Sign up for our weekly newsletter

News Updates
Popular Articles
Videos
  • 'Avartansheel Kheti' changing lives with periodic, proportionate farming

  • खेती-किसानी का यह नायाब तरीका आपको निहाल कर देगा

कभी जल संसाधनों से समृद्ध थी दिल्ली

आज भले ही दिल्ली पानी के लिए तरस रही हो लेकिन मध्य काल में यहां जलस्रोतों की विस्तृत व्यवस्था थी, जिससे नगरवासियों को पानी की जरूरतों के लिए कहीं जाना न पड़े

पुरखों की बनाई बेरियों को फिर से किया जीवित, पीने को मिला मीठा पानी

ऐसा कम ही होता है कि परंपरागत जल स्त्रोतों को सरकारें हाथ लगाएं। राजस्थान सरकार ने भुला दी गई सैकड़ों साल पुरानी पारंपरिक बेरियों के जीर्णोंद्धार का जिम्मा उठाया है। अनिल अश्विनी शर्मा ने क्षेत्र के 7 जिलों में जमींदोज हो चुकी बेरियों के निर्माण कार्यों को ग्रामीणों की नजरों से देखा-परखा

अकेले ही तालाब को किया कचरा मुक्त, अब गांव वाले देते हैं साथ

बिना सरकारी मदद के बाड़मेर के भंवर लाल ने अपने गांव के तालाब की सफाई शुरू की और अब पूरा गांव उनके साथ खड़ा है 

अपना तन, मन और धन लगाकर इस सेवानिवृत्त अधिकारी ने बनवा दिए 100 तालाब  

एक रुपये में करीब 30 से 50 लीटर वर्षा जल संचयन करने वाले चेकडैम तालाब का तरीका बेहद सस्ता और टिकाऊ है । खास बात यह है कि सड़क निर्माण के दौरान किनारों पर ऐसे तालाब आसानी से बनाए जा सकते हैं।

उत्तराखंड: इस बार पहाड़ों में चश्मे भी नहीं फूटे , 500 जलस्रोत सूखने की कगार पर

कम बरसात के कारण उत्तराखंड में अब तक चश्मे नहीं फूटे हैं, वहीं पूरे राज्य में जल स्त्रोत तेजी से सूख रहे हैं 

पानी बचाने के लिए बंजर भूमि में बनाया 67 लाख लीटर क्षमता का तालाब

रेलवे का भोपाल मंडल जल संरक्षण के लिए बंजर जमीनों पर तालाब बना रहा है, जिसमें बारिश का पानी इकट्ठा किया जाएगा

जोहड़ों का जादू

राजस्थान के अलवर जिले में जोहड़ों को पुनर्जीवित कर पानी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल गई है

जल संकट का समाधान: राजस्थान से मध्यप्रदेश पहुंची पारंपरिक तकनीक

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में 14 एकड़ के कैंपस में हर साल तीन लाख लीटर वर्षा जल संग्रहित किया जाता है और साल भर इस्तेमाल किया जाता है