Climate Change

भारत ही नहीं, अमेरिका में भी बढ़ रहा वायु प्रदूषण का कोप

अमेरिकन लंग एसोसिएशन ने 2019 स्टेट ऑफ द एयर रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि अमेरिका में वायु प्रदूषण में तेजी से इजाफा हो रहा है। बीते दो वर्षों में करीब 14 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं।

 
By Vivek Mishra
Last Updated: Thursday 25 April 2019

 

सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका जैसे विकसित देश में भी वायु प्रदूषण लोगों को अपना शिकार बना रहा है। यह मिथक भी टूट रहा है कि भारत में ही बड़ी संख्या में लोग वायु प्रदूषण के शिकार हैं। अमेरिकन लंग एसोसिएशन ने 2019 स्टेट ऑफ द एयर रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि अमेरिका में भी साल-दर-साल वायु प्रदूषण से पीड़ित लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 2015 से 2017 के बीच कुल 14.1 करोड़ लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हुए। अमेरिका के वायु प्रदूषण की इस रिपोर्ट और तथ्य पर विस्तार से पहले आपको भारत और अमेरिका के बीच वायु प्रदूषण के उस रिश्ते की भी याद दिलाना जरूरी है जो 2015 में बेहद चर्चित रहा।  

आपको याद है कि 26 जनवरी, 2015 को भारतीय गणतंत्र दिवस पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत के मुख्य अतिथि बने थे। उन्होंने तीन दिन भारत में गुजारे थे। उनके जाते ही अमेरिका की मीडिया में यह खूब चर्चा का विषय बना कि भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जानलेवा वायु प्रदूषण के कारण ओबामा की जिंदगी कुल छह घंटे कम हो गई है। अब अमेरिका की मीडिया इस रिपोर्ट के बाद अपने यहां के वायु प्रदूषण को लेकर जरूर मनन-चिंतन करेगा।

अमेरिकन लंग एसोसिएशन ने 2019 स्टेट ऑफ द एयर रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि वैश्विक स्तर पर 2015 से 2017 बेहद ही गर्म वर्ष दर्ज किए गए हैं। वहीं, अमेरिका में प्रदूषित हवा से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या में भी साल-दर-साल बढ़ोत्तरी हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2016 तक 13.4 करोड़ लोग प्रदूषित हवा में सांसे लेने को मजबूर हुए जबकि 2013 से 2015 के बीच 12.5 करोड़ लोगों ने प्रदूषित हवा में सांसे लीं।

इतना ही नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में कई शहर उच्च स्तर वाले ओजोन प्रदूषण की मार वाले दिन भी झेल रहे हैं। इसे धुंध भी कहा जाता है। 2015 से 2017 के बीच अल्पअवधि वाले महीन प्रदूषण कणों में बढ़ोत्तरी भी हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह तथ्य मौजूद हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण लोगों के स्वास्थ्य का बचाव करना एक कड़ी चुनौती के तौर पर उभर रहा है। कुछ शहरों में पूरे वर्ष वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा है।

ओजोन प्रदूषण के मामले में अमेरिका में लास एंजेल्स का नाम शीर्ष पर है। इसके अलावा कैलिफोर्निया के अन्य शहर जिसमें विसालिया, बेकर्सफील्ड और फ्रेंसो-मडेरा-हैनफोर्ड क्षेत्र भी ओजोन प्रदूषण के मामले में शीर्ष सूची में शामिल है। इन क्षेत्रों में सूखे और जंगल में आग लगने की घटनाओं के कारण अल्प अवधि वाले महीन प्रदूषण कणों और ओजोन प्रदूषण में बढ़ोत्तरी हो रही है।

यदि बीते दो वर्षों की बात की जाए तो सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली हवा ने 14.1 करोड़ अमेरिकयों को अपने चपेट में भले ही ले लिया है। लेकिन यह आंकड़ा 2012 से 2014 की अवधि के लिए जारी की गई स्टेट ऑफ द एयर रिपोर्ट के मुताबिक 16.6 करोड़ वायु प्रदूषण से पीड़ित लोगों की संख्या से अब भी कम है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के विशेषज्ञ ट्रंप प्रशासन के जरिए वैश्विक तापमान के नियमों को वापस किए जाने पर चिंता भी जता रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पयार्वरण संरक्षण एजेंसी ने ऑटो और कोयला उद्योग के उत्सर्जन को लेकर नियमों में ढील भी दे दिया है।इसकी वजह से प्रदूषण के स्तर में बढ़ोत्तरी की संभावना है।

अमेरिका के लंग एसोसिएशन ने अपनी रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानव स्वास्थ्य की रक्षा कठिन बनता जा रहा है। ओजोन के प्रदूषण वाले दिनों में इजाफा होने के साथ ही जंगलों में लगने वाली आग के कारण होने वाला प्रदूषण इसकी बड़ी वजह है। एक दशक पहले कई देशों में वायु गुणवत्ता काफी बेहतर थी। तापमान बढ़ने और बारिश के समय में होने वाले बदलाव के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। इसके चलते ज्यादातर शहर ओजोन प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन ऐसी बड़ी पयार्वरणीय और लोगों के सेहत को खराब करने वाली समस्या को जन्म देने वाला है।

 भारत भी वायु प्रदूषण की प्रबल समस्या झेल रहा है। तापमान में बढ़ोत्तरी और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के कारण हर बार गर्मी के सीजन में लोगों को सतह पर पैदा होने वाले ओजोन प्रदूषण का शिकार होना पड़ता है। खासतौर से दिल्ली-एनसीआर में गर्मी के ज्यादातर दिन ओजोन प्रदूषण वाले होते हैं। वहीं, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वायु प्रदूषण कुल 76.8 फीसदी भारतीयों को प्रदूषित सांसे लेने पर मजबूर कर रहा है।

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