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वनाधिकार के 5.5 लाख दावे समीक्षा के बाद खारिज

यह जानकारी 14 राज्यों ने जनजातीय मामलों के मंत्रालय को दी, पश्चिम बंगाल में 92 प्रतिशत दावे खारिज

By Ishan Kukreti

On: Tuesday 14 July 2020
 
Photo: Needpix
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वनवासियों पर एक बार फिर बेदखली की तलवार लटक रही है। इस साल 24 फरवरी तक 14 राज्यों ने कुल 5,43,432 वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) 2006 के तहत किए गए दावों को स्वत: संज्ञान समीक्षा के बाद खारिज कर दिया। ये राज्य हैं- आंध्र प्रदेश (2,355), बिहार (1,481) छत्तीसगढ़ (39,4851), हिमाचल प्रदेश (47), कर्नाटक (58,002), केरल (801), महाराष्ट्र (9,213), ओडिशा (73737), राजस्थान (5,906), तेलंगाना (5,312), तमिलनाडु (214), उत्तराखंड (16), त्रिपुरा (4), पश्चिम बंगाल (54,993)। पश्चिम बंगाल ने कुल 92 प्रतिशत दावों को खारिज कर दिया। राज्य में कुल 59,524 दावों की समीक्षा की गई थी।

यह जानकारी राज्यों ने जनजातीय मामलों के मंत्रालय को 24 फरवरी के दिन हुई एक बैठक में दी है। मंत्रालय ने इस बैठक के मिनट्स को अपनी वेबसाइट पर 2 जुलाई को अपलोड किया।

गौरतलब है कि 13 फरवरी, 2019 को एफआरए मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को उन दावेदारों को बेदखल करने को कहा था जिनका दवा खारिज हो चुका था। हालांकि कोर्ट ने सरकार के दखल के बाद 28 फरवरी को आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने सभी राज्यों के साथ एक बैठक आयोजित की थी।

6 मार्च और 18 जून को दो बैठकों में राज्यों ने मंत्रालय को बताया था कि उन्होंने दावों को खारिज करने में एफआरए के कई प्रावधानों का पालन नहीं किया था। मंत्रालय ने तब राज्यों को सभी खारिज किए गए दावों की स्वत: समीक्षा की सलाह दी थी।

24 फरवरी की बैठक के मिनट्स के अनुसार, 14,19,259 में से 1,72,439 दावों की समीक्षा की गई। समीक्षा किए गए दावों की संख्या की तुलना में अधिक दावों को खारिज किया जाना डेटा में विसंगति की वजह से है। कुछ राज्यों ने कुल की गई समीक्षाओं के डेटा को साझा नहीं किया है और कुछ ने यह नहीं बताया है कि कुल कितने दावों की समीक्षा होनी है।  

मध्य प्रदेश के प्रतिनिधि ने मंत्रालय को बताया कि इस प्रकिया में कम से कम 12 महीने का समय लगेगा। तब तक कोई दावेदार बेदखल नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खारिज दावों की समीक्षा और दावेदार की पहचान के लिए मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) का सहारा ले रही है। राज्य सरकार ने फील्ड स्टाफ और अधिकारियों को एमआईएस और मोबाइल एप्लीकेशन का प्रशिक्षण देने के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम किए हैं।

जरूरी नहीं है कि समीक्षा में खारिज सभी दावे बेदखल होंगे क्योंकि बहुत सारे दावे डुप्लीकेशन की वजह से भी खारिज कुए हैं। उदाहरण के लिए राजस्थान ने मंत्रालय को बताया कि 18,446 खारिज किए गए दावे कब्जे नहीं होने, दोहरे दावे, अन्य राजस्व भूमि पर कब्जे, दावेदार की मृत्यु, गलत प्रविष्टि, प्रवास आदि के कारण गैर बेदखली दावे हैं।

दावेदारों की बेदखली के क्या परिणाम होंगे, यह जानने के लिए राज्य खारिज किए गए दावों का समुचित वर्गीकरण करेंगे और बताएंगे कि किस आधार पर यह बेदखली हुई है। एफआरए बेदखली के बारे में कुछ नहीं कहता है, इसलिए बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एक विस्तृत वर्गीकरण किया जाएगा जो बेदखली की प्रकृति का चित्रण करेगा।