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बेमौसमी भारी बारिश और ओलों से किसान हुए हलकान

बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड में भी दो तीन से हो रही भारी बारिश से फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचा है

By Pushya Mitra, Manish Chandra Mishra, Varsha Singh

On: Wednesday 26 February 2020
 
झारखंड के लातेहर इलाके में ओलावृष्टि के बाद का दृश्य। फोटो: पुष्यमित्र
झारखंड के लातेहर इलाके में ओलावृष्टि के बाद का दृश्य। फोटो: पुष्यमित्र झारखंड के लातेहर इलाके में ओलावृष्टि के बाद का दृश्य। फोटो: पुष्यमित्र

एक बार फिर मौसम की मार किसानों पर पड़ी है। बेमौसमी भारी बारिश और ओलों की वजह से कई राज्यों में खड़ी रबी की फसल खराब होने के समाचार हैं। दिलचस्प बात यह है कि पूर्वी व मध्य भारत में जहां भारी वर्षा हुई, वहीं उत्तर-दक्षिण भारत में मौसम शुष्क बना हुआ है।  

बिहार-झारखंड में फसल को बड़ा नुकसान
पिछले 24 घंटे के दौरान बिहार और झारखंड के कई जिलों में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है। इससे 16 लोगों की मृत्यु हो गयी साथ ही इन दोनों राज्यों के कई जिलों में किसानों की रबी की फसल तबाह हो गयी है। कुछ जिलों में तो 20 से 40 मिलीमीटर तक बारिश हुई है। खेतों में ओले की चादर बिछ गयी है, जगह-जगह खड़ी फसल बिछी हुई नजर आ रही है।

झारखंड में तो ऐसी बारिश पिछले दो दिन से हो रही है, बिहार में यह बारिश मंगलवार को ही अचानक होने लगी। इस बारिश का असर झारखंड के तकरीबन सभी जिलों में दिखा, बिहार में गोपालगंज, भागलपुर, सारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, बेगूसराय, वैशाली, बांका और जमुई जिले इस बेमौसम बरसात से प्रभावित हुए। बिहार के पूर्वी चंपारण और झारखंड के डालटनगंज जिले में भारी ओलावृष्टि हुई। इस ओलावृष्टि की वजह से बिहार में 11 और झारखंड में 5 लोगों की मौत हो गयी।

इस वक्त इन दोनों राज्यों में किसान गेहूं, सरसों, आलू, केला, आदि फसलों की खेती करते हैं। विभिन्न जगहों से मिली खबरों के मुताबिक इन फसलों को भारी नुकसान हुआ है। जगह-जगह खड़ी फसल खेतों में बिछी नजर आ रही है। आगामी आम और लीची की फसल को भी इस बारिश से नुकसान होने की बात कही जा रही है। मौसम विज्ञानियों का कहना है अभी एक मार्च से भी ऐसी बारिश की संभावना है।

मध्यप्रदेश में गिरे ओले

पिछले एक सप्ताह में मध्यप्रदेश में अलग-अलग इलाकों में ओलावृष्टि और बारिश की घटनाएं हुई। सतना जिले में 22 फरवरी को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। जिले के मझगवां ब्लॉक में ओले का प्रकोप सबसे अधिक था। इसमें चना, मूंग, आलू और अन्य सब्जियों को फसल को काफी नुकसान हुआ। सतना के मझगवां में पटनी, पटना कला सहित कई गांवों में खेत में पानी भर जाने से भी गेंहू को छोड़कर सभी फसलों को नुकसान हुआ। 25 फरवरी को मध्यप्रदेश के चंदेरी में शाम 8 बजे अचानक तेज हवाओं के साथ सूखे ओले गिरे और फिर एक घंटे से अधिक बारिश हुई। इससे चंदेरी, ईसागढ़ के 16 गांव में 50 से 70 फीसदी फसलें बर्बाद हो गई। इसी समय रीवा जिले में भी तेज बारिश हुई जिससे किसानों की दलहनी फसल चौपट हो गई।

छत्तीसगढ़ में भी नुकसान

मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ में भी 25 फरवरी को कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ ओले गिरे हैं। सरगुजा के उदयपुर व लखनपुर क्षेत्र में आंधी व बारिश के बीच हुई 15 मिनट की ओलावृष्टि से फसल को नुकसान हुआ। इससे दोनों ब्लाॅक के करीब 17 गांवों में 552 हेक्टेयर (1380 एकड़)में लगी फसल चौपट हो गई। इससे किसानों को करीब 2.48 करोड़ का नुकसान हुआ है। कृषि विभाग के आंकलन के मुताबिक इस इलाके में लगभग 50 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की घोषणा नहीं की गई है।

उत्तराखंड में फसलों को नुकसान

उत्तराखंड में पिछले दो-तीन दिनों की बरसात में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। मंगलवार रात देहरादून समेत राज्य के कई हिस्सों में तेज़ बारिश के साथ ओले गिरे। किसानों का कहना है कि तेज़ बौछार ओलों की वजह से प्याज़ समेत अन्य मौसमी सब्जियां प्रभावित हुई हैं। ऋषिकेश के किसान विनोद जुगलान कहते हैं कि अगेती की सभी फसलों को नुकसान हुआ है। पछेती को उतना नहीं फर्क पड़ा। ओलों की बौछार से गेहूं की बालें मुड़ गई हैं। जौ-चना की फसल भी प्रभावित हुई है।

ऋषिकेश के हरिपुर-मोतीचूर क्षेत्र में प्याज की फसल ज्यादातर नष्ट हो गई है। आम-लीची के पेड़ों में भी इस समय बौर पड़ने का समय है, जो कि बारिश और ओले की वजह से झड़ गई। मौसम से निराश विनोद कहते हैं कि उन्होंने अपनी फसल का कोई बीमा नहीं कराया था। उनका कहना है कि फसल बीमा योजना के बारे में किसानों को कोई जानकारी नहीं है।