Sign up for our weekly newsletter

जलवायु परिवर्तन से किसानों के बीच बढ़ सकते हैं हिंसक घटनाएं: स्टडी

जलवायु परिवर्तन का केवल यह मतलब नहीं है कि आने वाले दिनों में परिस्थितियां कठोर हो जाएंगी, बल्कि इस वजह से लोगों के बीच हिंसक झड़पें भी होंगी

By Dayanidhi

On: Tuesday 04 February 2020
 
Photo: Aparna Pallavi
Photo: Aparna Pallavi Photo: Aparna Pallavi

नोट्रे डेम विश्वविद्यालय के नए शोध में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से यदि खेती में दिक्कतें पैदा होंगी तो इस वजह से किसानों के बीच हिंसक संघर्ष तक हो सकते हैं। प्रोसडिंग्स ऑफ़ द नेशनल अकादमी ऑफ़ साइंसेज पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से बाढ़, सूखे जैसे हालात बढ़ेंगे, जिससे किसानों की आमदनी प्रभावित होगी, इससे उनके बीच झड़पें तक हो सकती हैं। 

अमेरिका के नोट्रे डेम विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर और प्रमुख अध्ययनकर्ता मिसेले मुलर-इटेन ने कहा कि वैज्ञानिकों ने इस बात पर सर्वसम्मति जताई है कि जलवायु परिवर्तन से दुनिया के कई क्षेत्रों में अधिक सूखा पड़ेगा। जो ऐसे हालात पैदा कर सकता है कि उससे समुदायों के बीच झगड़े तक हो सकते हैं। 

अध्ययनकर्ता मुलर-इटेन और उनकी टीम ने शैलीगत सैद्धांतिक मॉडल पर विचार किया कि वर्षा में होने वाले बदलाव किसानों के दो समूह कैसे प्रभावित होते हैं। पानी की कमी के कारण आपस संघर्ष बढ़ता है। इससे किसानों की लागत बढ़ती है और पैदावार कम होती है, जो आपस में झगड़ों को जन्म देता है।

नोट्रे डेम के पर्यावरण परिवर्तन पहल के सहयोगी निदेशक और सह-अध्ययनकर्ता डायगो बोल्स्टर ने कहा कि कई लोगों को लगता है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव का मतलब कठोर परिस्थितियों से है] जिससे लागातार जुझना, लड़ना पडे़गा। लेकिन जलवायु परिवर्तन का मतलब कुल मिलाकर संसाधनों की कमी से भी हैं और यह संसाधनों को हासिल करने के लिए लोगों को जुझने के लिए मजबूर करती हैं। उदाहरण के लिए, बारिश न होने के कारण किसानों की पैदावार प्रभावित होगी तो अधिक बारिश की वजह से बाढ़ आ सकती है और फसल को नुकसान हो सकता है। इससे किसानों के परिवारों को खाने पीने की कमी हो सकती है। 

यह अध्ययन इस बात पर एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है कि जलवायु परिवर्तन संघर्ष का एक महत्वपूर्ण कारण है। इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि उम्मीदें और अनुकूलन (ऐडप्टैशन) अनुमानित परिणामों को बदल सकते हैं।

मुलर-इटेन ने कहा कि यहां ऐसे कई तंत्र हैं जो पानी की उपलब्धता और संघर्ष के बीच पिछले संबंध को समझा सकते हैं। राजनेताओं के लिए केवल यह जानना पर्याप्त नहीं है कि पानी और संघर्ष का संबंध है। प्रभावी नीति बनाने के लिए उन्हें इनके बीच के संबंध को समझने की आवश्यकता है। हमारे पूर्वानुमान संभावित स्पष्टीकरणों को सुलझाने का एक तरीका प्रदान करती हैं।