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कोरोना लॉकडाउन: सरकारी स्कूलों के बच्चे कैसे करेंगे पढ़ाई?

उत्‍तर प्रदेश में लॉकडाउन की वजह से स्‍कूल बंद हैं। इसका असर गरीब तबके से जुडे बच्‍चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है

By Ranvijay Singh

On: Wednesday 20 May 2020
 
लॉकडाउन की वजह से बंद पड़ा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का एक प्राथमिक स्कूल। फोटो: रणविजय सिंह
लॉकडाउन की वजह से बंद पड़ा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का एक प्राथमिक स्कूल। फोटो: रणविजय सिंह लॉकडाउन की वजह से बंद पड़ा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का एक प्राथमिक स्कूल। फोटो: रणविजय सिंह

इन दिनों आर्यन (7 साल) पूरा दिन अपने गांव के दोस्‍तों के साथ खेलता रहता है, क्‍योंकि स्‍कूल कोरोना संक्रमण की वजह से बंद हैं। आर्यन उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के पानापार गांव का रहने वाला है और गांव के ही प्राइमरी स्‍कूल में पढ़ता है। स्‍कूल बंद होने के बाद से ही आर्यन की पढ़ाई छूट गई है।

''दिन भर गांव में घूमता है, स्‍कूल चल नहीं रहा तो क्‍या करे। हम लोग भी अनपढ़ हैं तो पढ़ा नहीं सकते। अब पढ़ाई बेकार हो रही है, देखें कब तक चलता है यह सब'', आर्यन की मां कहती हैं।  

कोरोना संक्रमण की वजह से स्‍कूलों को बंद कर दिया गया है। स्‍कूल बंद होने से बच्‍चों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर हुआ है। प्राइवेट स्‍कूलों में तो ऑनलाइन क्‍लास से बच्‍चे पढ़ ले रहे हैं, लेकिन सरकारी स्‍कूलों में पढ़ने वाले गरीब तबके से जुड़े बच्‍चे शिक्षा से वंचित हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वर्चुअल क्‍लास चलाने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी तौर पर यह कारगर साबित होती नहीं दिखती।

वर्चुअल क्‍लास कितनी कारगर हैं इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि बाराबंकी के अखईपुर गांव के प्राइमरी स्‍कूल में 151 बच्‍चों का रजिस्‍ट्रेशन है, लेकिन वर्चुअल क्‍लास के वॉट्सएप ग्रुप से मात्र 10 बच्‍चे जुड़े हैं। इन स्‍थ‍ित‍ि पर अखईपुर गांव के प्राइमरी स्‍कूल के हेडमास्‍टर जगदीश सिंह कहते हैं, गांव में सबसे पास मोबाइल नहीं है, यह सबसे बड़ी समस्‍या है। दूसरा यह कि बच्‍चों के पास खुद का मोबाइल नहीं होता, उनके घर में एक मोबाइल है जिसे लेकर उनके प‍िता खेत में चले गए, ऐसे पढ़ाई कैसे हो पाएगी?''

जगदीश सिंह कहते हैं, ''लॉकडाउन ने बच्‍चों की पढ़ाई पर बहुत असर किया है। हमने ज‍िन बच्‍चों पर मेहनत की थी वो भी अब जीरो हो जाएगा। क्‍लास एक से तीन के बच्‍चे तो पढ़ना और लिखना भी भूल जाएंगे, जिनपर हमें फिर से मेहनत करनी होगी।''

ऐसा नहीं कि यह किसी एक स्‍कूल या एक गांव की बात है। प्रदेश में ज्यादातर प्राथमिक और उच्‍च प्राथमिक स्‍तर पर चल रहे स्‍कूलों का हाल ऐसा ही है। उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक और उच्‍च प्राथमिक विद्यालयों में करीब 1.8 करोड़ बच्‍चे पढ़ते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि लॉकडाउन की वजह से प्रदेश में कितनी बड़ी संख्‍या में बच्‍चों की पढ़ाई प्रभाव‍ित हुई है।

लॉकडाउन का असर सिद्धार्थनगर जिले के हसुड़ी अवसानपुर गांव के सरकारी स्‍कूल के बच्‍चों पर भी देखने को मिल रहा है। इस गांव के प्रधान दिलीप त्रिपाठी बताते हैं, ''बच्‍चों की पढ़ाई पर असर न हो, इसके ल‍िए एक वॉट्सएप ग्रुप बनाया गया, इसमें एक ही बच्‍ची जुड़ पाई। इसके अलावा जो अभ‍िभावक जुड़े हैं, वो वॉट्सएप पर आई जानकारियां इस ग्रुप पर साझा करते हैं, कई लोग गुड मॉर्निंग और गुड नाइट का मैसेज करते थे, इन लोगों को बाहर करना पड़ा। इस व्‍यवस्‍था से बच्‍चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही।''

हालांकि यूपी सरकार की ओर से यूट्यूब और मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला के माध्‍यम से बच्‍चों को पढ़ाई के लिए ऑनलाइन सामग्री उपलब्‍ध कराई जा रही है, लेकिन इन सामग्र‍ियों तक बच्‍चों की पहुंच तभी संभव है जब उनके पास इन तक पहुंचने का माध्‍यम हो। फिलहाल कोरोना संक्रमण के दौर में सरकारी स्‍कूलों में पढ़ने वाले गरीब तबके से जुड़े बच्‍चों के सामने पढ़ाई एक चुनौती बनकर उभरी है।