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लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों से फसल कटवाएगी यह सरकार

हरियाणा सरकार ने केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें कहा गया है कि लॉकडाउन की वजह से राहत शिविरों में रह रहे प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत फसल काटने की इजाजत दी जाए

By Shahnawaz Alam

On: Friday 17 April 2020
 
फाइल फोटो: विकास चौधरी
फाइल फोटो: विकास चौधरी फाइल फोटो: विकास चौधरी

हरियाणा के खेतों में गेहूं की फसलें पक कर तैयार है, लेकिन मजदूर नहीं मिल रहे है। लॉकडाउन की मियाद 03 मई तक बढ़ने के बाद किसानों को अब फसल काटने की चिंता सता रही है। मंडियों में खरीदने की तैयारी की जा रही है, लेकिन मजदूर नहीं होने की वजह से फसलों का उठान कैसे होगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। इसे देखते हुए हरियाणा सरकार प्रदेश के रिलीफ सेंटर में रह रहे मजदूरों से मनरेगा (महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत फसल कटवाने के लिए मजदूरों की व्‍यवस्‍था करने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। प्रदेश के 467 रिलीफ सेंटर में करीब 10 हजार प्रवासी मजदूर है। न्‍यूनतम मजदूरी दर बढ़ाकर 309 रुपये करने जा रही है। इससे सरकार को उम्‍मीद है कि मनरेगा के तहत प्रवासी मजदूरों को काम मिल जाएगा और किसानों की समस्‍या भी हल हो जाएगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र को पत्र भी भेजा है।

रेवाड़ी के टप्‍पाखोड़ी गांव में किसान ओम सिंह ने 50 एकड़ में अच्‍छी पैदावार लेने के लिए पीबी-डब्‍ल्‍यू 343 नस्‍ल गेहूं की बिजाई अक्‍टूबर महीने में की थी। मार्च तक फसल पककर तैयार हो गई थी। काटने की तैयारी थी, लेकिन तभी देश में लॉकडाउन हो गया। इस बार शुरुआती ओलावृष्टि के बाद सूखी गेहूं की बालियां सुनहरी की जगह काली पड़ने लगी है। उनके पास फसल काटने के लिए न तो मशीन है और न ही मजदूर है। अब फसल झड़ने का खतरा सताने लगा है। दक्षिण हरियाणा के 250 से अधि‍क किसान इस स्थिति का सामना कर रहे है।

ओम सिंह कहते है, अगेती फसल लगाया था, ताकि मंडी खुलते साथ बिक जाए और फिर खरीफ की तैयारी की जाए। लॉकडाउन ने सारी प्‍लानिंग पर पानी फेर दिया। फसल काली होने से प्रति एकड़ उत्‍पादन भी कम होगा। अब तेज हवा चलने पर बालियां टूटने लगी है। ओम सिंह का दावा है, हर साल उनके यहां 70-80 मजदूर काम करते थे, लेकिन इस बार मजदूर ढूंढने से नहीं मिल रहे है। पुराने मजदूरों को फोन करने पर पता चलता है वह अपने गांव लौट चुके है।

अखिल भारतीय किसान यूनियन के अध्‍यक्ष गुरणाम सिंह चढूणी कहते है, यमुनानगर, करनाल, हिसार, पानीपत ऐसे जिले है, जहां प्रवासी मजदूरों की मदद से ही गेहूं की कटाई होती है। कटाई के बाद भूसा भरने, मंडियों में पैकिंग तथा पल्‍लेदारी करने, गेहूं की झराई और ढुलाई का काम प्रवासी मजदूर करते है।

आमतौर पर हरियाणा में अधिकांश कंबाइन हार्वेस्‍टर पंजाब और मध्‍य प्रदेश से आती है। लॉकडाउन की वजह से कंबाइन हार्वेस्‍टर मशीनें नहीं आ रही है। हरियाणा सरकार का दावा है कि प्रदेश में करीब 4500 हार्वेस्‍टर पहुंच चुके है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्‍यक्ष गुणी प्रकाश ठाकुर कहते है, हर गांव में दो से तीन हार्वेस्‍टर चाहिए होता है। बंद के कारण मजदूर नहीं मिलने से गेहूं की कटाई का कोई जरिया नहीं सूझ रहा है। पंजाब से सटे इलाके में कुछ मशीनें पहुंची है, लेकिन वहां चलाने वाला कोई नहीं मिल रहा है।अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्‍यक्ष रामकुमार कहते है, हर साल यहां दो लाख से अधिक मजदूर खेतों में काम करने के लिए दूसरे प्रदेशों से आते थे। लॉकडाउन की वजह से उनका रोजगार छीनने के साथ किसानों को भी परेशानी हो रही है। मनरेगा के तहत अगर काम मिल जाए, तो सरपंचों की देखरेख में नियमों का पालन करते हुए काम कराया जा सकता है