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मनरेगा: ग्रामीणों ने बिछा दिया गांव में नालियों का जाल

ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत गांव से बाहर जाकर गड्ढे खोदने की बजाय अपने गांव में नालियां खोदने की मांग की

By Anil Ashwani Sharma

On: Monday 03 August 2020
 
mgnrega
राजस्थान के भीलवाड़ा के लझोड़ा गांव में मनरेगा के तहत बनी नालियां। फोटो: अनिल अश्वनी शर्मा राजस्थान के भीलवाड़ा के लझोड़ा गांव में मनरेगा के तहत बनी नालियां। फोटो: अनिल अश्वनी शर्मा

राजस्थान के भीलवाड़ा के लझोड़ा गांव के लोग इस बात पर अपनी पीठ थपथपा सकते हैं कि जिले में अब तक नालियों का जाल तो बिछ नहीं पाया है लेकिन अब उनके गांव में पूरी तरह से अंडरग्राउंड नालियों का जाल बिछ चुका है।

इसका सबसे अच्छा प्रभाव हुआ है कि गांव में दिनप्रतिदिन होने वाली लड़ाइयों से मुक्ति मिली है। नहीं तो आए दिन इस बात के लिए लाठी-डंडे और बकझक होती रहते थी कि तुम्हारे घर का गंदा पानी मेरे दरवाजे के सामने आ रहा है आदि। लेकिन मुसीबत ये थी कि यह गंदा पानी आखिर जाता ही कहां, जब उसके निकासी का कोई साधन नहीं है तो वह तो जमीन के ऊपर ही बहेगा।

मार्च में जब लॉकडाउन शुरू हुआ, तब गांव में शुरू में तो जैसे-तैसे कामकाज चला, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतने लगे तब लोगों के सामने रोजीरोटी की समस्या आन पड़ी। तभी अप्रैल के आखिरी में राज्य सरकार की मनरेगा योजना शुरू हुई। इसके शुरू होने के पूर्व ही सभी ग्रामीणों ने स्थानीय मनरेगा अधिकारी से गुहार लगाई कि हम कोई दूरदराज इलाकों में गड्ढा खोदने नहीं जाएंगे, बल्कि इस योजना के तहत हमारे गांव में नाली बन जाए तो इससे बेहतर कुछ और नहीं होगा। आखिरकार अधिकारी ने गामीणों की बात मान ली और गांव में शुरू हुआ अंडरग्राउंड नालियों का निर्माण।  

गांव के आबादी लगभग 5,500 है और 11 सौ परिवार हैं। यहां लॉकडाउन के दौरान गांव में लगभग साढ़े चार सौ प्रवासी लोग सूरत, अहमदाबाद और मुंबई से इस गांव में आए थे। इनमें अब तक लगभग दो सौ वापस चले गए हैं, लेकिन ढाई सौ लोग अब भी गांव ही हैं। नाली निर्माण के दौरान इन प्रवासियों में से दो सौ लोगों को भी काम मिला और बाकियों ने अपने खेतों में काम किया।

गांव में सीवरेज का जाल बिछाने में गांव के कई बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं और तकनीकी पहलुओं के लिए सरकारी अधिकारी अधिकारियों ने मदद की। इस संबंध में गांव के समाजसेवी ताराचंद बताते हैं कि हम अक्सर टीवी पर या अखबार में ही सुनते आए थे कि फला गांव में नाली बन गई है या जिले में बन रही है लेकिन कभी हमने अपने गांव के बारे में नहीं सोचा था।

आखिर रोज-रोज की लड़ाई और गंदे पानी से निजात पाने के लिए हम सब ने इसे पूरा करने की ठानी। वह बताते हैं कि अब हमने नाली का पानी जो कि खेतों में जाता था, इसके लिए एक बडा गड्ढा तैयार किया है और उसमें जाने वाले गंदे पानी को ट्रीट करके खेतों में भी उपयोग करने के बारे में जानकारी एकत्रित कर रहे हैं।

वह बताते हैं कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत यह काम होता है अभी हम जानकारी ले रहे हैं। गांव के एक अन्य युवा ग्रामीण रामजनेऊ बताते हैं कि इस नाली के निर्माण से मच्छरों, गंदगी व बदबू से निजात मिल गई है। इनसे होने वाली बीमारी भी नहीं होगी। अब हम अपने घर के बाहर अराम से उठ-बैठ सकते हैं। नहीं तो हर समय हमें अपने घरों का दरवाजे बंद रखना पड़ता था।

वह कहते हैं कि एक तो यह गांव है, ऐसे में यहां कोई नगरपालिका तो है नहीं कि यहां सफाई कर्मी मिले नाली आदि सफाई के लिए। ऐसे में गांव का हर बंदा अपने हिस्से की नाली साफ अवश्य करता है। इससे हमारे यहां की नाली साफ बनी रहती है। 

गांव में सीवरेज के संबंध में जब इस योजना से जुड़े सरकारी अधिकारी देवराज से पूछा तो उन्होंने कहा कि हमने बस गांव वालों को योजना के तहत आने वाला पैसा दिया ओर समय-समय पर तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया। इसके अलावा सभी काम ग्रामीणों ने अपने बिना पर ही किया। उनके साथ ही दूसरे अधिकारी रामगोपाल कहते हैं कि योजना का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो मनरेगा एक ऐसी योजना है जिससे ऐसे ऐसे स्थायी विकास कार्य संभव है जो कि एक लंबे समय तक ग्रामीणों के लिए उपयोगी साबित होते हैं।