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पैदा हो सकता है सोयाबीन बीज का संकट, मंडी-बाजार दोनों से उदास हैं किसान

असमय और अनियमित वर्षा ने सोयाबीन पैदा करने वाले किसानों को पहले ही चोट पहुंचाई अब मंडी और बाजार में भी उन्हें निराशा हाथ लग रही है।  

By Vivek Mishra

On: Monday 05 October 2020
 

रबी फसलों की बुआई के लिए सोयाबीन के खेतों को इस बार जल्दी ही खाली किया जा रहा है। असमय और कम समय में तीव्र वर्षा की मार के कारण सोयबीन समेत दलहनी फसलों के प्रमुख राज्यों में किसानों का जबरदस्त नुकसान हुआ है। ज्यादातर किसान अगले वर्ष के लिए बीज संकट की स्थिति को भांप रहे हैं। वहीं मध्य प्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 के संशोधन से नाराज मंडी व्यापारी हड़ताल पर हैं जबकि बाजार में अन्य व्यापारी सोयाबीन का दाम इतना कम लगा रहे हैं कि किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सोयाबीन प्रमुख रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान और कर्नाटक में पैदा होती है। 

मध्य प्रदेश के सिहोर जिले में किसान प्रवीण परमार डाउन टू अर्थ से बताते हैं कि उन्होंने कुल पांच एकड़ में सोयाबीन की खेती की थी। अनियमित वर्षा ने उनकी फसलों को बर्बाद कर दिया। एक एकड़ में जहां पांच कुंतल तक सोयाबीन की उम्मीद लगाकर बैठे थे वहीं, उन्हें एक एकड़ में सिर्फ एक कुंतल सोयाबीन मिली है। इस वक्त वे खेतों को खाली करा रहे हैं। 

महाराष्ट्र के वासिम जिले में सचिन कुलकर्णी डाउन टू अर्थ से बताते हैं कि उनके जिले में सोयाबीन की बंपर पैदावार होती है लेकिन इस बार वर्षा ने फसल चौपट कर दिया है। किसान पहले ही कोरोना संक्रमण की मार से परेशान था और अब इतनी भी फसल नहीं है कि बीजों का सही से संरक्षण हो सके। इसका असर अगले वर्ष जरूर होगा। बीज काफी महंगी हो जाएंगी।

जयशंकर तेलंगाना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग में स्थापित एग्रीकल्चरल मार्केट इंटलीजेंस सेंटर ने अपने अनुमान में बताया था कि इस बार वर्षा सामान्य रहेगी और सितंबर-अक्तूबर, 2020 में प्रति कुंतल सोयाबीन का मूल्य 3400 से 3600 रुपये रहेगा। 

प्रवीण परमार बताते हैं कि इस वक्त व्यापारी 2000 रुपए से 2200 रुपये तक ही प्रति कुंतल सोयाबीन का दाम तय कर रहा है। कृषि बिल के हिसाब से मैं अपनी लागत और फायदे को जोड़ भी दूं तो सोयाबीन कौन खरीदेगा। एक एकड़ में करीब 11 हजार रुपये की लागत लगी है, जब प्रति कुंतल 3000 रुपये से अधिक दाम वाली सोयाबीन एक एकड़ में कम से कम चार कुंतल होती तो मेरी लागत निकलती लेकिन मौजूदा रेट भी बेहद कम है और सोयाबीन पांच एकड़ में महज पांच कुंतल हुई है। इन्हें बीज के लिए रखा जा सकता है। क्योंकि कुछ बीज पिछली बार खरीदी थी लेकिन वे फेल हो गईं। 

परमार कहते हैं कि किसानों की सोसाइटी सरकारी बीज मुहैया जरूर कराती है लेकिन वह 6700 रुपये के करीब मिलती है, जबकि हम सभी किसान आपस में ही बातचीत करके 4000 रुपये तक बीज की व्यवस्था कर लेते हैं। इस बार फसल हुई नहीं तो बीजों का संरक्षण भी कम होगा, ऐसे में बीज की किल्लत तो बनेगी हो सकता है महंगा बीज भी खरीदना पड़े। 

जुलाई-अगस्त के अंत तक असयम वर्षा ने सोयाबीन किसानों को खूब परेशान किया। सितंबर के शुरुआती दिनों में इंदौर की मंडी में पहुंचने वाले सोयाबीन में नमी का हिस्सा तय मानक से काफी ज्यादा था वहीं, अब जब पूरी तरह से सोयाबीन मंडी के पहूंचने का वक्त है तब मंडी के व्यापारी  आंदोलन पर हैं। 

कृषि से जुड़े आर्थिक मामलों के जानकार बताते हैं कि सामान्य वर्षा के अनुमान के कारण इस वर्ष भारत में सोयाबीन का रकबा भी बढ़ा था। 2019-20 में भारत में 113.98 लाख हेक्टेयर (281.65 हेक्टेयर) क्षेत्र में सोयाबीन बोई गई जबकि बीते वर्ष की समान अवधि में 110.71 लाख हेक्टेयर ही सोयाबीन क्षेत्र था। 

भारत दुनिया में सोयाबीन उत्पादन में चौथा स्थान रखता है। 2020-21 में दुनिया में कुल 36.44 करोड़ टन सोयाबीन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।  वहीं, सोयाबीन उत्पादन को लेकर सरकार के तीसरे एडवांस अनुमान (2019-2020) के मुताबिक 1.22 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान आंका गया था जबकि बीते वित्त वर्ष में 1.32 करोड़ टन उत्पादन हुआ था। वहीं, अब विशेषज्ञ इस अनुमान से कम उत्पादन का अंदाजा लगा रहे हैं। भारत सोयाबीन का निर्यात ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बहरीन, बांग्लादेश, बेल्जियम, मैयोटे, भूटान, ब्रुनेई, बुल्गारिया और कंबोडिया को करता है।