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जलवायु आपातकाल, कॉप-25: 2018 में भारत में हुई सर्वाधिक जलवायु संबंधित मौतें

चिंताजनक आंकड़े सामने रखने वाली यह रिपोर्ट मद्रिद में पेश की गई है। इस रिपोर्ट में लॉस एंड डैमेज व्यवस्था को लागू करने पर जोर दिया गया है

जलवायु आपातकाल, कॉप-25: विकसित देशों ने पहले ही खत्म कर दिया अपने हिस्से का कार्बन बजट

भारत और अफ्रीका को मिला है अपने हिस्से से कम कार्बन स्पेस, जबकि चीन अपने बजट से कहीं अधिक कार्बन उत्सर्जन कर रहा है

 

समुद्रों के स्तर में चिंताजनक बढ़त, 2019 में रिकॉर्ड : डब्ल्यूएमओ

लगातार पिघल रही बर्फ की चादरों और जलवायु परिवर्तनों के कारण समुद्र के स्तरों में वृद्धि दर्ज की गई है।

जलवायु आपातकाल, कॉप-25: एक डिग्री तापमान बढ़ने से पिघल गई खरबों टन बर्फ

वैश्विक जलवायु सम्मेलन (कॉप-25) में जलवायु परिवर्तन के असर का अलग-अलग आधार पर आकलन किया जा रहा है। आइए, जानते हैं कि कॉप-1 से लेकर अब तक जलवायु परिवर्तन का बर्फ और सीओ2 पर क्या असर पड़ा

अब तक का सबसे गर्म दशक साबित होगा 2011 से 2019 : डब्लयूएमओ

स्पेन की राजधानी मद्रिद में कॉप- 25 के दौरान उत्सर्जन कटौती न करने के लिए अमीर देशों पर प्रतिबद्धता न निभाने के आरोप लगाए गए हैं। पेरिस समझौते के बाद दुनिया का तापमान और अधिक बढ़ा।  

अतिशय मौसम के कारण 2019 के अंत तक 2.2 करोड़ लोग हो जाएंगे विस्थापित: डब्ल्यूएमओ

डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण 2019 में ज्यादा अतिशय मौसमी घटनाएं हुई हैं।

जलवायु आपातकाल, कॉप-25: राजनेताओं के सामने करने होंगे प्रदर्शन और जलवायु सम्मेलन

जलवायु बहुपक्षीयता कमजोर है, लेकिन सम्मेलन से जिम्मेदारी को तय करने में मदद मिलेगी

जलवायु आपातकाल, कॉप-25: दुनिया के लिए वर्ष 2020 अहम क्यों है?

इसी वर्ष दुनिया के तमाम देश ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन को कम करने के लिए दूसरे चरण के राष्ट्रीय लक्ष्य घोषित करेंगे