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पेड़ों के बीजों को चट कर जाते है कीट, इसलिए बढ़ रहा है तापमान

 गर्म तापमान के कारण बीज उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ, साल-दर-साल बदलाव हो रहा है

By Dayanidhi

On: Thursday 13 February 2020
 
Photo: Vikas Chaudhary
Photo: Vikas Chaudhary Photo: Vikas Chaudhary

इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल द्वारा किए गए शोध में पेड़ों की मास्टिंग और उनके बीजों को खाने वाले कीटों के बीच जटिल संबंधों पर जलवायु के प्रभाव का पता चला है।

मास्टिंग वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पेड़ साल-दर-साल अलग-अलग मात्रा में बीजों का उत्पादन करते हैं। कई पेड़ों की प्रजातियों में यह विशेषता पाई जाती है, जिनमें ओक, बीच, चीड़ और स्प्रेज़ शामिल हैं। यह प्रक्रिया फायदेमंद होती है क्योंकि`अकाल के वर्षों ' के दौरान, बीजों को खाने वाले जीव जैसे पतंगे आदि भूखे रह जाते है, जिसके कारण उनकी संख्या कम हो जाती है। जबकि `बम्पर वर्षों' में, बीज का उत्पादन इतना अधिक होता है कि यह बीजों को खाने वाले कीटों को भरपूर भोजन प्रदान करता है। बीज का उत्पादन अधिक होने के कारण इनके जमने की संभावना बढ़ जाती है जिससे ये अगली पीढ़ी के पेड़ों के रूप में उग सकते है।

हालांकि, नेचर प्लांट्स में प्रकाशित बीच ट्री सीड प्रोडक्शन के एक अध्ययन में पाया गया कि गर्म तापमान के कारण बीज उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ, साल-दर-साल बदलाव हो रहा है। विशेष रूप से अकाल के वर्षों में बीज उत्पादन में कमी आई है। इस प्रकार बीज उत्पादन में जलवायु के प्रभाव से होने वाली वृद्धि से बीज खाने वाले जीवों को फायदा होता है, इसका पेड़ पौधों को किसी तरह का कोई लाभ नहीं होता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल स्कूल ऑफ एनवायर्नमेंटल साइंसेज के सह-अध्ययनकर्ता डॉ. एंड्रयू हैकेट-पैन ने कहा कि यह अध्ययन यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि बीच के पेड़ों पर जलवायु परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ रहा हैं। क्या जलवायु परिवर्तन से पेड़ों के बीज उत्पादन में वृद्धि हो रही है? लेकिन हमने देखा कि बीज उत्पादन में वृद्धि से मोथ लार्वा नामक जीव को लाभ हो रहा है इसकी बीज खपत की क्षमता लगभग पूरी तरह से बदल गई है। 

पेड़ अधिक बीजों का उत्पादन कर रहे हैं लेकिन उनके बढ़े हुए उत्पादन का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। 

मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के डॉ. जोनाथन लेगर्ड ने कहा कि, इस शोध में, हमने चार दशकों तक निगरानी किए गए डेटा का उपयोग किया हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि जलवायु परिवर्तन ने सबसे व्यापक पेड़ों में से एक के प्रजनन को कैसे प्रभावित किया है। हमने देखा कि उस समय की अवधि में बीज उत्पादन में वृद्धि तो हुई, लेकिन इस उत्पादन का फायदा केवल बीज खाने वाले कीटों को हुआ।

हालांकि, दुनियां भर में खासकर ब्रिटेन के बीच के पेड़ों में 'अधिक और कम' बीज उत्पादन पैटर्न से कीट आबादी में वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप, हमने लार्वा द्वारा खाए जाने वाले बीजों के प्रतिशत में बहुत अधिक वृद्धि देखी है। यह 1980 के दशक में लगभग 1 फीसदी थी जो हाल के वर्षों में बढ़कर 40 फीसदी तक हो गई है। इस वृद्धि में बढ़ते तापमान की अहम भूमिका है।