Environment

उत्तर भारत में बढ़ गए सर्दी के दिन

मैदानी व पर्वतीय इलाकों में इस बार ज्यादा हुई बारिश और बफर्बारी

 
By Varsha Singh, Anil Ashwani Sharma
Last Updated: Friday 08 February 2019

Photo: Varsha Singhउत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इस बार सर्दी के दिन बढ़ गए हैं तो दूसरी ओर हिमालयी क्षेत्रों में बफर्बारी पिछले सालों के मुकाबले अधिक हो रही है। उत्तर भारत के मैदानी और पर्वतीय इलाकों में फरवरी के पहले हफ्ते में बारिश और बर्फबारी हुई है। इस संबंध में मौसम विभाग का कहना है कि हमने एक हफ्ते पहले ही चेताया था कि फरवरी के पहले हफ्ते में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) में बर्फबारी हो सकती है और वहीं उत्तर भारत के जमीनी इलाकों में बारिश होने के साथ-साथ ओला पड़ने की भी आशंका है। इसका कारण बताया गया है कि पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत से टकराया है, इसी का असर है कि इन दिनों में पर्वतीय इलाकों से लेकर मैदानी इलाकों में बारिश व बर्फबारी हो रही है। मौसम में यह बदलाव जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हुए ताजा वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से हो रहा है। इसकी वजह से पश्चिमी राजस्थान में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इसके कारण हवा ने अपनी दिशा बदल ली है।

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में इस बार सर्दी आर्कटिक से आने वाली सर्द हवाओं के कारण संभव हुई है। विभाग के अनुसार पोलर वोर्टेक्स (ध्रुवीय चक्रवात) से हवाओं में उतार-चढ़ाव के कारण दिसंबर से लेकर अब तक ठंड का असर उत्तर भारत में दिख रहा है। विभाग का कहना है कि आर्कटिक से निकलने वाली ठंड यूरोप और अमेरिका में दक्षिण की ओर फैल रही है, जो पश्चिमी विक्षोभ को उत्तर भारत की ओर धकेलती हुई प्रतीत होती है। वास्तव में यह ठंड को दक्षिणी यूरोप से उत्तर भारत की तरफ ला रही है। पश्चिमी विक्षोभ वास्तव में निम्न दाब की हवाओं के कण हैं, जो भूमध्यसागरीय क्षेत्र से पश्चिम और आसपास की ओर से आती हैं, जिससे ठंडी, नम हवाएं आती हैं। ये या तो हिमालय से टकराकर उत्तर भारत को प्रभावित करती हैं या फिर उत्तर की ओर उड़ जाती हैं। मौसम विभाग का कहना है कि चूंकि जनवरी के अंत में पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत से टकराया था और इसका असर अब तक हम देख रहे हैं।

डर का माहौल

उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी और तेज हवाओं ने गुरुवार शाम से एक फिर मौसम को लेकर डर का माहौल पैदा कर दिया। हालांकि शुक्रवार की सुबह धूप-छांव की बारी लगी रही लेकिन कल रात के मौसम से सहमे लोगों को तसल्ली मिली। गुरुवार तड़के से ही राज्य के पर्वतीय हिस्सों में बारिश और बफर्बारी शुरू हो गई। देहरादून में भी कई हिस्सों में बारिश के साथ ओले गिरे। जिससे तापमान में गिरावट आ गई। मौसम का रुख देखते हुए राज्य में सभी आंगनबाड़ी केंद्र और बारहवीं तक के स्कूल बंद कर दिए गए। देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक, गुरुवार को राज्य के पर्वतीय हिस्सों में मूसलाधार बारिश और बर्फबारी हुई। इस कारण राज्य के कई हिस्सों में सड़क मार्ग प्रभावित हुए हैं। राज्य आपदा केंद्र के मुताबिक रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चमोली में राष्ट्रीय राजमार्ग के कुछ हिस्से बर्फबारी के कारण बंद पड़े हैं। बारिश की वजह से इन जिलों में बिजली आपूर्ति ठप पड़ी है। देहरादून में भी मसूरी और चकराता में बर्फबारी से रास्ते बंद हो गए और बिजली आपूर्ति ठप हो गई। सिंह के मुताबिक, पश्चिम विक्षोभ के कारण बारिश और बर्फबारी की ये स्थिति लगातार बन रही है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जतायी है कि अगले चार दिन तक लोगों को बारिश और बफर्बारी से राहत मिलेगी। 

दूसरी ओर टिहरी बांध का जलस्तर 796.54 मीटर तक पहुंच गया है। बांध का अधिकतम जलस्तर 830 मीटर है। डैम में पानी बढ़ने से 7,455 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। टिहरी में भी बारिश ने रास्ते और बिजली कनेक्शन दोनों को प्रभावित किया है। इसके साथ ही पौड़ी और पिथौरागढ़ में भी बर्फबारी ने आवाजाही ठप कर दी है।

कोहरे का कारण

इसके अलावा पिछले एक हफ्ते से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में घना कोहरा छाया हुआ था। इस संबंध में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) ने उत्तर भारत और विशेषकर गंगा के मैदानी इलाकों में घने कोहरे का कारण आर्कटिक और यूरेशिया के आर्कटिक सर्कल और यूरेशिया के मध्य लैटिट्यूड्स में मौजूद असामान्य उच्च दबाव का क्षेत्र है। ध्यान रहे कि ये दोनों क्षेत्र भारत से क्रमश: 9,240 व 2,910 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। आईआईटीएम के अनुसार आर्कटिक क्षेत्र में जब कम दबाव का क्षेत्र बनता है तो वहां ठंडी हवा का दबाव मौजूद रहता है। यह उच्च दबाव का क्षेत्र जब यूरेशिया की पूर्व-पश्चिमी हवाओं से टकराता है तो उत्तर भारत और गंगा के मैदानी क्षेत्रों में घने कोहरे का कारण बनता है।

आर्कटिक और यूरेशियन क्षेत्र से आने वाली ठंडी हवा जब गंगा के मैदानी इलाकों के ऊपर आती है तो एक उच्च दबाव का क्षेत्र बनता है, जो जमीन पर मौजूद नमी से घने कोहरे का निर्माण करती है।

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