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झारखंडः मजबूर मजदूर लौट रहे हैं गांव, निगरानी की नहीं है कोई व्यवस्था

झारखंड में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से लोग लौट रहे हैं। ये वही लोग हैं जो दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात जैसे राज्यों में मजदूरी करने गए थे

On: Wednesday 25 March 2020
 
रांची रेलवे स्टेशन पर लौट रहे प्रवासी मजदूर। फोटो: आनंद दत्ता
रांची रेलवे स्टेशन पर लौट रहे प्रवासी मजदूर। फोटो: आनंद दत्ता रांची रेलवे स्टेशन पर लौट रहे प्रवासी मजदूर। फोटो: आनंद दत्ता

आनंद दत्त

हजारीबाग के महेंद्र राम हरियाणा में एक निजी कंपनी में काम करते थे। कंपनी की तरफ से 750 रुपए देकर घर जाने को कहा, जबकि उनकी तनख्वाह के 9000 रुपए उन्हें मिलने थे। दिल्ली से हजारीबाग, धनबाद या फिर रांची का ट्रेन न मिलने की वजह से वह पटना चले गए। वहां से किसी तरह रांची पहुंचे।

इस दौरान उनके जेब से 90 रुपए बचे। अन्य दिनों में रांची से हजारीबाग 100 रुपए किराया है। आज 250 रुपए लिए जा रहे हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा क्या करें। ध्यान रहे, यहां उन्हें और उनके जैसे और 30 से अधिक लोगों को किसी तरह की जांच का सामना नहीं करना पड़ा है।

बंगलुरू से लौटे पप्पू ने बताया कि वह वहां सेटरिंग का काम करते थे. वहां कंपनी बंद हो गई। 400 रुपए हर दिन मजदूरी मिलथा था. छोड़ते वक्त चार लोगों को मिलाकर कुल 6000 रुपए मिले थे। घर भागलपुर है, लेकिन वह बीते चार दिनों से रांची में भटक रहे हैं। कभी स्टेशन परिसर में तो कभी बाहर। चना खाकर दिन बिता रहे हैं। घर पहुंचने के लिए घरवालों से ही पैसे मंगा रहे हैं।

झारखंड के मजदूर बड़ी संख्या में केरल और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में काम करने जाते हैं। केरल के 16 मजदूरों का एक जत्था सोमवार को स्टेशन पहुंचा था। एक युवक ने बताया कि यहां थर्मामीटर से जांच की गई। साथ ही हाथ पर ठप्पा मार दिया गया। यानी बिना उचित्त जांच के ये झारखंड के गावों में पहुंच गए हैं। केरल से ट्रेन में तीन दिनों तक बिना खाए-पिए पहुंचे हैं। देर शाम तक चार हजार से अधिक लोग दूसरे राज्यों से पहुंचे हैं।

झारखंड में सरकार ने 31 मार्च तक लॉकडाउन की घोषणा कर दी है. राज्य से लगनेवाली सीमाएं सील कर दी गई हैं। दूसरे राज्यों से बसें न तो आ रही हैं, न जा रही हैं। आधे से अधिक ट्रेनें बंद कर दी गई हैं। बावजूद इसके बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से लोग लौट रहे हैं। ये वही लोग हैं जो दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात जैसे राज्यों में मजदूरी करने गए थे।

रांची सहित अन्य प्रमुख जगहों पर पहुंचने के बाद इन्हें एक और दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, वह है स्थानीय स्तर पर सवारी गाड़ी का न मिलना। ऐसे में वह कभी तीन तो कभी पांच किलोमीटर तक पैदल चल कर बस स्टैंड तो ऑटो स्टैंड पहुंच रहे हैं।

जब ये मजदूर गांव पहुंचते हैं तो आसपास के लोग तुरंत इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को देते हैं। एक बार फिर इन्हें कई सवालों और तथाकथित जांच के दौर से गुजरना पड़ता है। वहीं देवघर जिले के कारू सोरेन आठ दिन पहले चेन्नई से लौटे थे। लौटने के बाद गंभीर रूप से बीमार हुए और सोमवार को उनकी मौत हो गई। अब जाकर जिला प्रशासन ने उनका ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजा है।

इधर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए कमेटी बनाने की बात कही है। साथ ही केंद्रीय श्रम मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखर मनरेगा में रोजगार न पानेवाले मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता देने के अपील की है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि राज्य के बाहर फंसे झारखंडियों की मदद के लिए उन राज्यों के सीएम से बात की जाएगी। राज्य सरकार उन तक हर मदद पहुंचाने का काम करेगी।

राज्य के श्रम सचिव राजीव अरुण अरुण एक्का ने कहा कि राज्य से बाहर गए मजदूरों के पास निबंधन कार्ड है। उसपर जिलों के श्रम अधिकारियों के मोबाइल नंबर हैं। वह वहां संपर्क कर सकते हैं. जिनके पास नंबर नहीं है, ऐसे लोग अपने जिले में किसी भी सरकारी अधिकारी को फोन कर जानकारी दे सकते हैं। साथ ही गांव के स्तर पर पंचायत मित्र को ऐसे लोगों से संपर्क में रहने को कहा है।

रांची रेल मंडल के सीपीआरओ नीरज कुमार ने बताया कि सोमवार की शाम को आखिरी ट्रेन (सवारी) आई है। अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उनके मुताबिक हर दिन 56 ट्रेनों का आवागमन होता था. फिलहाल 80 मालगाड़ी हर दिन चल रही हैं।