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संसद में आज: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के तहत 45 फीसदी धनराशि का नहीं हुआ उपयोग

संसद के दोनों सदनों में पूछे गए कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब यहां पढ़ें-

By Madhumita Paul, Dayanidhi

On: Tuesday 22 September 2020
 

 

राज्यसभा में महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ज़ुबिन ईरानी ने कहा कि समाज में बालिकाओं के प्रति लोगों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आया है।

उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात में (2014-15) के दौरान 918 से (2019-20) में 934 अर्थात 16 अंकों का सुधार हुआ है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीएमपीपी) के तहत आवंटित धन का सही से उपयोग नहीं हुआ है।

मंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2019-20 में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीएमपीपी) के लिए आवंटित लगभग 45 फीसदी धन का उपयोग नहीं हुआ।

राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत आवंटित धन का उपयोग नहीं हुआ

महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ज़ुबिन ईरानी द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी में बताया कि वित्त वर्ष 2019-20 में पोषण अभियान (जिसे पहले राष्ट्रीय पोषण मिशन के नाम से जाना जाता था) के तहत आवंटित 3400 करोड़ रुपये में से 1521 करोड़ का अब तक उपयोग नहीं किया गया है।

डिजिटल साक्षरता मिशन का कार्यान्वयन

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने राज्यसभा में बताया कि 2.15 करोड़ उम्मीदवारों को "प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल अभियान (पीएमजीडीआईएसएचए)" योजना के तहत प्रमाणित किया गया है। जिसे 2017 में लागू किया गया था।

भारत सरकार ने 6 करोड़ ग्रामीण परिवारों (हर घर से एक व्यक्ति) को कवर करके ग्रामीण भारत में डिजिटल साक्षरता की शुरुआत करने के लिए इस योजना को मंजूरी दी।

मिड-डे मील के के अंतर्गत भोजन करने वाले बच्चों के लिए लॉकडाउन के दौरान पोषण की कमी

शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने राज्यसभा में बताया कि मौजूदा परिस्थितियों (कोविड-19) के दौरना गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना संभव नहीं था, इसलिए राज्य सरकारों को खाद्य सुरक्षा भत्ता (एफएसए) प्रदान करने की सलाह दी गई थी। जिसमें खाद्यान्न शामिल थे, सभी पात्र बच्चों को खाना पकाने की लागत के बराबर दालें, तेल आदि तब तक दिया जाएगा जब तक उनके स्कूल कोविड-19 के कारण बंद रहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कोविड-19 से उत्पन्न स्थिति का सामना करने के लिए सभी एहतियाती उपायों का पालन करने की सलाह के साथ-साथ उपरोक्त को जारी रखने को कहा गया।

आदिवासियों में साक्षरता दर

राज्यसभा में जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2018-19 की रिपोर्ट में अनुसूचित जनजाति (एसटी) की साक्षरता दर में 69.1 फीसदी की तुलना में 78.4 फीसदी का सुधार हुआ है। 2017-18 में साक्षरता दर 67.7 फीसदी की तुलना में अब कुल मिलाकर 76.9 फीसदी है।

मुंडा ने यह भी कहा कि मंत्रालय 2019-20 से एक अलग केंद्रीय क्षेत्रीय योजना 'एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय’(ईएमआरएस) लागू कर रहा है।

कोयला बिजली संयंत्र

भारत में कोयले पर आधारित बिजली संयंत्रों से बिजली उत्पादन पिछले साल यानि वित्तीय वर्ष 2019-20 के मुकाबले बढ़ा है। आर.के. सिंह, ऊर्जा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री ने लोकसभा में बताया। सिंह ने कहा इस साल कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से बिजली उत्पादन में कोविड -19 के प्रभाव के कारण कमी आई है।

देश में मलिन बस्तियों का डेटा-बेस तैयार करने की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है

आवास और शहरी मामलों के मंत्री ने लोकसभा में बताया कि 2001 और 2011 की जनगणना के अनुसार, दिल्ली और मुंबई शहरों में झुग्गी आबादी कम हो गई है। लेकिन चेन्नई में, झुग्गी आबादी में वृद्धि हुई है।

एक प्रश्न के जवाब में मंत्रालय ने संसद में बताया कि सरकार ने देश में मलिन बस्तियों का डेटा-बेस तैयार करने और इस तरह के सर्वेक्षण करने में राज्य सरकारों की सहायता करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। देश में मलिन बस्तियों के डेटा-बेस को केंद्र सरकार द्वारा भारत की जनगणना के माध्यम से जमा किया जाता है।