जंगलों में आग लगनी शुरू, लेकिन लॉकडाउन की वजह से कर्मचारी नहीं हुए तैनात

लॉकडाउन की वजह से जहां कर्मचारियों की तैनाती शुरू नहीं हो पाई है, वहीं स्थानीय लोगों का सहयोग भी मिलता नहीं दिख रहा है

By Rohit Prashar

On: Monday 13 April 2020
 
हिमाचल प्रदेश में जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। फोटो: रोहित पराशर
हिमाचल प्रदेश में जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। फोटो: रोहित पराशर हिमाचल प्रदेश में जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। फोटो: रोहित पराशर

लॉकडाउन से जहां प्रवासी मजदूरों की मुसीबतें और बढ़ीं हैं। वहीं दूसरी ओर जंगल में लगने वाली आग से होने वाले नियमित नुकसान की मात्रा और बढ़ गई है। क्योंकि इस समय में जंगल विभाग के अफसर-कर्मचारी भी लॉकडाउन में जंगलों की पहरेदारी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में जंगल में लगी आग को रोकना और कठिन हो गया है। ध्यान रहे कि इस बार आग लगने की घटनाएं वक्त से पहले ही शुरू हो गई हैं। ऐसे में डाउन टू अर्थ ने लॉकडाउन के समय देश के चार राज्योें में जंगलों में लगने वाली आग की पड़ताल की है। इस पड़ताल की पहली कड़ी में हिमाचल प्रदेश की स्थिति का आंकलन किया है-

हिमाचल में इस बार समय से पहले गमिर्यों की दस्तक से जंगलों मे आग (फाॅरेस्ट फायर) की घटनाएं भी जल्द सामने आने लगी हैं। फरवरी के दूसरे सप्ताह में किन्नौर जिले में चोरा, तरांडा, रूपी, छोटा-बड़ा कंबा, रोकचरंग-काचरंग के जंगलों में लगी आग में सेब के छह बगीचों में बागवानों के लगभग 500 सेब के पौधे जल गए। साथ ही, वन संपदा को भी भारी नुकसान पहुंचा। ऐसे लॉकडाउन की स्थिति में अधिक फारेस्ट फायर से निपटने के लिए वन विभाग को अधिक मशक्कत करनी पड़ेगी। कोरोनावायरस के कारण हिमाचल में लॉकडाउन है और ऐसे में आग की घटनाएं अधिक होती हैं तो वन विभाग को पूर्व के वर्षों में जो जन सहयोग मिलता था, वो नहीं मिल पाएगा, जिससे हिमाचल को जंगलों के साथ वन्यप्राणियों की हानि का भी नुकसान उठाना पड़ेगा।

इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी वनों में आग की घटनाओं का फरवरी और मार्च माह में दर्ज होना मौजूदा फायर सीजन के दौरान फारेस्ट फायर की अधिक घटनाओं की ओर संकेत कर रहा है।

ध्यान रहे कि हिमाचल के कुल क्षेत्रफल का 66 फीसदी हिस्सा वन क्षेत्र है। भारतीय पक्षियों की 36 फीसदी प्रजातियां यहां के जंगलों में पाई जाती हैं। देश में पक्षियों की कुल 1228 प्रजातियां हैं, जिनमें से 447 हिमाचल में पाई जाती हैं, इसके अलावा राज्य में 77 स्तनपायी जानवरों की प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में इतनी वन और जैव विविधता वाले हिमाचल प्रदेश को इस फारेस्ट सीजन वनों की आग को जनसहयोग के बिना बचाए रखना सरकार और विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी।

नहीं तैनात हो पाए फायर वॉचर
वनों की आग को नियंत्रण में करने और इसके बारे में तुरंत विभाग का जानकारी देने के लिए वन विभाग हर साल फारेस्ट सीजन के शुरू होने से पहले फारेस्ट वाचर की तैनाती करता है। लेकिन इस बार लॉकडाउन होने की वजह से फायर वॉचर की तैनाती नहीं हो पाई है। इसके अलावा लोगों को वनों की आग के बारे में जागरूक करने के लिए रेंज लेवल पर दो बड़ी जागरूकता कायर्शालाएं आयोजित की जाती थी, जिससे लोगों को वनों की आग से होने वाले नुकसान और इससे कैसे निपटा जाए इसके बारे में बताया जाता था, लेकिन ये कार्याशालाएं भी नहीं हो पाई हैं। वहीं अगर वनों में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए वन विभाग के पास आधुनिक यंत्र न होने की वजह से वन संपदा का नुकसान भी कम होता नहीं दिख रहा है। वनों की आग को नियंत्रण में पाने के लिए यंत्रों की अनुपलब्धता का मामला राज्य की विधानसभा में भी गुंज चुका है। जिसमें प्रदेश के वन मंत्री ने विधानसभा में माना है कि राज्य के 198 वन क्षेत्रों में आग पर काबू पाने के लिए कोई सरकारी संसाधन नहीं हैं।

राज्य में 339 उच्च संवेदनशील बीटें
वन विभाग के अनुसार राज्य में 26 वन अग्नि संवेदनशील क्षेत्र हैं। प्रदेश की 2026 वन बीटों में से 339 उच्च संवेदनशील, 667 मध्यम और 1020 निम्न संवेदनशील बीटें हैं। इसके अलावा वन विभाग का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में वनों की आग के पीछे मुख्य मानवीय कारण है। लोग अवैध कटान करने के बाद ठूंठों को छुपाने के लिए वनों में आग लगा देते हैं, इसके अलावा वन्य प्राणियों के शिकार और इन्हें बस्तियों से दूर रखने के लिए, अच्छी घास के लिए वनों में आग लगा देते हैं। वर्ष 2016-17 में प्रदेश में 1789 और वर्ष 2017-18 में 670 घटनाएं दर्ज की गई थी।

इस बार बढ़ सकती हैं घटनाएं
इस फायर सीजन में हिमाचल प्रदेश में आगजनी की अधिक घटनाएं देखी जा सकती हैं, क्योंकि हिमाचल में 80 फीसदी लोग गांवों में निवास करते हैं और ज्यादातर लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहरी राज्यों में नौकरी करते हैं। लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर लोग गांवों में हैं और ऐसे में जंगलों  में  शिकार के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। लोग चोरी-छुपे जंगलों में अवैध शिकार और अवैध वन कटान की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में वनों की आग की घटनाओं के बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है। 
प्रधान मुख्य वन संरक्षक अजय कुमार का कहना है कि वनों की आग से निपटने के लिए तैयारियां पूरी की गई हैं। फारेस्ट गार्ड अपने-अपने स्थानों पर जंगलों की आग पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा जैसे ही लॉकडाउन हटता है वैसे ही फायर वाचर की तैनाती भी जंगलों में की जाएगी। जंगलों की आग पर नजर रखने के लिए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं।