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मनरेगा के साथ-साथ खेती में जुटे प्रवासी

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गांवों से वही प्रवासी शहरों में लौटना चाहते हैं, जिनके पास खेती के लिए जमीन नहीं है

By Anil Ashwani Sharma

On: Wednesday 05 August 2020
 
फोटो: अनिल अश्विनी शर्मा
फोटो: अनिल अश्विनी शर्मा फोटो: अनिल अश्विनी शर्मा

भीलवाड़ा के सरेरी और लाछोड़ा ऐसे गांव हैं जहां आसपास के गांवों के मुकाबले अधिक प्रवासी आए। सरेरी में 455 और लछोड़ा में 400 प्रवासी आए। इन दोनों गांवों में इन प्रवासियों को मनरेगा के तहत मिला। जैसे सरेरी में दो सौ प्रवासी को और लछोड़ा में 250 प्रवासियों को काम मिला। वहीं बचे हुए प्रवासियों ने अपने खेतों को सुधारने का काम किया और अब उसमें वे खेती करने की तैयारी कर रहे हैं।
 
हालांकि इन प्रवासियों में से जहां तक लौटने की बात है। इस संबंध में लछोड़ा गांव के सामाजिक कार्यकर्ता ताराचंद कहते हैं कि यहां से लौटने वाले प्रवासियों का प्रतिशत अभी बमुश्किल से पांच से दस प्रतिशत है। लौटने वाले वे लोग हैं जिनका गांव में बहुत अधिक खेतीबाड़ी नहीं है। भीलवाड़ा में अकेले एक ही गांव में ऐसा काम नहीं हो रहा है। इस प्रकार से दो दर्जन से अधिक गांव होंगे, जहां ऐसे काम हो रहे जिसमें हर हाल में भविष्य में रोजगार की संभावना बनी हुई है।
 
ग्राम पंचायत रूपपुरा में अप्रैल से जुलाई तक 6,730 लोगों को काम मिला है। जबकि गत वर्ष 2019-20 में 17,000 ग्रामीणों को काम मिला। इस प्रकार देखा जाए तो लॉकडाउन के शुरू होने के चार माह में ही लगभग साढ़े छह हजार से अधिक लोगों को काम मिल चुका है जबकि पिछले पूरे साल भर में 17 हजार ग्रामीणों को मिला।
 
यही नहीं 2020-21 में इस ग्राम पंचायत में पहले चार माह 2,092 ग्रामीणों ने काम की मांग की और इस दौरान 1957 लोगों को काम मनरेगा के तहत मिला। यदि इसे गत वर्ष से तुलना करें तो 2019-20 में पूरे साल भर में 2,377 ग्रामीणों ने काम की मांग की थी और उनमें से 2,219 को काम मिला। इसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इस वर्ष जितने लोगों ने पहले चार माह में काम की मांग की, उतनी गतवर्ष लगभग पूरे साल भर में काम की मांग थी। यह बताता है कि लॉकडाउन के समय अधिक से अधिक लोगों को मनरेगा के तहत मिला।
 
भीलवाड़ा राज्य में मरनेगा में काम देने के मामले में पहले स्थान पर है। 2020-21 के पहले चार माह में जिले में 4,98,908 लोगों ने काम की मांग की और इनमें से 4,28,420 लोगों को 21 जुलाई 20201 तक मनरेगा के तहत काम मिल चुका था। यदि इसकी तुलना गतवर्ष 2019-20 से करें तब पूरे सालभर में लोगों ने 5,91,499 लोगों ने काम की मांग की थी और इनमें से 5,42,813 लोगों को काम मिला था। जिले में मनरेगा के तहत गतवर्ष के मुकाबले इस वर्ष के पहले चार माह में ही इतनी मांग काम थी, जितने गतवर्ष पूरे साल भर रही।