Sign up for our weekly newsletter

ओखला बर्ड सेंचुरी में इस बार क्यों नहीं आए आधे से ज्यादा प्रवासी पक्षी?

2018 के मुकाबले 2019 के ठंड के मौसम में ओखला बर्ड सेंचुरी में लगभग 57 फीसदी कम प्रवासी पक्षी पहुंचे, जो शुभ संकेत नहीं हैं

On: Wednesday 22 January 2020
 
ओखला बर्ड सेंचुरी में काफी घट गई है प्रवासी पक्षियों की संख्या।फोटो: बिशन पपोला
ओखला बर्ड सेंचुरी में काफी घट गई है प्रवासी पक्षियों की संख्या।फोटो: बिशन पपोला ओखला बर्ड सेंचुरी में काफी घट गई है प्रवासी पक्षियों की संख्या।फोटो: बिशन पपोला

बिशन पपोला

देश की राजधानी दिल्ली से गुजर रही यमुना किनारे बसी ओखला बर्ड सेंचुरी में 2018 के मुकाबले 2019 में प्रवासी पक्षियों की संख्या में 55 फीसदी से अधिक की गिरावट देखने को मिली है। 2018 के ठंड के मौसम में जहां 57 प्रजाति की 15,386 प्रवासी पक्षियों ने ओखला बर्ड सेंचूरी में दस्तक दी थी, वहीं इस 2019 के ठंड के मौसम में लगभग 53 प्रजाति की 6,796 पक्षी ही यहां पहुंचे। हर साल प्रवासी पक्षियों की संख्या में आ रही कमी से जीव विज्ञानी चिंतित हैं। जीव विज्ञानी टीके राय ने बताया कि बर्ड सेंचुरी के आसपास बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण की वजह से प्रवासी पक्षी यहां आना पंसद नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा दलदली व जलभूमि का लगातार घटते जाना भी प्रवासी पक्षियों के आवागमन पर बुरा असर डाल रहा है।

आधिकारिक तौर पर इसे शहीद चंद्रशेखर आजाद बर्ड सेंचुरी के नाम से जाना जाता है। वैसे तो ओखला बर्ड सेंचूरी 1874 में जब से आगरा कैनाल बनी है, तब से ही पक्षी प्रेमियों का पसंदीदा स्थल बना हुआ है, लेकिन उत्तर-प्रदेश सरकार ने 1990 में यहां के 4 वर्ग किमी. जगह को पक्षी विहार घोषित किया। इस जगह को देश के 466 इंटरनेशनल बर्ड एरिया (आईबीए) में भी शामिल किया गया है। दिल्ली-एनसीआर के नजदीक होने की वजह से ओखला बर्ड सेंचुरी पक्षी-प्रेमियों को बहुत अधिक आकर्षित करता है, क्योंकि यहां हर साल सितंबर से मार्च के बीच हजारों पक्षियां अस्थायी प्रवास के लिए आती हैं। अब तक यहां करीब 319 प्रजाति की पक्षियों को स्पॉट किया जा चुका है। यहां हर साल प्रवास के लिए जितने भी पक्षी आते हैं, उनमें बाहर से आईं प्रवासी पक्षियों का औसत 48 फीसदी रहती है। 39 फीसदी पक्षी यहां के स्थानीय निवासी हैं, जबकि 11 फीसदी पक्षी अचानक प्रवास के लिए आते हैं। 2 फीसदी पक्षी अज्ञान श्रेणी के होते हैं। प्रवासी पक्षी तिब्बत, यूरोप, साइबेरिया के साथ-साथ भारत के बेहद ठंडे क्षेत्रों से इस हिस्से की गर्म जलवायु के लिए आते हैं।

ओखला बर्ड सेंचुरी प्रशासन द्बारा 2019 की अब तक जारी रिपोर्ट के मुताबिक इस मौसम में नॉर्दन शाब्लर (1100) और यूरोपियन कूट (1750) के अलावा बार हेडेड गूज (300), कॉमन टील (900), नॉर्दन पेंटेल (909), ग्रले गूज (990), कॉमन शेल्डेक (14), यूरोपियन विगॉन (200), गॉडवेल (150), कॉमन पोचार्ड (125), टफटेड डक (90), ग्रेट वाइट पेलिकन (08), ग्रेट कॉरमोरेंट (260) पहुंचे हैं। जिनकी कुल गिनती 6,796 बताई गई है। यह संख्या 2018 के मुकाबले संख्या में 8,617 कम है। बांबे नेचुरल सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में यहां पहुंची 15386 प्रवासी पक्षियां 57 प्रजाति की थी, जिसमें कई वर्षों बाद साइबेरियन ग्रेटर स्केप को भी स्पॉट किया गया था, लेकिन 2019-20 में अभी तक इस पक्षी को स्पॉट नहीं किया गया है।

बर्ड सेंचूरी के क्षेत्रीय अधिकारी अरविद कुमार मिश्रा ने बताया कि अभी तक पहुंचे सभी पक्षी 52 से अधिक प्रजाति के हैं, लेकिन मार्च मध्य तक फाइनल आकड़ा पता चलेगा, क्योंकि अभी लगभग डेढ़ माह तक प्रवासी पक्षी की आवाजाही होती रहेगी। मार्च मध्य के बाद जैसे ही यहां गर्मी शुरू होगी ये प्रवासी पक्षी वापस लौट जाएंगे।

घोषित है ईको-सेंस्टिव जोन

नेशनल ग्रीन ट्ब्यिूनल (एनजीटी) ने 14 अगस्त 2013 को नोएडा अथॉरिटी को ओखला बर्ड सेंचुरी से 10 किमी. के दायरे में प्राइवेट बिल्डरों द्बारा कराए जा रहे निर्माण कार्य पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके बाद अक्टूबर 2013 में एनजीटी ने ही अपने अंतरिम आदेश में बर्ड सेंचुरी से 10 किलोमीटर दायरे को इको सेंस्टिव जोन बताते हुए वहां कराए गए निर्माण कार्य को अवैध बताया था, जिसका जून 2014 के एक ऑर्डर में सुप्रीम कोर्ट ने भी समर्थन किया था। इसके बाद बर्ड सेंचुरी के 10 किलोमीटर के क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सुपरटेक बिल्डर की सुपरनोवा बिल्डिंग के निर्माण कार्य को रोक दिया गया था, लेकिन मेट्रो  व अन्य तरह का निर्माण कार्य जारी है। इसके अतिरिक्त बर्ड सेंचुरी के आसपास सड़कों पर वाहनों का दबाव भी बढ़ा है, जो पक्षियों की शांति छीन रहा है। पक्षी विज्ञानी टीके राय कहते हैं कि जो पक्षी यहां होने वाली परेशानियों के कारण चले जाते हैं, उनमें से बहुत कम अगले सीजन में लौटते हैं। वे या तो यहां आते वक्त आधे रास्ते में मिलने वाली शांत जगहों में रूक जाते हैं या फिर यही आकर दूसरी जगहों की तलाश करने लगते हैं।

 

ओखला बर्ड सेंचूरी में पक्षियों की विविधता का ग्रॉफ

महर्षि माकेंडेश्वर यूनिवर्सिटी, मुलाना (अंबाला हरियाणा) के डिपार्टमेंट ऑफ वायोटेक्नोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुनील कुमार उपाध्याय की सर्वे रिपोर्ट ए सर्वे ऑन इनडेंजर्ड एविएन बॉयोडाइवरसिटी एट ओखला बर्ड सेंचुरी में पक्षियों की अलग-अलग श्रेणियां बताई गई हैं। जैसे कि-

 1- प्रवासी वुडलैंड प्रजातियां- 6 प्रतिशत

2- खतरे वाली प्रजातियां - 2 प्रतिशत

3- कमजोर प्रजातियां- 1 प्रतिशत

4- गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियां- 2 प्रतिशत

5- प्रवासी जल पक्षी- 10 प्रतिशत

6- सामान्य जलपक्षी- 4 प्रतिशत वूडलैंड प्रजाति- 9 प्रतिशत

7- सामान्य वुडलैंट प्रजातियां-9 प्रतिशत

8- सर्दियों में आने वाली प्रजातियां-11 प्रतिशत

9- स्थानीय प्रजातियां-29 प्रतिशत 

10- जलीय प्रजातियां -26 प्रतिशत