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वैज्ञानिकों ने बनाई ‘पेपर चिप्स’, जंगल में आग के फैलने से पहले देगी चेतावनी

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई पेपर आधारित चिप बनाई है, जो जंगल में आग के फैलने से पहले ही उसकी चेतावनी जारी कर देगी| पेपर आधारित यह चिप अपनी ही ऊर्जा से चलती है

By Lalit Maurya

On: Monday 22 June 2020
 

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई पेपर आधारित चिप बनाई है, जो जंगल में आग के फैलने से पहले ही उसकी चेतावनी दे देगी| पेपर आधारित यह चिप अपनी ही ऊर्जा से चलती है| जिस वजह से इसके लिए बैटरी या अन्य किसी ऊर्जा के स्रोत की जरूरत नहीं पड़ती है|

हाल ही में अमेज़न के वर्षा वनों और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में भीषण आग लगी थी| अनुमान है कि ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग से करीब 1.1 करोड़ हेक्टेयर (110,000 वर्ग किलोमीटर) में फैला जंगल, झाड़ियां और पार्क सब जलकर नष्ट हो गए थे| जबकि ब्राजील के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च (आईएनपीई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 में अमेज़ॅन के जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं में करीब 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2019 में करीब 89,178 बार आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं|

भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में भी जंगल की आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं| ऐसे में आग के फैलने से पहले ही उसपर काबू पाना बहुत जरुरी है| यह तभी मुमकिन हो सकता है कि जब सही समय पर उसका पता चल जाए| पर अधिकांशतः जब तक इस बात का पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और आग विकराल रूप ले चुकी होती है| जिसपर काबू पाना मुश्किल हो जाता है| इसने इस कमी को उजागर कर दिया कि जंगलों में बार-बार लगने वाली इस आग को रोकने के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली बहुत जरुरी है|

वर्तमान में इस दावाग्नि को रोकने के लिए इंफ्रारेड इमेजिंग सैटेलाइट, वॉचटावर और हवा से निगरानी करने जैसे उपाय किये जा रहे हैं| लेकिन यह जब तक इस बात की जानकारी देते हैं| तब तक बहुत देर हो जाती है| पर अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चिप तैयार करने में सफलता हासिल की है जो आग लगने की शुरुवात होते ही इस बारे में जानकारी सिग्नलों के माध्यम से प्रसारित कर देगी| पेपर आधारित यह चिप अपनी ही ऊर्जा से चलती है और इसके लिए किसी प्रकार की बैटरी और ऊर्जा के अन्य स्रोत की जरुरत नहीं पड़ती है| इससे जुड़ा शोध जर्नल ऑफ अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुआ है|

इससे पहले भी वैज्ञानिकों ने जंगल में सेंसर के एक नेटवर्क को स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था| जो तपमान, धुंए और आद्रता में हो रहे बदलावों का पता लगा सके और उसके बारे में जानकरी भेज सके| पर ऐसा संभव नहीं हो पाया था क्योंकि इन सेंसर्स को चलने के लिए बैटरी या अन्य ऊर्जा की जरुरत पड़ती है| जो थोड़े समय के बाद ख़त्म हो जाती है ऐसे में उन्हें फिर से बदलना पड़ेगा| इसके साथ ही अब तक जो सेंसर को बनाने के लिए सामग्री खोजी गई थी वो महंगी और पर्यावरण के प्रतिकूल थी|

कैसे काम करता है यह सेंसर

लेकिन इस पेपर आधारित थर्मोइलेक्ट्रिक सेंसर बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने दो आयनिक लिक्विड मैटेरियल को चुना है जो तपमान के बढ़ने के साथ ही अलग अलग तरह से बर्ताव करने लगते हैं| उनमें से एक गोल्ड इलेक्ट्रोड की सतह पर अवशोषित कर लिया जाता है जबकि दूसरा उसके विपरीत प्रतिक्रिया करता है| वैज्ञानिकों ने प्रत्येक आयनिक लिक्विड को गोल्ड के दो इलेक्ट्रोड के बीच एक स्याही की तरह जमा कर दिया| जिन्हें एक साधारण पेपर पर लगा दिया गया|

जब इन दो आयनिक लिक्विड मैटेरियल को एक श्रृंखला में जोड़ा गया, तो पता चला कि तापमान में बड़ा अंतर आने पर यह एक विद्युत संकेत उत्पन्न करते हैं| जैसा की आग लगने के मामले में होता है| इसकी जांच के लिए वैज्ञानिकों ने इन्हें घर में लगे एक पौधे पर टैस्ट किया| जब जलते हुए कॉटन को पौधे की जड़ के पास लाया गया तो इससे सेंसर की निचली सतह का तापमान बढ़ गया और उसने एक सिग्नल भेजना शुरू कर दिया| इस सिग्नल को एक कंप्यूटर माइक्रोचिप की मदद से रिसीवर को भेज दिया गया| जैसे ही यह सिग्नल रिसीवर को मिला उसमें एक अलार्म और लाल बत्ती अपने आप ही सक्रिय हो गए| जो स्पष्ट रूप से आग लगने की चेतावनी देते थे|

शोधकर्ताओं के अनुसार उनके बनाये यह थर्मोइलेक्ट्रिक पेपर चिप्स पर्यावरण के अनुकूल हैं| साथ ही इनकी सबसे बड़ी विशेषता इनका बैटरी के बिना भी चलना और सस्ता होना है| जिस वजह से इन्हें आसानी से उपयोग किया जा सकता है|