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15 साल में धरती का 35,204 वर्ग किमी वन क्षेत्र कम हुआ

रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती आबादी के दबाव और गरीबी के कारण भूमि क्षेत्र में बदलाव देखने को मिल रहे हैं

By Richard Mahapatra

On: Wednesday 30 January 2019
 
Credit: Wikimedia commons
Credit: Wikimedia commons Credit: Wikimedia commons

धरती के लिए कुछ अच्छी खबर है और कुछ बुरी। युनाइटेड नेशंस टू कॉम्बैट डिजर्टीफिकेशन (यूएनसीसीडी) के सचिवालय से जारी प्रारंभिक रिपोर्ट बताती है कि पेड़ों से आच्छादित भूमि (ट्री कवर) अब भी धरती में सर्वाधिक है। 2005 के बाद से वनों की कटाई की दर कम हुई है लेकिन जंगल लगातार सिकुड़ रहे हैं।

यह आकलन 2000 से 2015 की अवधि का है। यूएनसीसीडी के रिव्यू कमिटी के सम्मेलन (सीआरआईसी 17) की बैठक गुयाना के जॉर्जटाउन में चल रही है। भूमि ह्रास का यह पहला वैश्विक आकलन है जो विभिन्न सहयोगी देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है। यूएनसीसीडी में कुल 197 देश पार्टी हैं जिनमें से 145 देशों ने भूमि ह्रास का आंकड़ा उपलब्ध कराया है।

इन आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई प्रारंभिक रिपोर्ट कहती है कि विश्व की अग्रणी भूमि की श्रेणी में पेड़ों से आच्छादित भूमि है। इनमें प्राकृतिक वन शामिल है। विभिन्न देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों की अनुसार, पेड़ों से आच्छादित भूमि कुल भूमि का 32.4 प्रतिशत है।

इसी के साथ बुरी खबर भी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2000 से 2005 के बीच पेड़ों से आच्छादित क्षेत्र ~1,41,610 वर्ग किमी कम हुआ है लेकिन 2000 के स्तर के मुकाबले 2015 तक 35,204 वर्ग किमी (-0.1) की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई है।

वनों से आच्छादित क्षेत्र मध्य और पूर्वी यूरोप, उत्तर भूमध्यसागरीय क्षेत्र और एशिया में बढ़ा है जबकि लैटिन अमेरिका, कैरिबियाई देशों और अफ्रीका में यह घटा है।

कुल भूमि में वनों से आच्छादित क्षेत्र के बाद चारागाह भूमि, फसल भूमि, जलमय भूमि (वेटलैंड) और कृत्रिम सतह क्रमश: 23.1 प्रतिशत, 17.7 प्रतिशत, 4.2 प्रतिशत और 0.8 प्रतिशत है।   

दुनियाभर में कृत्रिम क्षेत्र की भूमि में सबसे अधिक बदलाव आया है। यह वह भूमि है जिस पर शहरीकरण होता है। 2000 से 2015 के बीच इस श्रेणी की भूमि का विकास 32.2 प्रतिशत हुआ है। दूसरे शब्दों में कहें तो 1,68,000 वर्ग किमी का क्षेत्र इसके दायरे में आया है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह रुझान कृत्रिम भूमि का दायरा बढ़ा रहा है। यह बदलाव इसलिए गंभीर है क्योंकि 48,240 वर्ग किलोमीटर का कृत्रिम क्षेत्र पहले प्राकृतिक था। प्राकृतिक और अर्द्ध प्राकृतिक क्षेत्रों को मिलाकर यह 1,43,200 वर्ग किमी है। कृत्रिम क्षेत्र में यह इजाफा फसल भूमि और चारागाह की बदौलत हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती आबादी के दबाव और गरीबी के कारण भूमि क्षेत्र में बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

दूसरी तरफ आकलन अवधि के दौरान फसल भूमि में भी लगातार इजाफा हुआ है। इस श्रेणी की भूमि 5,75,000 वर्ग किमी बढ़ गई है। रिपोर्ट कहती है कि इसका अधिकांश हिस्सा पेड़ों से आच्छादित भूमि (3,69,000 वर्ग किमी), अन्य भूमि (3,10,900 वर्ग किमी) और चारागाह भूमि (4,24,700) के स्थानांतरण से आया है।

रिपोर्ट कहती है कि अन्य भूमि का फसल भूमि में परिवर्तन, फसल भूमि का अन्य भूमि में परिवर्तन से तीन गुणा है। इससे संकेत मिलता है कि सीमांत भूमि भी उत्पादन में प्रयोग की जा रही है। वहीं फसल भूमि शहरीकरण, मिट्टी के अपर्याप्त प्रबंधन, अपर्याप्त फसल प्रबंधन और औद्योगिक गतिविधियों का शिकार हो रही है।