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म्यूल हिरण पर जलवायु परिवर्तन का खतरनाक प्रभाव: अध्ययन

म्यूल हिरण पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि सूखे के कारण इन हिरणों को चारा नहीं मिल पा रहा है

By Dayanidhi

On: Monday 15 June 2020
 
Photo: Flickr
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आज जलवायु परिवर्तन की वजह से पूरी दुनिया में प्रवासी जीवों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहे है। इन पर पड़ने वाले प्रभाव का आंकलन के लिए शोधकर्ताओं ने उत्तरी अमेरिका और यूरोप के प्रवासी म्यूल हिरण को चुना है।

जब सूखे की वजह से हरे-भरे निवास स्थान बदल जाते हैं तो म्यूल हिरण भी उस जगह से पलायन कर जाते हैं। जिस पर हिरण भरोसा करते थे अब यह नाटकीय रूप से हर साल बदल रहा है, जिन जगहों से इनको भोजन मिलता था, वे जगहें अब कम समय के लिए हरे-भरे रहते हैं।

यह व्योमिंग विश्वविद्यालय के अध्ययन की एक नई और मुख्य खोज है, जिससे पता चलता है कि पलायन से म्यूल हिरण और अन्य प्रवासी शाकाहारी जीवों के लिए होने वाले लाभों के कम होने के आसार हैं, क्योंकि मौजूदा जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा अब सामान्य सी बात हो गई है।

सूखा प्रमुख खाद्य संसाधनों की उपलब्धता को कम कर रहा है। यह वसंत की हरी-भरी अवधि को भी छोटा करके बदल रहा है।

इस अध्ययन का नेतृत्व व्योमिंग विश्वविद्यालय में व्योमिंग कोऑपरेटिव फिश एंड वाइल्डलाइफ रिसर्च यूनिट के स्नातक, प्रमुख शोधकर्ता एलेन ऐकेंस उनके साथी शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था।

यह अध्ययन ग्लोबल चेंज बायोलॉजी में प्रकाशित किया गया है, जो वैश्विक परिवर्तन के जैविक प्रभावों का दस्तावेजीकरण करने वाली एक प्रमुख पत्रिका है।

ऐकेन्स कहते हैं इस शोध से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन खाद्य संसाधनों के मुख्य वितरण को उस समय को कम करके बदल सकता है जब अधिकतम चारा उपलब्ध होता है, जो प्रवासन के लाभ को कम करता है। यह काम प्रवासी म्यूल हिरण के लिए उभरते हुए खतरे और कई अन्य प्रवासी प्रजातियों को भी खतरे की आशंका को उजागर करता है।

ऐकेंस ने व्योमिंग की सीमा के 19 साल के सूखे के समय की, म्यूल हिरणों के प्रवास के जीपीएस के आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि एक अधिक वर्षा वाले साल में, म्यूल हिरण की वसंत में उगे नए अंकुरित पौधों को 120 दिनों तक चरते हैं। यह पूरे चार महीने है जब बर्फ पिघल रही होती है, और मिट्टी इससे तर हो जाती है जिससे इसमें चिपचिपे बैंगनी गेरियम जैसे चरने वाली वनस्पतियां पैदा हो जाती है।

हिरन को पौधों के इस हरे भरे वातावरण का लाभ पूरे साल भर भोजन/चारे के रूप में मिलता है, जो कि अधिक वर्षा वाले सालों में, कम ऊंचाई वाली पर्वतमाला जहां सर्दियां कम होती है, गर्मियां ऊंचे पहाड़ों में एक क्रमबद्ध तरीके से बढ़ती है।

ऐकेन्स के पिछले काम से पता चला है कि म्यूल हिरणों में हरियाली तक पहुंचने की विशेषता होती है। वे हमेशा सही समय, सही जगह पर पहुंच जाते है जहां वे हरे-भरे पौधों का चारे के रूप में उपभोग करते हैं, जो कि प्रोटीन युक्त और पचाने में आसान होते हैं। 

हरे-भरे चारे तक पहुंच म्यूल हिरण को कठोर सर्दियों से उबरने और समाप्त हो चुकी शरीर की वसा को फिर से प्राप्त करने का सबसे अच्छा मौका प्रदान करता है। उन्हें युवा रहने और आने वाले सर्दियों में जीवित रहने के लिए पर्याप्त वसा की आवश्यकता होती है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि सूखे वर्षों में, हरा-भरा क्षेत्र लगभग आधे, 60 दिन हो जाता है। संक्षेप में कहा जाय कि अच्छा समय लंबे समय तक नहीं रहता है। हालांकि हिरण इन परिवर्तित परिस्थितियों को आसानी से समझ सकते हैं, उनके पास केवल आधा समय होता है हरे-भरे पौधों को चारे रूप में खाने का, जो कि केवल दो महीने ही होता है।

एक बात जो सूखे के वर्षों में नहीं बदली, वह थी हिरणों का पौधों की खोज करने और उच्चतम पोषण वाले पौधों के पता लगाने की उल्लेखनीय क्षमता का होना।

हालांकि शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ पलायन वाले मार्ग सूखे प्रभावों से बचे हुए थे। शायद वे उत्तर की ओर ढलान वाले छायादार मार्ग थे - उन्होंने पाया कि अब ऐसे मार्ग और मौजूद नहीं हैं। इसके बजाय, सबसे अच्छे प्रवास मार्ग जो सबसे प्रचुर मात्रा में चारा पैदा करते थे और बारिश वाले वर्षों में सबसे लंबे समय तक हरे-भरे रहते थे, ये क्षेत्र सूखे से सबसे अधिक प्रभावित थे।

कॉफमैन कहते हैं कि इस अध्ययन से एक अल्प विकसित तंत्र का पता चला है, जिसमें जलवायु परिवर्तन के कारण हरियाली में बदलाव हो रहा है और पलायन करने वाले जीवों के लिए प्रवासन कम लाभदायक बना रहा है। हम पलायन करने वाले पशुओं के लिए एक नए खतरे की पहचान कर रहे हैं, जिसमें जलवायु परिवर्तन के खतरे जारी रहने की आशंका है।