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50 फीसदी से ज्यादा असंगठित दुग्ध उत्पादक किसान क्रेडिट कार्ड के लाभ से वंचित

उत्तर प्रदेश में जारी शासनादेश में पंजीकृत 12 लाख से अधिक दुग्ध किसानों का क्रेडिट कार्ड 31 जुलाई तक बनाने का आदेश दिया गया है

By Vivek Mishra

On: Tuesday 28 July 2020
 

Milk farmersकोविड-19 के इस दौर में चार चरण में चले लॉकडाउन ने दुग्ध किसानों को भी बड़ा झटका दिया। सरप्लस दूध और मांग में कमी के कारण कई किसानों को सड़कों पर ही दूध फेंकना पड़ा। यह दृश्य हमारी आंखों के सामने आते रहे। वहीं, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भले ही आर्थिक पैकेज के जरिए पशुपालक एवं दुग्ध किसानों को मदद की बात कही गई हो लेकिन यह सुविधा महज कुछ किसानों तक ही सिमटने लगी है और जरूरतमंद किसान योजना का हिस्सा ही नहीं है।

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 20 दुग्ध संघ के तहत पंजीकृत 21,537 दुग्ध समितियां हैं जिनसे 1279,560 पंजीकृत दुग्ध उत्पादक जुड़े हैं। वहीं आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इन्हीं दुग्ध उत्पादकों को लक्ष्य करके किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने पर जोर दिया जा रहा है। जबकि असंगठित, भूमिविहीन और छोटे स्तर पर (छह मवेशी से कम) दुग्ध उत्पादन करने वाला बड़ा तबका इस अभियान से गायब है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2019 के मुताबिक देश में 50 फीसदी से ज्यादा दुग्ध संबंधी कामकाज असंगठित क्षेत्र के हवाले है। वहीं, अन्य 50 फीसदी में बड़ा हिस्सा निजी भागीदारी का है। इंडियन डेरी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर जीएस राझोरिया ने डाउन टू अर्थ को बताया “ समूचे दुग्ध उत्पादन, डिलेवरी जैसे पूरे कामकाज में भूमिहीन और सीमांत किसानों की यानी असंगठित क्षेत्र की भागीदारी 70 फीसदी तक है। किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएं सभी के लिए होनी चाहिए। यदि यह संगठित क्षेत्र तक नहीं पहुंच रही है तो यह पूरी तरह से गलत है।“

उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियों की स्थिति बहुत खराब है, जिसमें आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत है। यह भी समस्या है कि प्राथमिक सहकारी समितियों की पहुंच बहुत कम और सीमित डेरी किसानों तक है। आंकड़ों में देखें तो भारत में करीब सात लाख गांव है और 40 फीसदी गांवों तक ही बमुश्किल प्राथमिक सहकारी समितियां पहुंची है। ज्यादातर दुग्ध किसान ब्याज के दुष्चक्र में फंसे होते हैं जिससे न ही उनकी जीवन गुणवत्ता सुधरती है और न ही वे अपने कामकाज को विस्तार दे पाते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 8 जुलाई, 2020 को जारी अपने शासनादेश में कहा है कि जिला और ब्लॉक स्तरीय बैंक समितियां व बैंक मित्र दुग्ध संघ के तहत पंजीकृत दुग्ध किसानों को लक्ष्य करें जिनके पास किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है। वहीं, ऐसे दुग्ध किसान जिन्होंने खेत-खलिहान के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड बनवा रखा है उनकी क्रेडिट सीमा 3 लाख रुपये तक बढ़वाने का अभियान चलाएं। आत्मनिर्भर भारत के तहत प्रथम चरण का यह अभियान 31 जुलाई, 2020 तक पूरा किया जाना है।

शासनादेश में कहा है गया है कि ब्लॉक स्तर की बैंक समितियों को सक्रिय किए जाने की जरूरत है ताकि पंजीकृत किसानों तक क्रेडिट कार्ड पहुंच पाएं।

सरकार ने यह व्यवस्था सिर्फ ऐसे पंजीकृत दुग्ध किसानों तक सीमिति की है जो दुग्ध सप्लाई समितियों को करते हैं और उनके खातों में डायरेक्ट बेनिफिसियरी ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत पैसा आता है। बैंकों से कहा गया है कि दुग्ध संघ ही किसानों के डिफॉल्टर होने की दशा में कर्ज की रकम अदाएगी के लिए गारंटर बनेगा।

भारत दुनिया में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक वाला देश है और उत्तर प्रदेश भारत में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक राज्य है। भारत में 2019 में 191 मिलियन मिट्रिक टन दुग्ध उत्पादन हुआ था वहीं, गलोबल एग्रीकल्चर इन्फॉर्मेशन नेटवर्क (जीएआईएन) के मुताबिक 2020 में यह 195 मिलियन मिट्रिक टन तक पहुंच सकता है।