरिंग की जल अनुसंधान प्रयोगशाला के माध्यम से एसोसिएट प्रोफेसर विल ग्लैमोर के नेतृत्व में उनकी टीम ने दिखाया है कि ऐसे क्षेत्रों को न केवल बचाया जा सकता है, बल्कि ज्वारीय प्रतिकृति विधि अथवा ज्वार के बार-बार आने की तकनीक के द्वारा इन्हें पहले की तरह बहाल किया जा सकता है, जो एक स्मार्टगेट से जुड़ा होता है।

ज्वार के बार-बार आने की विधि एक ऐसी एल्गोरिथ्म है जो ज्वार का पता लगा कर आर्द्रभूमि के विशेष क्षेत्र के लिए सबसे अच्छी पारिस्थितिक स्थिति बनाने की गणना करता है।

ये एल्गोरिथ्म गेट को नियंत्रित करती है। गेट लगभग 2.5 मीटर चौड़ा और 2 मीटर लंबा होता है और अक्सर जहां ज्वार आते है ये उन जगहों पर लगाए जाते हैं, जहां आर्द्रभूमि से नदियां जुड़ती हैं। गेट आर्द्रभूमि में एक निश्चित मात्रा में पानी को आने देने के लिए ऊपर और नीचे की ओर घूमते हैं। 

मुख्य अध्ययनकर्ता डॉ. महमूद सआदत-नूरी ने कहा कि यह प्रणाली दुनिया भर के 32 जगहों में अच्छी तरह उपयोग की जा सकती है। इन विशेष स्थानों को रामसर नाम दिया गया है। इनमें दुर्लभ और अनोखे वेटलैंड क्षेत्र होने की वजह से आधिकारिक तौर पर, अंतरराष्ट्रीय महत्व खासकर जैविक विविधता को देखते हुए इन्हें नामित किया गया है। यह अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ है।

एसोसिएट प्रोफेसर ग्लैमर का कहना है कि ये वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र जहां नदी का मुहाना ज्वार की धाराओं से मिलता है उसे इस्टीयरीज कहते हैं, ये इनके पारिस्थितिक कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ये कई महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करते हैं, जिनमें रहने के लिए घर, मछली पालन के लिए भोजन के महत्वपूर्ण स्रोत, बाढ़ और तटीय संरक्षण और साथ ही एक विशाल कार्बन भंडारण क्षेत्र शामिल हैं।

आर्द्रभूमि वाले क्षेत्र प्रति मीटर के आधार पर अमेज़ॅन वर्षावन की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि वे मीथेन का उत्पादन नहीं करते हैं। अमेज़ॅन और दुनिया के प्रत्येक ताजे पानी की जगहों में, कार्बन अंदर जाता है, लेकिन उनसे मीथेन बाहर निकलती है इसलिए यह कुल मिलने वाले फायदे को कम कर देता है। लेकिन तटीय आर्द्रभूमि में वे मीथेन का उत्पादन नहीं करते हैं और इस प्रक्रिया को ब्लू कार्बन के रूप में जाना जाता है।

 तो यह ज्वार के बार-बार आने वाली विधि से न केवल तटीय आर्द्रभूमि के संरक्षण का समाधान होगा बल्कि यह वातावरण में कार्बन को कम करने के वैश्विक प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Photo : Scientific Reports, Showing saltmarsh and mangrove vegetation

यूएनएसडब्ल्यू की टीम ने एनएसडब्ल्यू में न्यूकैसल के उत्तर में हंटर नदी के मुहाने में, कूरगंग द्वीप के एक स्थान पर स्थापित ज्वार के बार-बार आने वाली विधि और स्मार्टगेट प्रणाली का उपयोग करके तीन साल की अवधि में इसके प्रभावशाली परिणामों का उल्लेख किया है।

उन्होंने नवंबर 2017 में इस प्रणाली की स्थापना की और चालू करने के बाद नवंबर 2017 में खारी वनस्पति का आवरण 0.2 फीसदी था जो दिसंबर 2020 में बढ़कर 45 फीसदी तक पहुंच गया।

क्षेत्र से लिए गए नमूने से पता चला कि तटीय झाड़ी की एक विशेष प्रजाति, सरकोकोर्निया क्विनकफ्लोरा की परीक्षण अवधि के दौरान इसके आवरण में 50 फीसदी तक वृद्धि हुई।

इसके अलावा, पास के टोमैगो वेटलैंड क्षेत्र पर एक ऐसी ही परियोजना जो 400 हेक्टेयर में फैली है तथा रामसर के अंतर्गत आती है। इसमें भी खारेपन की वृद्धि के मामले में भी इसी तरह के नतीजे सामने आए है, साथ ही साथ तटों पर प्रवासी पक्षियों तथा अन्य जीवों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

एसोसिएट प्रोफेसर ग्लैमर ने उम्मीद जताई कि यह प्रणाली दुनिया भर में रामसर के अंदर आने वाली जगहों पर लागू की जाएगी। जिन्हें भौगोलिक रूप से पहचाना गया है और जो बार-बार आने वाली ज्वार की एल्गोरिथ्म से जुड़ी स्मार्टगेट प्रणाली के लिए अनुकूल है। उन जगहों की कुल संख्या 11 लाख मिलियन हेक्टेयर से अधिक है और अनुमान लगाया गया है कि उनकी वार्षिक पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की अहमियत 230 बिलियन अमरीकी डॉलर के बराबर है।

इन वेटलैंड क्षेत्रों में कार्बन स्टोर करने की क्षमता है, वे जहां लोग रहते उन क्षेत्रों में बाढ़ को कम करते हैं, वे पक्षियों और अन्य वन्यजीवों को देखने के लिए आने वाले लोगों के साथ पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, और यह एक ऐसा क्षेत्र है जो बहुत सारे झींगे पैदा कर सकता है।

अध्ययनकर्ता ने कहा  इन सभी का एक निश्चित मूल्य है जिसकी गणना की जा सकती है और मुझे लगता है कि उन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए स्मार्टगेट स्थापित करने की लागत की तुलना में वेटलैंड कई तरह से लाभदायाक हैं।

हमने विशेष रूप से रामसर के क्षेत्रों में काम करने पर जोर दिया है क्योंकि वे सबसे महत्वपूर्ण हैं, उनकी बहुत अधिक अहमियत है , हम उन लोगों के साथ हैं जहां सरकारें पहले से ही उनकी देखभाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।